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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok Sabha Election 2019, Sukhpal Khaira Resignantion Letter to Arvind Kejirwal, AAP

पढ़ें, वो पत्र जो सुखपाल खैरा ने 'आप' के अरविंद केजरीवाल को लिखा, गिनाए पार्टी छोड़ने के कारण

Sun, 06 Jan 2019 04:23 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कपूरथला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कपूरथला (पंजाब) Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 06 Jan 2019 04:23 PM IST
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Lok Sabha Election 2019, Sukhpal Khaira Resignantion Letter to Arvind Kejirwal, AAP
सुखपाल खैरा - फोटो : file photo
सुखपाल खैरा ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा और 'आप' से इस्तीफा दे दिया। एचएस फूलका के बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष व भुलत्थ के विधायक सुखपाल खैरा ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल को भेजे इस्तीफा पत्र में सुखपाल खैरा ने पार्टी छोड़ने के कई कारण गिनाए हैं।
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पत्र में खैरा ने लिखा है कि वह आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि पार्टी उन सभी आदर्शों और विचारधारा से पूरी तरह से भटक चुकी है, जिन पर चलते हुए अन्ना आंदोलन के बाद इसको बनाया गया था। बताने की जरूरत नहीं कि देश की परंपरागत राजनैतिक पार्टियों का मौजूदा राजनैतिक कल्चर बुरी तरह से गंदा हो चुका है, जिस कारण आम आदमी पार्टी के बनने पर लोगों को बेहद उम्मीद जागी थी।
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भ्रष्ट व्यवस्था को साफ करने के उद्देश्य से भारत के राजनैतिक घटनाक्रम में आम आदमी पार्टी के उभरने से विश्व के दूसरे लोगों की तरह मैं भी बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बसते पंजाबियों ने उन्हें आपकी पार्टी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, जिससे पंजाब के हालत सुधारे जा सकें। बदकिस्मती से पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि आम आदमी पार्टी की कार्यशैली दूसरी परंपरागत राजनैतिक पार्टियों की अपेक्षा किसी पक्ष से भी अलग नहीं थीं।
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पार्टी में किसी प्रकार का भी अंदरूनी लोकतंत्र नहीं है

सुखपाल खैरा ने लिखा कि 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले हुए घटनाक्रम ने उनकी इस सोच को पुख्ता साबित किया कि पार्टी में किसी प्रकार का भी अंदरूनी लोकतंत्र नहीं है। आपको याद हो उन्होंने पंजाब विधानसभा की टिकटों के आवंटन पर सख्त एतराज जताया था, क्योंकि पैसों के लेन-देन और पक्षपात की शिकायतें मिलीं थीं। अतिविश्वास के कारण आप पंजाबियों की मानसिकता समझने में भी असफल रही।

आपने सिर्फ अपने दो सूबेदारों की ही बात सुनी, जो पंजाब को चलाने के लिए नियुक्त किए थे और जमीनी स्तर के आम आदमी पार्टी वालंटियरों की भावनाओं का रती भर भी ख्याल नहीं किया। पंजाब में मुख्यमंत्री का कोई भी चेहरा न देकर आपने अक्सर लगाए जाते इन इल्जामों को भी पुख्ता साबित किया कि जीत के बाद कोई बाहरी व्यक्ति आकर सूबे को चलाएगा। पंजाब का इतिहास गवाह है कि पंजाबी किसी बाहरी व्यक्ति की अधीनता नहीं मानते।

जैसी कि आशा थी आपके सूबेदारों की तरफ से अक्सर किए जाते 100 सीटों के दावों के बावजूद पार्टी सिर्फ 20 सीटें ही प्राप्त कर सकी। दुखदायी पहलू यह है कि एक पार्टी जो कि पारदर्शिता और जवाबदेही की पक्षधर हो, किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को इस शर्मनाक हार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकी। यह भी तथ्य है कि इन सूबेदारों में से ही एक आज भी पर्दे के पीछे से पंजाब को चला रहा है, जबकि उसकी भारी खिलाफत रही।

दोगले बयानों ने भारत के चतुर नेताओं की जमात में ला खड़ा किया

सुखपाल खैरा ने लिखा कि ड्रग्स के दागी पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया के पास आपकी तरफ से मांगी गई कायरतापूर्ण माफी ने राजनीति में आपके दोहरे मापदंडों का खुलासा किया। पंजाब के दरियाओं के पानी के अहम मुद्दे पर आपके दोगले बयानों ने आपको भारत के चतुर नेताओं की जमात में ला खड़ा किया। सभी ताकतों का केंद्रीयकरण अपने पास रखकर आप सबसे अहम वायदे स्वराज से भी सरेआम मुकर गए हो।

सिर्फ पार्टी पर अपना कब्जा रखने और कनवीनर बने रहने के लिए आप पार्टी के संविधान को भी ताक पर रख दिया। कांग्रेस के साथ फिर हो रही आपकी बातचीत भी राजनैतिक मौकापरस्ती का एक उदाहरण है, जिसने भारत के लोगों को हैरान कर दिया है। उन्हें यह बताते बहुत दुख हो रहा है कि गल सड़ चुकी व्यवस्था का एक साफ विकल्प देकर भारतीयों और पंजाबियों के सपनों को आपके तानाशाही व्यवहार ने तहस नहस करके रख दिया है। जिसके नतीजे के तौर पर प्रशांत भूषण से लेकर एचएस फूलका तक पार्टी के अहम नेता या तो पार्टी छोड़ गए हैं या आपने उन को बाहर निकाल दिया है।

साफ सुथरे राजनैतिक विकल्प के सपने को पंजाब में हकीकत में बदलने के लिए हम आज भी आस रखे हुए हैं, जो आपके मुकम्मल केंद्रीयकरण वाले हाईकमान कल्चर का हिस्सा रहकर पूरा होना असंभव है। चाहे आप हमारे अच्छे कामों का इनाम उन्हें और कंवर संधू को पार्टी में से सस्पेंड करके दे चुके हो, परंतु अब वह आपसे और आम आदमी पार्टी से नाता पूरी तौर पर तोड़ने के लिए मजबूर हैं और आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हैं।
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