आतंक पर पाकिस्तान ने नहीं लगाया लगाम तो तीन नादियों का पानी रोकेगा भारतः नितिन गडकरी
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पंजाब-हरियाणा के बीच एसवाईएल पानी विवाद खत्म करने के लिए केंद्र सरकार अध्ययन कर रही है। इसके अनुसार अगर एक नदी में सरप्लस पानी है, तो पानी दूसरे नदी में डाला जाए। इसके लिए एक योजना केंद्र सरकार ने बनाई है।
इस योजना से दोनों राज्यों के बीच पानी का विवाद समाप्त होगा। नितिन गडकरी बुधवार को भाजपा प्रत्याशी हरदीप पुरी के पक्ष में चुनाव रैली से पहले प्रेसवार्ता कर रहे थे।
गडकरी ने कहा कि देश में पानी कि कोई कमी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय ‘नदी जोड़ो’ परिकल्पना को साकार करने के लिए सात नदियों के पानी को समुद्र में जाने से रोकने का काम शुरू किया जा रहा है। आंध्र प्रदेश के बोलवार में सात हजार करोड़ से एक डैम का निर्माण किया जा रहा है।
गोदावरी नदी का लाखों लीटर पानी समुद्र में जाने से रोककर उस पानी को कृष्णा नदी में, कृष्णा नदी का पानी कावेरी में डाल कर उसे तमिलनाडु में भेजने का काम शुरू किया जाएगा। इसी तरह पंजाब-हरियाणा का पानी का विवाद खत्म करने के प्रयास किए जाएंगे।
पटियाला फीडर की क्षमता बढ़ेगी
पंजाब में कांडी नहर चरण दो के विस्तार के लिए पटियाला फीडर की क्षमता बढ़ेगी। इससे पटियाला, होशियारपुर व जालंधर की आबादी को लाभ होगा। 1960 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जरनल अयूब खान व भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत छह नदियां भारत से निकलती हैं, उनमें से तीन नदियों का पानी पाकिस्तान को देना था।
दोनों नेताओं के बीच जो समझौता हुआ हुआ था, उसमें लिखा गया था कि दोनों देशों के बीच के सदियों पुराने संबंधों, पारिवारिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए भारत ने तीन नदियों का पानी पाकिस्तान को देने में अपनी सहमति दी थी। पाकिस्तान इन तीनों नदियों के पानी पर निर्भर है। पाकिस्तान ने आतंकवाद को समर्थन देना बंद न किया, तो भारत इन तीनों नदियों का पानी रोकने में संकोच नहीं करेगा।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर में जलापूर्ति पूरी होगी
भारत सरकार ने तीन नदियों के पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए एक योजना बनाई। इसके लिए शाहपुर कंडी जल परियोजना को मंजूरी दी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली व राजस्थान में डैम का निर्माण किया जा रहा है। 1974 से इन राज्यों में डैम के निर्माण में सहमति नहीं बन रही थी। शाहपुर कंडी डैम से 37 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
रावी नदी पर बनने वाले इस डैम का निर्माण 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। डैम के निर्माण के बाद पंजाब व जम्मू-कश्मीर में जलापूर्ति पूरी होगी। इस डैम से 206 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। सरन व राजस्थान फीडर का पानी ठीक न होने कारण उस क्षेत्र की जमीन खराब हो रही है। दोनों फीडरों की मरम्मत के लिए भारत सरकार ने 2200 करोड़ की राशि जारी की है।
सरन वाटर फीडर की मरमत का काम पूरा होने के बाद 70 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। राज्यस्थान फीडर से 90 हजार एकड़ भूमि की सिंचाई होगी। मुक्तसर साहिब, फरीदकोट व फिरोजपुर में पानी का रिसाव रुक जाएगा। इस व्यवस्था के पूरा होने के बाद राजस्थान के सात जिलों को पानी मिलेगा।
पराली से तैयार की जा रही है बॉयो सीएनजी
गडकरी ने कहा कि किसानों के अच्छे दिनों के लिए उन्हें गेहूं और धान के फसली चक्र से निकालने के लिए केंद्र सरकार ने पावर व एनर्जी सेक्टर में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। चीनी मिलों में एथनॉल का उत्पादन चार से बड़ा कर छह फीसदी कर दिया गया है। किसान जो पराली जलाता है उससे बॉयो सीएनजी का उत्पादन किया जा रहा है। महाराष्ट्र में वातानुकूलित बसें व ट्रैक्टर बॉयो सीएनजी से चल रहे हैं।
47 हजार करोड़ से दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस हाईवे का होगा निर्माण
गडकरी ने कहा कि दिल्ली-अमृतसर-कटरा के बीच एक बड़ा एक्सप्रेस हाईवे बनाया जा रहा है। जिस पर 47 हजार करोड़ कि राशि खर्च की जा रही है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग कि डीपीआर जून में बन जाएगी। इस सड़क के निर्माण के बाद दिल्ली-कटरा की 747 किलोमीटर की दूरी 572 किलोमीटर रह जाएगी। इस एक्सप्रेस के बनने के बाद दिल्ली-अमृतसर की दूरी मात्र चार घंटों में पूरी हो जाएगी।
यह एक्सप्रेस वे हरियाणा के बहादुरगढ़, जींद व रोहतक से होते हुए दिल्ली से जुड़ेगा। दिल्ली से माता वैष्णो देवी जी के दर्शन करने व कश्मीर की वादियों में घूमने के लिए जाने वाले पर्यटकों के समय की बचत करने के साथ-साथ आर्थिक बोझ कम होगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह हाईवे दिल्ली-मुंबई के बीच 120 किलोमीटर की दूरी कम कर देगा।
यह रोड गुरुग्राम से निकलकर अलवर, सवाईमाधोपुर, रतलाम से बड़ोदरा होते हुए मुंबई जाएगा। इस रोड के 60 फीसदी काम का आवंटन हो चुका है। इस रोड से दिल्ली-मुंबई की दूरी 12 घंटे में पूरी की जा सकेगी। एक्सप्रेस वे से अमृतसर-मुंबई की दूरी मात्र 16 घंटे में पूरी हो जाएगी।