{"_id":"5ed096a1ec834416d7609e3d","slug":"liquor-scam-punjab-haryana-high-court-statement-on-bail-petition","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट की टिप्पणी- इंटरस्टेट शराब तस्करी का इतना बड़ा मामला है, कैसे दे दें अग्रिम जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट की टिप्पणी- इंटरस्टेट शराब तस्करी का इतना बड़ा मामला है, कैसे दे दें अग्रिम जमानत
Fri, 29 May 2020 10:29 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 29 May 2020 10:29 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मार्च माह में खरखौदा में पकड़े गए दो ट्रक शराब की तस्करी के मामले में आरोपी शक्ति कॉन्ट्रैक्टर को बड़ा झटका देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर शराब की तस्करी से जुड़े मामले में आरोपी को किसी भी सूरत में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
याचिका दाखिल करते हुए पंजाब के राजपुरा निवासी शक्ति कांट्रैक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत देने की अपील की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर 6 मार्च को सोनीपत के खरखौदा में पुलिस ने दो ट्रक तस्करी से लाई गई शराब पकड़ी थी।
ट्रकों के भीतर 285 पेटी शराब मौजूद थी। इसके बाद पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि यह ट्रक शक्ति कांट्रैक्टर के हैं, जिन्हें राजपुरा से लाया गया है। आरोपियों के बयान के आधार पर शक्ति कांट्रैक्टर का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता का दावा- ट्रक उसका नहीं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ना तो वह ट्रक उसके नाम पर रजिस्टर है और न ही उसका इस मामले से कोई लेना-देना है। इसके विरोध में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपियों के बयान के आधार पर ही एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त भी याचिकाकर्ता पर चार अन्य केस हैं, जिनमे से केवल एक में वह बरी हुआ है। बाकी तीन लंबित हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में इतने बड़े स्तर पर तस्करी हुई है कि आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वह आत्मसमर्पण करें और निचली अदालत में नियमित जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल कर दे।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए पंजाब के राजपुरा निवासी शक्ति कांट्रैक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत देने की अपील की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर 6 मार्च को सोनीपत के खरखौदा में पुलिस ने दो ट्रक तस्करी से लाई गई शराब पकड़ी थी।
विज्ञापन
ट्रकों के भीतर 285 पेटी शराब मौजूद थी। इसके बाद पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि यह ट्रक शक्ति कांट्रैक्टर के हैं, जिन्हें राजपुरा से लाया गया है। आरोपियों के बयान के आधार पर शक्ति कांट्रैक्टर का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता का दावा- ट्रक उसका नहीं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ना तो वह ट्रक उसके नाम पर रजिस्टर है और न ही उसका इस मामले से कोई लेना-देना है। इसके विरोध में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपियों के बयान के आधार पर ही एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त भी याचिकाकर्ता पर चार अन्य केस हैं, जिनमे से केवल एक में वह बरी हुआ है। बाकी तीन लंबित हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में इतने बड़े स्तर पर तस्करी हुई है कि आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वह आत्मसमर्पण करें और निचली अदालत में नियमित जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल कर दे।