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लोकसभा चुनाव 2019: एडीआर का सर्वे- शराब, नकदी, उपहार लेकर वोट देते हैं 17 फीसदी वोटर
Sun, 05 May 2019 12:05 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 05 May 2019 12:05 PM IST
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फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर एडीआर ने सर्वे किया तो उसमें वोटरों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सर्वे के मुताबिक, पंजाब के 80 फीसदी मतदाता पार्टियों या प्रत्याशियों की ओर से नकद, उपहार या शराब का प्रलोभन दिए जाने को पूरी तरह गलत मानते हैं, लेकिन 17 फीसदी मतदाता ऐसे भी हैं, जो इस तरह के लालच को जरूरी ही नहीं मानते, बल्कि किसी विशेष प्रत्याशी को वोट देने के लिए महत्वपूर्ण कारक भी मानते हैं।
यह बात एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) और आरए एस्टरिस्क कम्प्यूटिंग एंड डाटा सॉल्यूशंस (आरएएसी) द्वारा कराए गए मतदाता सर्वेक्षण में सामने आई है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि राज्य सरकार मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर ध्यान नहीं दे सकी और इस मुद्दे पर सरकार का प्रदर्शन कहीं खराब तो कहीं बहुत कमजोर आंका गया है।
सर्वे के तहत, पंजाब की सभी 13 संसदीय सीटों के विभिन्न आयु, धर्म, जाति, लिंग और शहरी-ग्रामीण क्षेत्र से संबद्ध लगभग 6500 मतदाता से चुनाव से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सवाल किए गए। इस सर्वेक्षण में जहां मतदाताओं से शासन के मुद्दों पर सवाल किए गए, वहीं मतदाताओं के वोट डालने के प्रति व्यवहार का आकलन भी किया गया।
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यह सर्वेक्षण 57 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों और 43 फीसदी शहरी क्षेत्रों में 75 फीसदी पुरुष और 25 फीसदी महिला मतदाताओं के बीच किया गया, जिनमें 66 फीसदी मतदाता सामान्य वर्ग से, 33 फीसदी एससी और 1 फीसदी ओबीसी वर्ग से थे।
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यह बात एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) और आरए एस्टरिस्क कम्प्यूटिंग एंड डाटा सॉल्यूशंस (आरएएसी) द्वारा कराए गए मतदाता सर्वेक्षण में सामने आई है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि राज्य सरकार मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर ध्यान नहीं दे सकी और इस मुद्दे पर सरकार का प्रदर्शन कहीं खराब तो कहीं बहुत कमजोर आंका गया है।
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सर्वे के तहत, पंजाब की सभी 13 संसदीय सीटों के विभिन्न आयु, धर्म, जाति, लिंग और शहरी-ग्रामीण क्षेत्र से संबद्ध लगभग 6500 मतदाता से चुनाव से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सवाल किए गए। इस सर्वेक्षण में जहां मतदाताओं से शासन के मुद्दों पर सवाल किए गए, वहीं मतदाताओं के वोट डालने के प्रति व्यवहार का आकलन भी किया गया।
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यह सर्वेक्षण 57 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों और 43 फीसदी शहरी क्षेत्रों में 75 फीसदी पुरुष और 25 फीसदी महिला मतदाताओं के बीच किया गया, जिनमें 66 फीसदी मतदाता सामान्य वर्ग से, 33 फीसदी एससी और 1 फीसदी ओबीसी वर्ग से थे।
संसद, विधानसभा में अपराधी प्रत्याशी नहीं होनें चाहिएं
नकदी, शराब और उपहार को महत्वपूर्ण कारक मानने वाले मतदाताओं में 6 फीसदी तो इन्हें अति महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि 11 फीसदी ने इन्हें केवल महत्वपूर्ण ही कहा। 52 फीसदी मतदाताओं का दावा रहा कि उन्हें ऐसी घटनाओं की जानकारी है, जहां मतदाताओं को वोट के बदले उक्त प्रलोभन दिए गए। यानी पंजाब में वोटरों को शराब, नकदी या उपहार जैसे प्रलोभन देने के मामले आम हैं।
इसके विपरीत, 98 फीसदी मतदाताओं का यह भी मत है कि संसद या राज्य विधानसभा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी नहीं होने चाहिएं। हालांकि ऐसे प्रत्याशियों को वोट देने वाले 39 फीसदी मतदाता इसलिए उन्हें वोट देते हैं, क्योंकि वे प्रत्याशी उनकी जाति या धर्म से जुड़े होते हैं।
आपराधिक पृष्टभूमि वालों को 37 फीसदी लोग इसलिए वोट दे देते हैं कि ऐसे प्रत्याशी बाकी प्रत्याशियों के मुकाबले अच्छा काम करते हैं, जबकि 35 फीसदी लोग यह सोचकर वोट दे देते हैं कि प्रत्याशी पर लगे अपराध के आरोप गंभीर प्रकृति के नहीं हैं।
इसके विपरीत, 98 फीसदी मतदाताओं का यह भी मत है कि संसद या राज्य विधानसभा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी नहीं होने चाहिएं। हालांकि ऐसे प्रत्याशियों को वोट देने वाले 39 फीसदी मतदाता इसलिए उन्हें वोट देते हैं, क्योंकि वे प्रत्याशी उनकी जाति या धर्म से जुड़े होते हैं।
आपराधिक पृष्टभूमि वालों को 37 फीसदी लोग इसलिए वोट दे देते हैं कि ऐसे प्रत्याशी बाकी प्रत्याशियों के मुकाबले अच्छा काम करते हैं, जबकि 35 फीसदी लोग यह सोचकर वोट दे देते हैं कि प्रत्याशी पर लगे अपराध के आरोप गंभीर प्रकृति के नहीं हैं।
मतदाताओं को सरकार से तीन प्रमुख उम्मीदें
सर्वेक्षण में पाया गया कि पूरे पंजाब में मतदाताओं की तीन प्रमुख प्राथमिकताएं - रोजगार के बेहतर अवसर (51.70 फीसदी मतदाता), कृषि कर्ज की उपलब्धता (33.85 फीसदी) और कृषि उत्पादों के लिए अधिक मूल्यों की प्राप्ति (31.09 फीसदी मतदाता) है। मतदाताओं ने राज्य सरकार के प्रदर्शन को भी इन्हीं तीन प्राथमिकताओं के आधार पर आंका है।
ग्रामीण मतदाताओं की प्राथमिकताओं में जहां कृषि कर्ज की उपलब्धता (60 फीसदी मतदाता) सर्वोच्च है, वहीं कृषि उत्पादों के अधिक दाम (55 फीसदी) और बीज/उर्वरकों के लिए सब्सिडी (49 फीसदी मतदाता) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। लेकिन शहरी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में सबसे आगे रोजगार के बेहतर अवसर (57 फीसदी मतदाता) का मुद्दा है।
शहरी मतदाता बेहतर अस्पताल (49 फीसदी) और जल एवं वायू प्रदूषण (45 फीसदी) को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
ग्रामीण मतदाताओं की प्राथमिकताओं में जहां कृषि कर्ज की उपलब्धता (60 फीसदी मतदाता) सर्वोच्च है, वहीं कृषि उत्पादों के अधिक दाम (55 फीसदी) और बीज/उर्वरकों के लिए सब्सिडी (49 फीसदी मतदाता) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। लेकिन शहरी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में सबसे आगे रोजगार के बेहतर अवसर (57 फीसदी मतदाता) का मुद्दा है।
शहरी मतदाता बेहतर अस्पताल (49 फीसदी) और जल एवं वायू प्रदूषण (45 फीसदी) को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
सरकार से निराशा
सर्वेक्षण में जनता की प्राथमिकताओं के साथ ही यह बात भी सामने आई कि मतदाता अपनी प्राथमिकताओं को लेकर सरकार के रवैये से बहुत खुश नहीं हैं। ग्रामीण मतदाताओं ने राज्य में कृषि कर्ज की उपलब्धता, कृषि उत्पादों के अधिक मूल्य और बीज/उर्वरकों पर सब्सिडी के मामले में सरकार को पांच में से क्रमश: 1.82, 1.85 और 1.96 फीसदी रेटिंग ही दी।
इसी तरह, शहरी मतदाताओं ने भी बेहतर अस्पतालों के मामले में सरकार को 2.02, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के मामले में 2.00 और जल एवं वायू प्रदूषण के मामले में 1.82 रेटिंग दी है। इसके अलावा शहरी पंजाब में यातायात संतुलन के मुद्दे पर सरकार को 1.67 और बेहतर सड़कों के मामले में 1.70 रेटिंग दी गई है।
इसी तरह, शहरी मतदाताओं ने भी बेहतर अस्पतालों के मामले में सरकार को 2.02, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के मामले में 2.00 और जल एवं वायू प्रदूषण के मामले में 1.82 रेटिंग दी है। इसके अलावा शहरी पंजाब में यातायात संतुलन के मुद्दे पर सरकार को 1.67 और बेहतर सड़कों के मामले में 1.70 रेटिंग दी गई है।