कांग्रेस प्रत्याशी पवन बंसल को चुनाव आयोग का नोटिस, 24 घंटे में मांगा जवाब
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल वोटरों को साल में 72 हजार रुपये देने के मामले में घिर गए हैं। निर्वाचन कार्यालय चंडीगढ़ की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर अगले 24 घंटे में जवाब मांगा है।
शिकायत में बताया गया है कि मतदाताओं को लुभाने और उन्हें 72 हजार रुपये देने के लिए एक पम्पलेट में लोगों से खाता नंबर के साथ पूरी डिटेल्स ली गई है। सबूत के तौर पर शिकायर्ता ने आयोग को भरे हुए पम्पलेट के साथ मीटिंग के रिकॉर्ड मुहैया कराए गए हैं।
चंडीगढ़ में चुनाव की तिथि नजदीक आते ही राजनीतिक दलों में वोटरों को लुभाने के लिए घमासान मच गया है। बुधवार को भाजपा इलेक्शन सेल कन्वीनर शिवाय धीर ने निर्वाचन कार्यालय को शिकायती पत्र भेज देकर कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पर वोटरों को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस पत्र में बताया गया है कि कांग्रेस प्रत्याशी और उनके कार्यकर्ता शहर में वोटरों को एक साल में 72 हजार रुपये देने का प्रलोभन दे रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस की ओर से एक विशेष प्रकार का पम्पलेट छपवाया गया है।
जिसमें वोटरों से उनके बैंक के खाता नंबर के साथ अन्य डिटेल्स भरवाया जा रहा है। शिकायत में यह भी बताया गया कि कांग्रेस के लोग यह भी वोटरों से कह रहे हैं कि जल्द ही 72 हजार की पहली किस्त आ जाएगी। भाजपा इलेक्शन सेल के कंवीनर ने आयोग को बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
सुबूत के तौर पर शिकायतकर्ता ने आयोग को कांग्रेस के भरे पम्पलेट के साथ अन्य रिकॉर्ड प्रस्तुत किए हैं। लोकसभा इलेक्शन में चुनाव संहिता के इंचार्ज अनिल गर्ग ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित पक्ष को नोटिस जारी करके अगले 24 घंटे में जवाब मांगा गया है। उनका कहना है कि जवाब मिलने के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
घोषणा पत्र की भी हुई शिकायत
इस शिकायत में कांग्रेस के घोषणा पत्र को भी संलग्न किया गया है। जिसमें बताया गया है कि जो पम्पलेट कांग्रेस द्वारा बांटे जा रहे हैं, वही बात उनके घोषणा पत्र में भी अंकित है। शिकायतकर्ता का कहना है कि घोषणा पत्र में जिस प्रकार से कांग्रेस ने 72 हजार रुपये देने का की बात कही है। वह पूरी तरह से चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आता है। इसके लिए आयोग को पर्याप्त सुबूत भी दिए गये है।