लोकसभा चुनाव 2019: जो बंटते वोट संभालेगा, वही बनेगा सियासत का ‘सिंकदर’
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हरियाणा में सोमवार को मतदान हैं। मतदाताओं को अपने मतदान की ताकत से विभिन्न सीटों पर चुनाव लड़ रहे 223 प्रत्याशियों में से 10 उम्मीदवारों को जितवाकर संसद की दहलीज तक पहुंचाना है। लेकिन ये 10 विजेता प्रत्याशी कौन होंगे, इसका फैसला संसदीय क्षेत्रों के समीकरण तय करेंगे। इन समीकरणों में एक बड़ा फैक्टर है वोटकटवा उम्मीदवार।
ये वे उम्मीदवार हैं, जो चुनाव में कोई खास करिश्मा तो नहीं कर पाते, मगर अपने समर्थक मतदाताओं की वोट प्राप्त कर मतों को खराब कर देते हैं। उनके द्वार प्राप्त किए वोट उनकी जीत का आधार नहीं बन पाते।
इस बार भी हर सीट पर इस तरह के कई उम्मीदवार हैं। इसके अलावा कई सीटों पर एक ही बिरादरी के खड़े प्रत्याशी भी एक -दूसरे के वोटबैंक में सेंधमारी कर रहे हैं। अलबत्ता, इस सेंधमारी में जो प्रत्याशी अपने बंटते वोट संभालेगा, वहीं लोकसभा चुनाव में सियासत का ‘सिंकदर’ बनेगा।
अंबाला लोकसभा की बात करें तो इस सुरक्षित सीट पर कुल 18 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें 5 निर्दलीय, 8 रजिस्ट्रीकृत राजनीतिक दलों और 5 राष्ट्रीय व राज्य मान्यता प्राप्त दलों से संबद्ध है। भाजपा और कांग्रेस समेत सभी प्रत्याशी अनुसूचित बिरादरी से हैं। देखना यह है कि ये प्रत्याशी अपना वोट बैंक संभालते हुए कैसे दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी करते हैं।
कुरुक्षेत्र सीट पर 24 प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दलों के 4, रजिस्ट्रीकृत सियासी दलों के 9 और निर्दलीय 11 प्रत्याशी शामिल हैं। कांग्रेस, इनेलो और बसपा-लोसुपा गठबंधन ने यहां एक ही बिरादरी के प्रत्याशी उतारे हैं। जाहिर है वोट बंटेगी। अब देखना होगा कौन बंटती वोट संभालेगा।
सिरसा सुरक्षित सीट पर 20 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 4, रजिस्ट्रीकृत दलों के 8 व निर्दलीय 8 प्रत्याशी शामिल हैं। लिहाजा यहां भी वोट बैंक के बिखराव और बचाव की चुनौती है। हिसार सीट से 26 प्रत्याशी चुनावी रण में हैं।
यहां भाजपा, इनेलो, जजपा-आप गठबंधन के प्रत्याशी जाट है। ऐसे में तीनों प्रत्याशी में जाट वोट बटेंगी, इसलिए मुकाबला दिलचस्प है। करनाल संसदीय सीट पर 16 योद्धा चुनावी की जंग लड़ रहे हैं।
इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 4, रजिस्ट्रीकृत दलों के 10 व निर्दलीय 2 प्रत्याशी शामिल हैं। मुकाबले में बने भाजपा-कांग्रेस-इनेलो व जजपा के उम्मीदवार चारों अलग बिरादियों से हैं। लिहाजा अपने-अपने वोट बैंक को संभालते हुए सेंधमारी करने से ही जीत मिलेगी।
सोनीपत सीट से 29 प्रत्याशी मुकाबले में हैं। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 3, रजिस्ट्रीकृत दलों के 12 व निर्दलीय 14 प्रत्याशी शामिल हैं। यहां कांग्रेस, इनेलो व जजपा-आप गठबंधन के जाट प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में न केवल जाट वोट बंटेगी, बल्कि 14 आजाद प्रत्याशी भी वोट खराब करेंगे। रोहतक संसदीय क्षेत्र में 18 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 4, रजिस्ट्रीकृत दलों के 6 व निर्दलीय 8 प्रत्याशी शामिल हैं। यहां भी कांग्रेस, इनेलो और जजपा-आप तीनों ने जाट प्रत्याशियों पर दांव खेला है। जाट वोटबैंक का बिखराव ही यहां गुल खिला सकता है। भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर 21 प्रत्याशी चुनावी रण में हैं। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 3, रजिस्ट्रीकृत दलों के 8 व निर्दलीय 10 प्रत्याशी शामिल हैं।
इस सीट पर भी वोट बंटने की पूरी संभावना है, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस व इनेलो और जजपा-आप गठबंधन ने एक ही बिरादरी के उम्मीदवार उतारे हैं। गुरुग्राम सीट पर 24 प्रत्याशियों आमने-सामने हैं। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 4, रजिस्ट्रीकृत दलों के 13 व निर्दलीय 7 प्रत्याशी शामिल हैं। इस सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस व जजपा-आप और लोसुपा-बसपा गठबंधन ने एक ही बिरादरी के प्रत्याशी खड़े किए हैं।
लिहाजा, वोटों का बंटना लाजिमी है। फरीदाबार सीट पर 27 प्रत्याशियों ने चुनावी हुंकार भरी है। इनमें राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय दल के 4, रजिस्ट्रीकृत दलों के 16 व निर्दलीय 7 प्रत्याशी शामिल हैं। इस सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी एक बिरादरी है। इसलिए यहां भी वोटों के बिखराव गेम बिगड़ सकती है।