फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok Sabha Election 2019, Revolt in INLD, Ajay Chautala Expelled from Party

इनेलो में रार: सुलह की सारी संभावनाएं खत्म, बेटों के बाद अजय चौटाला भी पार्टी से निष्काषित

Thu, 15 Nov 2018 04:28 AM IST
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 15 Nov 2018 04:28 AM IST
विज्ञापन
Lok Sabha Election 2019, Revolt in INLD, Ajay Chautala Expelled from Party
अजय चौटाला
इंडियन नेशनल लोकदल में लंबे समय से चली आ रही खींचतान दोफाड़ में तब्दील हो गई है। दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद बुधवार को प्रधान महासचिव अजय चौटाला को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला की प्रेस कांफ्रेंस में यह दावा किया गया कि यह निष्कासन पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के हस्ताक्षर से किया गया है।
विज्ञापन


पार्टी के इस स्टैंड के बाद यह साफ हो गया है कि अजय चौटाला जींद में होने वाली बैठक अलग करेंगे और अभय चौटाला चंडीगढ़ में अलग बैठक करेंगे। किस खेमे में कितने विधायक जुटेंगे यह आगामी 17 नवंबर को साफ होगा। अभय ने यह बैठक चंडीगढ़ स्थित जाट भवन में बुलाई है।
विज्ञापन


नेता विपक्ष अभय चौटाला ने यह साफ किया है कि अजय चौटाला ने दस साल राजस्थान की राजनीति की है। उस समय मैं उन्हें पीठ पीछे से मजबूती देता रहा हूं। उनसे पहले मैं हरियाणा की राजनीति में सक्रिय था। मैने पार्टी को मजबूत किया है। ऐसी विषम परिस्थतियों में भी मैने चुनाव लड़ कर जीता है जब राष्ट्रीय दलों की राजनीति के आगे लोग आगे आने से डर रहे थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


मैने रोड़ी का उपचुनाव 98 प्रतिशत मतों से जीता और रिकार्ड बनाया। अब लोग चार साल बनाम चालीस साल का हवाला दे रहे हैं। जिस समय पार्टी सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला जेल गए। उस समय मैने कठिन समय में पार्टी को जोड़ने और मजबूत बनाने का काम किया है। तब यह विधायक मेरे पास आए थे और बोले थे कि आप पार्टी को संभालो हम आपके साथ हैं। अब परिवार में इस तरह की बातें करना शोभा नहीं देता।

अशोक अरोड़ा ने पढ़ कर सुनाया निष्कासन

अभय सिंह चौटाला व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि 12 नवंबर को ओम प्रकाश चौटाला ने एक पत्र दिया था। जिसे जारी करने से पहले पार्टी के तमाम नेताओं ने यह प्रयास किया कि अजय सिंह चौटाला जींद की बैठक को रद्द करें और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ विरोधी राजनीतिक दलों का मुकाबला करे।

अशोक अरोड़ा ने चौटाला के पत्र को सार्वजनिक करते हुए कहा कि बार-बार प्रयासों के बावजूद अजय सिंह चौटाला द्वारा न केवल 17 नवंबर को जींद में एक बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं व नेताओं को भ्रमित किया जा रहा है बल्कि अजय सिंह द्वारा पिछले कई दिनों से की जा कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि वह इनेलो के समानांतर एक संगठन चलाना चाहते हैं। इनेलो हाईकमान जींद में बुलाई गई बैठक को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देती है और अजय सिंह चौटाला को पार्टी के प्रधान महासचिव पद से निष्कासित करती है।

7 अक्टूबर 2018 को चौधरी देवी लाल के जन्मदिवस के दौरान गोहाना में आयोजित कार्यक्रम में कुछ युवकों ने जमकर हूटिंग की थी। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने कार्रवाई करते हुए इस मामले को अनुशासन समिति को कार्यवाही के लिए सौंप दिया था। अनुशासन समिति की जांच के बाद दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

ओमप्रकाश चौटाला ने पार्टी कार्यालय को सूचित किया है कि वास्तव में इस मामले में उन्हें किसी भी बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं थी। वह स्वयं उस आयोजन में उपस्थित थे। उन्होंने अनुशासनहीनता और हुड़दंगबाजी की घटनाएं स्वयं देखी और यह भी देखा कि उनके भाषण में भी लगातार व्यवधान डाला गया था। फिर भी उन्होंने इस पूरे मामले को अनुशासन कार्रवाई समिति को सौंपा था। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि दोनों उन आरोपों के दोषी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दुष्यंत और दिग्विजय सिंह उनके परिवार के ही सदस्य थे। इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई करना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन वे जीवनपर्यंत जन नायक चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों और आदर्शों का पालन करते रहे हैं।
 
परिवार में चल रही थी खींचतान
इनेलो परिवार की खींचतान ओमप्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद शुरू हुई थी कि सत्ता किसे दी जाए। उनकी सत्ता के दो प्रमुख दावेदार हैं। उनमें एक छोटा बेटा अभय चौटाला और दूसरी बड़े बेटे की बहू नैना चौटाला थीं। चौटाला परिवार की सत्ता अभय चौटाला को मिली। इसके बाद कुछ मौकों पर पारिवारिक विवाद सामने आता रहा।

 

लोकसभा चुनाव 2019 में बढ़ सकती है परेशानी

इनेलो में यदि विरासत का विवाद जल्द नहीं थमा तो आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की चुनौतियां और अधिक बढ़ जाएंगी। हालांकि, अभी इस विवाद के थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो चुनावों में इनेलो की डगर आसान नहीं होगी। पार्टी अब दोफाड़ हो गई है, क्योंकि दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के बाद अब अजय चौटाला को भी पार्टी से निकाल दिया गया है।

इसकी शुरुआत हुई इनेलो की गोहाना रैली से, जो 7 अक्टूबर को ताऊ देवीलाल की जयंती पर आयोजित की गई थी। इस रैली में जब अजय चौटाला भाषण दे रहे थे, तो पंडाल में बैठे सांसद दुष्यंत और इनेसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के समर्थकों ने जबरदस्त हूटिंग की। इससे रैली में मौजूद जेल से पेरोल पर आए इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश काफी खफा हुए और उन्होंने इनसो को भंग कर दिया और दिग्विजय व दुष्यंत को निलंबित कर दिया। विवाद और बढ़ा तो दुष्यंत को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

इस तरह बढ़ेगी चुनावी चुनौतियां
भर्ती घोटाले में सजा भुगत रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला के जेल जाने के बाद पार्टी बिखरी गई थी। लेकिन छोटे बेटे अभय चौटाला ने वर्करों को बांधे रखा और वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटें भी जीती। अब 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव फिर करीब हैं, लेकिन इनेलो में विरासत की जंग चल रही है। पार्टी टूट चुकी है, तो अब इनेलो की ताकत भी बंट जाएगी और मौजूदा विधायक भी बंट जाएंगे। उधर, विरोधी दल भी इस बिखराव का फायदा उठाने की पूरी फिराक में है। ऐसे में पिछले 14 साल से सत्ता से बाहर इनेलो के लिए ऐसे माहौल में चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed