अटकलों पर लगा विराम, हरियाणा में लोकसभा के साथ नहीं होंगे विधानसभा चुनाव
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हरियाणा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी कराने की अटकलों पर विराम लग गया है। आम चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले शुक्रवार को मनोहर लाल कैबिनेट की अंतिम बैठक हुई। इस बैठक से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि मंत्रिमंडल विधानसभा को भंग करने का निर्णय लेगा।
शुक्रवार को बैठक हुई, अनेक अहम निर्णय जनहित में लिए गए, लेकिन जिस निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं, वह नहीं हुआ। सरकार पहले ही कहती आ रही थी कि विधानसभा चुनाव तय समय पर होंगे।
भाजपा सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद ही चुनाव कराएगी। प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल जैन के बाद सीएम मनोहर लाल ने भी बजट सत्र में साफ कर दिया था कि लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव नहीं होने जा रहे। अब विधानसभा के मानसून सत्र में फिर मिलेंगे। अगस्त में मानसून का सत्र होगा। बावजूद इसके विधानसभा भंग होने की अफवाहों का बाजार गर्म रहा।
सीआईडी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दोनों चुनाव एक साथ होने पर भाजपा को फायदा होने के तर्क तक दिए गए। मगर, सरकार के साथ ही भाजपा हाईकमान अपने निर्णय पर अटल रहा। हरियाणा सरकार के साथ ही भाजपा का पूरा फोकस लोकसभा चुनावों पर है। भाजपा हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व को साफ कर दिया है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा लाने पर पार्टी नेता ध्यान केंद्रित करें।
विधानसभा चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। इसलिए अपने-अपने क्षेत्रों में डट जाएं। राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि अफवाहों का गुब्बारा फूट गया है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव अक्टूबर में ही होंगे। लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य फिलहाल केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार दोबारा बनाना है। माहौल भाजपा के पक्ष में है, पार्टी सभी दस की दस लोकसभा सीटें जीतेगी।