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इनेलो में रारः अगर नहीं थमी विरासत की जंग तो लोकसभा चुनाव 2019 में बढ़ सकती है परेशानी

Sun, 11 Nov 2018 10:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 11 Nov 2018 10:29 AM IST
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Lok Sabha Election 2019, Revolt in INLD May Creat Problems for Party in Future
ajay chautala
इनेलो में यदि विरासत का विवाद जल्द नहीं थमा तो आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की चुनौतियां और अधिक बढ़ जाएंगी। हालांकि ,अभी इस विवाद के थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो चुनावों में इनेलो की डगर आसान नहीं होगी। पार्टी का विवाद जिस तरह से तूल पकड़ रहा है, पार्टी पर दोफाड़ का संकट भी गहरा चुका है। चाचा भतीजे की तकरार से शुरू हुआ विवाद में भाई और भाई के बीच भी तलवारें खिंच गई हैं।
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इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला द्वारा अनुशानहीनता के आरोप में सांसद दुष्यंत चौटाला को पार्टी से निष्कासित करने के बाद उनके पिता इनेलो महासचिव अजय चौटाला व उनकी माता विधायक नैना चौटाला अब खुलकर अपने बेटे के समर्थन में खड़ी हो गए हैं। बिना नाम लिए अजय चौटाला इस प्रकरण के लिए अपने छोटे भाई अभय समेत कुछ अन्य लोगों पर निशाना साध रहे हैं। अजय 17 नवंबर को जींद में इसी विवाद के संबंध में बड़ा एलान करने वाले हैं। उधर, नेता प्रतिपक्ष चाचा अभय चौटाला और सांसद दुष्यंत चौटाला में अंदरखाते वैचारिक मतभेद पिछले कई महीनों से चल रहा थे, लेकिन ये मतभेद अब चुनावी समय में खुलकर सामने आ गए हैं।
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इसकी शुरुआत हुई इनेलो की गोहाना रैली से, जो 7 अक्टूबर को ताऊ देवीलाल की जयंती पर आयोजित की गई थी। इस रैली में जब अजय चौटाला भाषण दे रहे थे, तो पंडाल में बैठे सांसद दुष्यंत और इनेसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के समर्थकों ने जबरदस्त हूटिंग की। इससे रैली में मौजूद जेल से पेरोल पर आए इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश काफी खफा हुए और उन्होंने इनसो को भंग कर दिया और दिग्विजय व दुष्यंत को निलंबित कर दिया। विवाद और बढ़ा तो दुष्यंत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद दुष्यंत अपनी लामबंदी करने लगे। और अब ये विवाद इस मोड़ पर आ चुका है कि वास्तव में इनेलो किसकी है?
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इस तरह बढ़ेगी चुनावी चुनौतियां
भर्ती घोटाले में सजा भुगत रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला के जेल जाने के बाद पार्टी बिखरी गई थी। लेकिन छोटे बेटे अभय चौटाला ने वर्करों को बांधे रखा और वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटें भी जीती। अब 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव फिर दस्तक रहा है, लेकिन इनेलो में विरासत की जंग शुरू हो चुकी है। ऐसे में यदि पार्टी टूटती है, तो स्वाभाविक है कि इनेलो की ताकत भी बंट जाएगी और मौजूदा विधायक भी बंट जाएंगे। उधर, विरोधी दल भी इस बिखराव का फायदा उठाने की पूरी फिराक में है। ऐसे में पिछले 14 साल से सत्ता से बाहर इनेलो के लिए ऐसे माहौल में चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।
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