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लोकसभा चुनाव 2019: हरियाणा में आप-कांग्रेस गठबंधन पर विराम, जेजेपी पहले ही झाड़ चुकी थी पल्ला
Fri, 19 Apr 2019 06:18 AM IST
Vikas Kumar
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 19 Apr 2019 06:18 AM IST
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aap and congress
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में कांग्रेस के साथ चुनावी पारी खेलने की आम आदमी पार्टी की हसरत धरी की धरी रह गई। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लेकर हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने हाथ के साथ गठबंधन की गांठ जोड़ने के लिए खूब जोर लगाया पर दाल गल नहीं पाई। आप के गठबंधन के प्रस्ताव और सीटों के बंटवारे के फार्मूले को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तरजीह ही नहीं दी। इसमें हुड्डा को प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद का भी पूरा साथ मिला। यही नहीं, प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर व एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी गठबंधन न करने पर अड़े रहे। जिससे आप का गठबंधन का प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया।
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हरियाणा में आप के साथ लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन कर चुकी जननायक जनता पार्टी पहले ही कांग्रेस के साथ जाने से साफ इनकार कर चुकी थी। जजपा नेता दुष्यंत के कांग्रेस से परहेज ने भी आप की राह कठिन की। वीरवार को जजपा के अपने हिस्से की सात में से चार सीटों पर उम्मीदवार घोषित करने से कांग्रेस और आप गठबंधन पर पूरी तरह विराम लग गया है। जजपा के साथ आप नेताओं ने भी साफ कर दिया है कि दोनों दल ही हरियाणा के चुनावी दंगल में मिलकर ताल ठोकने जा रहे हैं।
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आप के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने कहा है कि वह खुले मन से गठबंधन का प्रस्ताव लेकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास गए थे, लेकिन उन्होंने तवज्जो नहीं दी। उधर, दुष्यंत चौटाला ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता था। सिर्फ अटकलें थी, जजपा और आप का गठबंधन हरियाणा के अटूट के साथ मजबूत है। दोनों दल न केवल मजबूती से चुनाव लडें़गे, बल्कि जीत भी दर्ज करने जा रहे हैं। जजपा के प्रत्याशी घोषित करने के बाद आप भी शुक्रवार या शनिवार को अपने उम्मीदवार मैदान में उतार देगी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस हिसार, कुरुक्षेत्र, करनाल और सोनीपत सीटों पर जल्दी अपने पत्ते खोलेगी। एक-दो दिन में हर हाल में कांग्रेस हाईकमान चारों उम्मीदवार घोषित कर देगा।
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हरियाणा के चुनावी दंगल में कांग्रेस का साथ आप इसलिए चाह रही थी कि लोकसभा चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई जा सके। चूंकि, 2014 में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ चुकी आप को उम्मीद अनुरूप वोट नहीं मिले थे। कांग्रेस के साथ गठबंधन में आप एक सीट पर भी लड़ने को तैयार हो गई थी। इससे साफ है कि आम आदमी पार्टी की लड़े अभी तक हरियाणा में धरातल पर उतनी मजबूत नहीं हैं।
जजपा के लिए मुश्किल हो जाती विधानसभा की राह
हरियाणा में जजपा किसी भी हाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करना चाहती। अगर ऐसा करती तो इनेलो के विघटन के बाद अस्तित्व में आई जजपा के पनपने से पहले ही उस पर ग्रहण लग जाता। इसलिए दुष्यंत चौटाला अड़े रहे कि कांग्रेस के साथ किसी भी स्थिति में हाथ नहीं मिलाएंगे।
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