फिरोजपुर सीट को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह और जाखड़ आमने-सामने, पार्टी में भी बगावत के उठ रहे सुर
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पंजाब में कांग्रेस को प्रत्याशियों के चयन के बाद संबंधित हलकों में अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पार्टी के भीतर किसी एक प्रत्याशी को लेकर सर्वसम्मिति बना पाना मुश्किल हो रहा है। नई दिल्ली में राहुल गांधी के निवास पर हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के दौरान ऐसे ही मतभेद उजागर हुए। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से मीडिया में खुलासा नहीं किया गया है।
पता चला है कि स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़, पंजाब मामलों की प्रभारी आशा कुमारी भी मौजूद रहीं। प्रदेश की सात लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों पर विचार विमर्श हुआ लेकिन सहमति तीन सीटों पर ही बन सकी। फिरोजपुर और श्री आनंदपुर साहिब सीट को लेकर कैप्टन और जाखड़ के बीच सहमति नहीं बन सकी और अंतत: इन सीटों का फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर ही छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार पंजाब के कैबिनेट मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी फिरोजपुर सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं और उन्होंने इस सीट से टिकट के लिए आवेदन भी किया है। राणा सोढी कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं जबकि सुनील जाखड़ और राणा सोढी के बीच मतभेद लंबे समय से रहे हैं।
पता चला है कि कैप्टन फिरोजपुर सीट से राणा सोढी के नाम की सिफारिश कर रहे हैं जबकि जाखड़ इसके पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि जाखड़ ही अकाली दल से तोड़कर मौजूदा सांसद शेर सिंह घुबाया को कांग्रेस में लेकर आए हैं और उन्हें फिरोजपुर से टिकट दिलाने का उन्होंने वादा भी किया है। दूसरी ओर, श्री आनंदपुर साहिब सीट से कैप्टन इस बार मनीष तिवारी के नाम की सिफारिश कर रहे हैं, जिस पर फिलहाल सहमति नहीं बन सकी है।
इसी तरह, बठिंडा और संगरूर सीटों को लेकर भी कोई फैसला नहीं लिया जा सका। बैठक में मौजूद नेता किसी एक नाम पर एकमत नहीं बना सके। इन सीटों के लिए अब तक जो दावेदार पार्टी की सूची में हैं, उनका आकलन करते हुए पार्टी यह मान रही है कि इन सीटों पर मजबूत प्रत्याशी की जरूरत है।
जालंधर, होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब में बगावती सुर
कांग्रेस की ओर से शनिवार को घोषित किए गए तीन प्रत्याशियों से पहले छह सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का एलान किया जा चुका है। लेकिन पूर्व घोषित सीटों पर भी पार्टी को वर्करों व अन्य सीनियर नेताओं के बगावती तेवरों का सामना करना पड़ रहा है।
जालंधर सीट पर मौजूदा सांसद संतोख सिंह चौधरी को टिकट दिए जाने से नाराज सीनियर नेता मोहिंदर सिंह केपी ने पार्टी के इस फैसले को बहुत गंभीरता से लेते हुए यहां तक कह दिया है कि पार्टी का यह फैसला एक तरह से उनकी राजनीतिक हत्या करने के समान है।
केपी पार्टी के फैसले से इतने नाराज हैं कि वे जालंधर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बनाने लगे हैं। माना जा रहा है कि अगर केपी निर्दलीय तौर पर चुनाव में उतरे तो जालंधर में कांग्रेस प्रत्याशी को नुकसान पहुंच सकता है। केपी जालंधर से सांसद रह चुके हैं। उनके समर्थकों ने तो सोशल मीडिया पर यह प्रचार भी शुरू कर दिया है कि केपी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे।
उधर, होशियारपुर से डा. राजकुमार चब्बेवाल को टिकट दिए जाने से नाराज पूर्व सांसद संतोष चौधरी ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। इस बीच, फतेहगढ़ साहिब और फरीदकोट सीटों पर शनिवार को घोषित किए गए प्रत्याशियों का विरोध भी शुरू हो गया है।
इन दोनों सीटों को लेकर वाल्मीकि समुदाय ने कांग्रेस को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि अगर इन सीटों पर वाल्मीकि समाज को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया तो पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। फतेहगढ़ साहिब सीट से वाल्मीकि समुदाय यूथ कांग्रेस के नेता अश्वनी बगानिया के लिए टिकट मांग रहे थे।