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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok Sabha Election 2019, Ajay Chautala vs Abhay Chautala, What is the Future of INLD after Revolt

इनेलो में रारः अजय चौटाला को तो निकाल दिया, पर लोकसभा चुनाव में हो सकती हैं दिक्कतें

Thu, 15 Nov 2018 10:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 15 Nov 2018 10:52 AM IST
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Lok Sabha Election 2019, Ajay Chautala vs Abhay Chautala, What is the Future of INLD after Revolt
इनेलो नेता अभय चौटाला
दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के बाद अजय चौटाला को भी इनेलो से निकाल दिया गया है, पर अब आगे क्या होगा लोकसभा चुनाव 2019 सिर पर हैं। बता दें कि अजय चौटाला को पार्टी से निकालने की घोषणा के बाद अभय चौटाला गुट ने एलान किया गया कि प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 17 को चंडीगढ़ में जाट भवन में होगी। दूसरी ओर, अजय चौटाला गुट का कहना है कि 17 को जींद में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक जरूर होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस खेमे में कितने विधायक जुटते हैं और कितने पदाधिकारी व पूर्व पदाधिकारी शामिल होते हैं। दोनों गुटों के इसी शक्ति प्रदर्शन से असली इनेलो भी तय होगा।
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पार्टी की चुनौतियां और ज्यादा बढ़ जाएंगी
इनेलो में यदि विरासत का विवाद जल्द नहीं थमा तो आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी की चुनौतियां और अधिक बढ़ जाएंगी। हालांकि, अभी इस विवाद के थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो चुनावों में इनेलो की डगर आसान नहीं होगी। पार्टी अब दोफाड़ हो गई है, क्योंकि दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के बाद अब अजय चौटाला को भी पार्टी से निकाल दिया गया है।
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इस तरह बढ़ेगी चुनावी चुनौतियां
भर्ती घोटाले में सजा भुगत रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला के जेल जाने के बाद पार्टी बिखरी गई थी। लेकिन छोटे बेटे अभय चौटाला ने वर्करों को बांधे रखा और वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में 19 सीटें भी जीती। अब 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव फिर करीब हैं, लेकिन इनेलो में विरासत की जंग चल रही है। पार्टी टूट चुकी है, तो अब इनेलो की ताकत भी बंट जाएगी और मौजूदा विधायक भी बंट जाएंगे। उधर, विरोधी दल भी इस बिखराव का फायदा उठाने की पूरी फिराक में है। ऐसे में पिछले 14 साल से सत्ता से बाहर इनेलो के लिए ऐसे माहौल में चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।
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अजय के निष्कासन पत्र पर ओमप्रकाश चौटाला के साइन

Lok Sabha Election 2019, Ajay Chautala vs Abhay Chautala, What is the Future of INLD after Revolt
इनेलो नेता अभय चौटाला
बता दें कि चौटाला परिवार में चौधरी देवीलाल की विरासत की जंग में आखिरकार इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का चश्मा आखिरकार टूट ही गया। पार्टी में लंबे समय से चली आ रही खींचतान दोफाड़ बदल गई। दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला को पार्टी से निकालने बाद प्रधान महासचिव अजय चौटाला को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया। चंडीगढ़ में नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला की प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया गया कि अजय का निष्कासन पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के हस्ताक्षर से किया गया है।

अरोड़ा ने पढ़कर सुनाया अजय का निष्कासन
अभय सिंह चौटाला व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि 12 नवंबर को ओमप्रकाश चौटाला ने एक पत्र दिया था, जिसे जारी करने से पहले पार्टी के तमाम नेताओं ने यह प्रयास किया कि अजय सिंह चौटाला जींद की बैठक को रद्द करें और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ विरोधी राजनीतिक दलों का मुकाबला करे।

अरोड़ा ने ओपी चौटाला के पत्र को सार्वजनिक करते हुए कहा कि बार-बार प्रयासों के बावजूद अजय द्वारा न केवल 17 नवंबर को जींद में बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं व नेताओं को भ्रमित किया जा रहा है, बल्कि अजय द्वारा पिछले कई दिनों से की जा कार्रवाई से साफ हो गया है कि वह इनेलो के समानांतर संगठन चलाना चाहते हैं। इनेलो हाईकमान जींद में बुलाई गई बैठक को असंवैधानिक करार देता है और अजय सिंह चौटाला को पार्टी के प्रधान महासचिव पद से हटाने के साथ पार्टी से भी निष्कासित करता है।

केसी बांगड़ ने दिया इस्तीफा
उधर, यमुनानगर में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी बांगड़ ने खुले मंच से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अजय सिंह चौटाला को निष्कासित करना तानाशाही फैसला है। इससे इनेलो वेंटिलेटर पर चली गई है। अगर में अभय चौटाला की भाषा बोलता हूं तो सही और दुष्यंत के समर्थन में बोलता हूं तो दूध बेचने का काम करने वाले मुझे बिकाऊ कहते हैं।

मुझे किस अधिकार से निष्कासित किया गया: अजय

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अभय चौटाला
अजय चौटाला ने कहा कि यह फैसला असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक तरीके से लिया गया है। ओपी चौटाला के जिस पत्र के हवाले से कार्रवाई की गई है वह पत्र चंडीगढ़ में बैठकर तैयार किया गया है। अजय ने कहा कि पार्टी से निकालने वाले पहले पार्टी का संविधान तो पढ़ लेते। बैकडोर से वर्चस्व बनाने का काम किया जा रहा है। मुझे किस अधिकार से निष्कासित किया गया है।

दुष्यंत और दिग्विजय पर तो गोहाना रैली में नारे लगवाने का आरोप लगाया था, लेकिन मेरे ऊपर तो कोई इल्जाम भी नहीं है। इनेलो किसी के बाप की बपौती नहीं। 17 को देवीलाल की कर्मभूमि जींद में रैली कर बड़ा फैसला लिया जाएगा। उसी दिन प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भी होगी। बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब कार्यकर्ता ही फरमान जारी करने वालों को बताएंगे कि तुम हो या हम हैं।

उन्होंने कहा कि फैसला लेने वाले पहले संविधान तो पढ़ लें। 12 नवंबर को यदि चौटाला साहब की तरफ से लेटर मिल गया था तो जारी क्यों नहीं किया? साजिश कर रहे थे क्या? उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीका अपनाया जाना चाहिए था। मुझे कोई नोटिस तो दिया जाना चाहिए था।

पूरी तरह से फर्जी है अजय चौटाला का निष्कासन पत्र : दिग्विजय

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इनेलो नेता अभय चौटाला
इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा द्वारा अजय सिंह चौटाला के निष्कासन का पत्र जारी किए जाने पर दिग्विजय चौटाला ने कहा कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है, जिसे चंडीगढ़ में बैठकर तैयार किया गया है। दिग्विजय ने कहा कि यह पत्र मंगलवार की रात तैयार किया गया है। ओमप्रकाश चौटाला को न तो पहले विश्वास में लिया गया था न ही इस मामले में उन्हें भरोसे में लिया गया है।

दिग्विजय ने कहा कि चौटाला के जेल जाने से पहले वह और दुष्यंत उनसे मिले थे तब सभी बातें सामान्य हो गई थीं, लेकिन उनके जेल जाते ही दुष्यंत व उसे निष्कासित कर दिया गया। जिसका पत्र जारी करने की बजाए केवल प्रेस नोट जारी किया गया है। युवा नेता ने कहा कि अजय चौटाला को किस आधार पर निष्कासित किया गया है यह कोई स्पष्ट नहीं कर रहा है।

अजय के निष्कासन में भी पार्टी को खत्म करते हुए भाजपा के हाथों में खेलने वाले चंद लोग शामिल हैं। दिग्विजय ने अभय व अशोक अरोड़ा की ओमप्रकाश चौटाला के साथ मुलाकात पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जेल रिकार्ड के अनुसार किसी भी नेता की ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात नहीं हुई है।
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