{"_id":"5e980b7b8ebc3e7697289fac","slug":"lockdown-curfew-coronavirus-suspected-patients-test-via-pooled-method-in-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में 'पूल्ड विधि' से हो रही संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच, जानिए क्या है और कैसे करती काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में 'पूल्ड विधि' से हो रही संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच, जानिए क्या है और कैसे करती काम
Thu, 16 Apr 2020 01:08 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 16 Apr 2020 01:08 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब की वायरल रिसर्च डायगनोस्टिक लैब (वीआरडीएल) में कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए पूल्ड विधि शुरू की गई है, जिसके नतीजे उत्साहजनक हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री ओम प्रकाश सोनी ने बताया कि राज्य की वीआरडीएल लैबों द्वारा पूल्ड टेस्टिंग तरीके से जो मूल्यांकन किया गया, उनमें से कोई भी नतीजा गलत नहीं मिला।
सोनी ने कहा कि जर्मनी और इजरायल के शोधकर्ताओं ने इस विधि की पहले ही पुष्टि कर दी है और आईसीएमआर ने पूल्ड टेस्टिंग संबंधी 13 अप्रैल को सलाह जारी की थी। इसमें बताया गया था कि इस विधि का प्रयोग कैसे करना है, जिसकी पंजाब की वीआरडी लैब्स द्वारा पालना की जा रही है और तुरंत इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल लागत में बल्कि टेस्ट किटों की भी बचत हो रही है, जिसकी पूरे विश्व में सीमित आपूर्ति है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने प्रयोगशालाओं में दिन-रात मेहनत करने वाले डॉक्टरों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि इस तकनीक का सफल तजुर्बा करके उन्होंने राज्य के निवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा काम किया है, इसके साथ ही कीमती संसाधनों की भी बचत करने के लिए काम किया है।
विज्ञापन
क्या है पूल्ड टेस्टिंग विधि
इस विधि के बारे में सोनी ने बताया कि इस विधि के अनुसार टेस्टिंग ऐल्गोरिदम में एक से अधिक मरीजों के नमूनों के पूल किए गए नमूनों को शामिल करके जांच की जाती है और यदि इस पूल्ड टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आए, तो इसके बाद पूल में शामिल व्यक्तियों के व्यक्तिगत टेस्ट किए जाते हैं।
रिपोर्ट नेगेटिव होने की स्थिति में टेस्ट में शामिल संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट को निगेटिव घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूल्ड टेस्टिंग नमूनों में वायरस की जांच बहुत सटीकता से हो रही है, जिसके परिणाम स्वरूप मौजूदा स्रोतों के साथ ही टेस्टिंग क्षमता में 3 से 4 गुना विस्तार होगा।
विज्ञापन
सोनी ने कहा कि जर्मनी और इजरायल के शोधकर्ताओं ने इस विधि की पहले ही पुष्टि कर दी है और आईसीएमआर ने पूल्ड टेस्टिंग संबंधी 13 अप्रैल को सलाह जारी की थी। इसमें बताया गया था कि इस विधि का प्रयोग कैसे करना है, जिसकी पंजाब की वीआरडी लैब्स द्वारा पालना की जा रही है और तुरंत इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया गया था।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि इससे न केवल लागत में बल्कि टेस्ट किटों की भी बचत हो रही है, जिसकी पूरे विश्व में सीमित आपूर्ति है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने प्रयोगशालाओं में दिन-रात मेहनत करने वाले डॉक्टरों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि इस तकनीक का सफल तजुर्बा करके उन्होंने राज्य के निवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा काम किया है, इसके साथ ही कीमती संसाधनों की भी बचत करने के लिए काम किया है।
विज्ञापन
क्या है पूल्ड टेस्टिंग विधि
इस विधि के बारे में सोनी ने बताया कि इस विधि के अनुसार टेस्टिंग ऐल्गोरिदम में एक से अधिक मरीजों के नमूनों के पूल किए गए नमूनों को शामिल करके जांच की जाती है और यदि इस पूल्ड टेस्ट का नतीजा पॉजिटिव आए, तो इसके बाद पूल में शामिल व्यक्तियों के व्यक्तिगत टेस्ट किए जाते हैं।
रिपोर्ट नेगेटिव होने की स्थिति में टेस्ट में शामिल संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट को निगेटिव घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूल्ड टेस्टिंग नमूनों में वायरस की जांच बहुत सटीकता से हो रही है, जिसके परिणाम स्वरूप मौजूदा स्रोतों के साथ ही टेस्टिंग क्षमता में 3 से 4 गुना विस्तार होगा।