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इनेलो पर कब्जे की जंग: देवीलाल की राह पर दुष्यंत, अभय चौटाला को बाहर करने की तैयारी
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 11 Nov 2018 10:26 AM IST
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दुष्यंत चौटाला
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लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और ताऊ देवीलाल की विरासत के लिए चाचा-भतीजों के बीच शुरू हो चुके क्लेश में अब इनेलो पर कब्जे की जंग तेज हो चुकी है। नेता विपक्ष अभय चौटाला ने भतीजों को बाहर का रास्ता दिखा कर अपना दांव चल दिया है। अब बारी दूसरे खेमे की है। ऊंट किस करवट बैठेगा यह कहना मुश्किल है, लेकिन 17 नवंबर को प्रदेश महासचिव अजय चौटाला की ओर से जींद में बुलाई गई पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा निर्णय होगा। बहुमत की स्थिति में अभय चौटाला को पार्टी से निष्कासित भी किया जा सकता है। इस बात के संकेत सांसद दुष्यंत चौटाला और उनके समर्थकों ने दिए हैं।
हालांकि पार्टी में टूट की स्थिति न बने इसके लिए पार्टी में बड़े स्तर तक प्रयास शुरू हो गए हैं। उधर, इनेलो से निष्कासित सांसद दुष्यंत चौटाला अपने चाचा अभय चौटाला के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। दुष्यंत का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से उनके निष्कासन का कोई हस्ताक्षरित पत्र नहीं दिया गया है। लिहाजा उन्हें यह विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला ने उन्हें पार्टी से निष्कासित किया है। दुष्यंत यह मानने को भी तैयार नहीं हैं कि उनका निष्कासन इनेलो से कानूनी ढंग से हो चुका है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने निष्कासन को चुनौती दे डाली। दुष्यंत ने दावा किया जिन नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है, उनके पास कोई अधिकार नहीं है। ओमप्रकाश चौटाला ने आज तक उनके निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
दुष्यंत ने कहा कि वह पार्टी के संसदीय दल के नेता के पद पर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश कार्यकारिणी या प्रदेश कार्यालय सचिव के पास उन्हें निलंबित या निष्काषित करने का अधिकार नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार केवल राष्ट्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास है। दुष्यंत ने कहा कि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में पार्टी नेतृत्व से सबूत मांगे थे, जोकि अब तक नहीं मिले हैं। जिस अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें कौन लोग शामिल थे, उनके बारे में कुछ नहीं बताया गया।
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उन्होंने पार्टी कार्यालय एवं ओमप्रकाश चौटाला को पत्र भेजकर अपने ऊपर लगे आरोपों के सबूत व अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा था, लेकिन समय देने के बजाए अजय चौटाला के पैरोल पर बाहर आने से 48 घंटे पहले उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुने बगैर एकतरफा कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर किया गया है। यह पूरी कहानी बंद कमरे में बैठकर तैयार की गई है, जिसे ओमप्रकाश चौटाला का नाम देकर सार्वजनिक किया गया। दुष्यंत ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम के दौरान दो बार ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात कर चुके हैं। इसी का परिणाम है कि ओमप्रकाश चौटाला ने आजतक उनके निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस कार्रवाई के दौरान निलंबन व निष्कासन की किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है।
सोशल इंजीनियरिंग का मैसेज
पत्रकार वार्ता में दुष्यंत चौटाला ने सोशल इंजीनियरिंग का संदेश देने का काम किया। उन्होंने अपना मंच सभी बिरादरी के नेताओं के साथ साझा किया। जाट, दलित और गैर जाट नेताओं को अपने बगल में बैठाकर दुष्यंत ने ताऊ देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला की राजनीति को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। इस दौरान उनके साथ डा. केसी बांगड़, फूलवती, पूर्व मंत्री जगदीश नैयर, अशोक शेरवाल, किसान सेल के पूर्व चेयरमैन निशान सिंह, उकलाना के विधायक अनूप धानक, पूर्व विधायक कलीर राम पटवारी, नरवाना के विधायक पृथ्वी सिंह नंबरदार, पूर्व विधायक रमेश खटक और पूर्व विधायक मक्खन सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे।
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हालांकि पार्टी में टूट की स्थिति न बने इसके लिए पार्टी में बड़े स्तर तक प्रयास शुरू हो गए हैं। उधर, इनेलो से निष्कासित सांसद दुष्यंत चौटाला अपने चाचा अभय चौटाला के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। दुष्यंत का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से उनके निष्कासन का कोई हस्ताक्षरित पत्र नहीं दिया गया है। लिहाजा उन्हें यह विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला ने उन्हें पार्टी से निष्कासित किया है। दुष्यंत यह मानने को भी तैयार नहीं हैं कि उनका निष्कासन इनेलो से कानूनी ढंग से हो चुका है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने निष्कासन को चुनौती दे डाली। दुष्यंत ने दावा किया जिन नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है, उनके पास कोई अधिकार नहीं है। ओमप्रकाश चौटाला ने आज तक उनके निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
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दुष्यंत ने कहा कि वह पार्टी के संसदीय दल के नेता के पद पर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश कार्यकारिणी या प्रदेश कार्यालय सचिव के पास उन्हें निलंबित या निष्काषित करने का अधिकार नहीं है। उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार केवल राष्ट्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास है। दुष्यंत ने कहा कि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में पार्टी नेतृत्व से सबूत मांगे थे, जोकि अब तक नहीं मिले हैं। जिस अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें कौन लोग शामिल थे, उनके बारे में कुछ नहीं बताया गया।
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उन्होंने पार्टी कार्यालय एवं ओमप्रकाश चौटाला को पत्र भेजकर अपने ऊपर लगे आरोपों के सबूत व अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा था, लेकिन समय देने के बजाए अजय चौटाला के पैरोल पर बाहर आने से 48 घंटे पहले उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुने बगैर एकतरफा कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर किया गया है। यह पूरी कहानी बंद कमरे में बैठकर तैयार की गई है, जिसे ओमप्रकाश चौटाला का नाम देकर सार्वजनिक किया गया। दुष्यंत ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम के दौरान दो बार ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात कर चुके हैं। इसी का परिणाम है कि ओमप्रकाश चौटाला ने आजतक उनके निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस कार्रवाई के दौरान निलंबन व निष्कासन की किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया को नहीं अपनाया गया है।
सोशल इंजीनियरिंग का मैसेज
पत्रकार वार्ता में दुष्यंत चौटाला ने सोशल इंजीनियरिंग का संदेश देने का काम किया। उन्होंने अपना मंच सभी बिरादरी के नेताओं के साथ साझा किया। जाट, दलित और गैर जाट नेताओं को अपने बगल में बैठाकर दुष्यंत ने ताऊ देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला की राजनीति को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। इस दौरान उनके साथ डा. केसी बांगड़, फूलवती, पूर्व मंत्री जगदीश नैयर, अशोक शेरवाल, किसान सेल के पूर्व चेयरमैन निशान सिंह, उकलाना के विधायक अनूप धानक, पूर्व विधायक कलीर राम पटवारी, नरवाना के विधायक पृथ्वी सिंह नंबरदार, पूर्व विधायक रमेश खटक और पूर्व विधायक मक्खन सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे।