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Election: खिसकी सियासी जमीन वापस पाने को जद्दोजहद... भाजपा के सामने खुद को साबित करने की चुनौती

Sat, 18 May 2024 10:15 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, सुनाम उधम सिंह वाला
अमर उजाला नेटवर्क, सुनाम उधम सिंह वाला Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 18 May 2024 10:15 AM IST
सार

पंजाब में सभी दल खिसकी सियासी जमीन वापस पाने को जद्दोजहद कर रहे हैं। मालवा में 2022 से कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा हाशिये पर है।

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Lok Sabha Election 2024 Parties struggling to regain lost political ground
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मालवा इलाका खेती पैदावार में अव्वल रहने के साथ पंजाब की सियासत का रुख तय करने में कारगर भूमिका में रहता है। 1966 से 2022 तक पंजाब में 18 मुख्यमंत्री बने हैं और 16 मुख्यमंत्री, मालवा से रहे हैं। वर्तमान में भी मुख्यमंत्री भगवंत मान मालवा से हैं। 
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सवा दो साल पहले चली बदलाव की लहर में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करके पंजाब की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस, अकाली दल को हाशिये पर धकेल दिया था। हाशिये पर आई कांग्रेस व अकाली दल अब मालवा में अपनी खोई सियासी जमीन तलाश रहे हैं और आप से सियासी जमीन वापस लेने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। 
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वहीं भाजपा, मालवा के इस किसान बाहुल्य क्षेत्र में अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सियासी जमीन नापने की कोशिश कर रही है और जनाधार बढ़ाने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना कर आगे बढ़ रही है। 
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दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान भी किसी भी सियासी दल के लिए मैदान खुला नहीं छोड़ रहे हैं। सीएम तमाम दलों के समक्ष कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। सभी दल तू डाल-डाल, मैं पात-पात के तहत एक-दूसरे को पटकनी देने की कोशिश में हैं।
 

कांग्रेस: आप का किला भेदने की कोशिश
कांग्रेस अपने तेजतर्रार नेता सुखपाल सिंह खैरा के जरिये मालवा में एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश में है। कांग्रेस, मालवा में खिसके जनाधार को पाने के अलावा आप का किला भेदने की कोशिश में है और अकाली दल को सीमित रखना चाहती है। पटियाला में सशक्त चेहरा डॉ. धर्मवीर गांधी और मालवा, दोआबा की सीमांत लुधियाना सीट से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को उतारा है। आनंदपुर साहिब से दिग्गज नेता विजयइंदर सिंगला को उतारा है। कांग्रेस इन मजबूत चेहरों के सहारे लोकसभा चुनाव जीतना चाहती है और इसी के दम पर कांग्रेस 2027 में पंजाब की सत्ता पर वापसी के सपने पाल रही है।
 

शिअद: पंथक वोट पर विशेष नजर
शिरोमणि अकाली दल ने बठिंडा से तीन बार की सांसद हरसिमरत कौर बादल, आनंदपुर साहिब से भी तीन बार के सांसद प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा और पटियाला से दो बार के विधायक एनके शर्मा के सहारे दूर हुए कोर वोट बैंक को अकाली दल साथ लाना चाहता है। मालवा, कभी अकाली दल का गढ़ रहा है, लेकिन आप ने विधानसभा चुनाव में अकाली दल का मालवा से सफाया कर दिया था। अकाली दल के सामने मालवा की सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है और इससे भी बड़ी चुनौती सुखबीर सिंह बादल के समक्ष है। पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और लोकसभा चुनाव के नतीजे पार्टी और जनता में उनकी असली पोजीशन तय करेंगे।

भाजपा: खुद को साबित करने की चुनौती
भाजपा भी मालवा में पीछे नहीं रहना चाहती और खुद को यहां साबित करना चाहती है। भाजपा नेतृत्व हर कसौटी पर मालवा को परख रहा है। पार्टी, हर नजरिए व हर पहलू के आधार पर मालवा का आंकलन कर रही है। भाजपा की नजर वोट के ध्रुवीकरण के आकार पर भी है और आकार देख कर भाजपा मालवा में अपनी भविष्य की रणनीति तय करेगी। मालवा की पटियाला सीट से परनीत कौर, संगरूर से अरविंद खन्ना, बठिंडा से परमपाल कौर सिद्धू व लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू के जरिये भाजपा अपनी सियासी मंजिल के करीब पहुंचना चाहती है। पंजाब में भाजपा, सिख व हिंदू चेहरे में संतुलन बनाकर चली है।
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