धरातल पर आई कांग्रेस की गुटबाजी, हुड्डा परिवार की राह मुश्किल करने में जुटे
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हरियाणा के चुनावी रण में भाजपा को चित करने का सपना देख रही कांग्रेस अपनी गुटबाजी के चलते खुद ही धराशायी हो सकती है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराना बाद की बात है, कांग्रेस में एक-दूसरे को ठिकाने लगाने की सियासत शुरू हो गई है। जिससे कांग्रेस को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस का एक खेमा पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा का चुनाव में सीधा विरोध करने पर उतर आया है। रोहतक में पंजाबी नेता व पूर्व गृह मंत्री सुभाष बतरा ने दीपेंद्र की राह में कांटे बिछाने का काम शुरू कर दिया है। बतरा सीधे बगावत पर उतर आए हैं। बीते दिनों उन्होंने रोहतक में पंजाबी समुदाय की बैठक में अप्रत्यक्ष रूप से हुड्डा पर हमला बोला।
भाजपा नेताओं के सुर में सुर मिलाते हुए वह यहां तक कह गए कि रोहतक को जलाने वालों का साथ न दें। इस बैठक में उन्होंने न भूपेंद्र और न ही दीपेंद्र को आमंत्रित किया था। बतरा को वैसे भी हुड्डा विरोधी खेमे का माना जाता है। बीते कुछ समय से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के साथ उन्होंने अपनी नजदीकियां बढ़ाई हैं। अनेक कार्यक्रम में वह तंवर के साथ मंच भी साझा कर चुके हैं। बतरा जहां रोहतक में खिलाफत कर रहे हैं, वहीं सोनीपत में भी कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। तंवर खेमे के ही उमेश शर्मा कांग्रेस छोड़कर रविवार को भाजपाई हो गए। सोनीपत से टिकट न मिलने पर वह नाराज चल रहे थे।
भाजपा में गए उमेश अब सोनीपत में हुड्डा की मुश्किलें बढ़ाने का काम करेंगे। अंबाला में वाल्मीकि समुदाय के नेता कांग्रेस की दिक्कत बढ़ा सकते हैं। चूंकि, इस बार हरियाणा में वाल्मीकि समुदाय को टिकट न मिलने से यह वर्ग कांग्रेस से नाराज चल रहा है। बीते चुनाव में कांग्रेस ने अंबाला सीट से वाल्मीकि समुदाय के ही राजकुमार वाल्मीकि को उतारा था। फरीदाबाद में विधायक ललित नागर का लोकसभा टिकट कटने से उनके समर्थक नाराज हैं। नागर हालांकि रुंधे हुए गले से अवतार सिंह भड़ाना को समर्थन दे चुके हैं, लेकिन निगाहें उनके समर्थकों पर रहेंगी कि वे क्या करते हैं।
बस यात्रा से भी दिल नहीं मिला पाए आजाद
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने लोकसभा चुनाव के प्रचार का आगाज हरियाणा में बस यात्रा से किया था। इसमें उन्होंने सभी कांग्रेस दिग्गजों को एक बस में हरियाणा की यात्रा कराई। कुछ दिग्गज कांग्रेसी तो यात्रा से भी नदारद रहे थे। यात्रा के जरिये आजाद ने खेमों में बंटे कांग्रेसियों के हाथ तो मिला दिए, लेकिन दिलों का मेल नहीं करा पाए।
चुनाव बाद आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगने के आसार
लोकसभा चुनाव के नतीजे हरियाणा में मनमाफिक न रहने पर कांग्रेसी आपस में भिड़ सकते हैं। यह माना जा रहा है कि चुनाव में भितरघात का शिकार होने वाले नेताओं की ओर से नतीजों के बाद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होना तय है। हर लोकसभा सीट पर प्रत्याशी और उनके खासमखास भीतरघात करने वाले नेताओं पर पैनी नजरें गड़ाए हुए हैं।