{"_id":"5703e3aa4f1c1b7632c810c9","slug":"liquor-business-punjab-government-economical-l-1a-monopoly","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब सरकार ने एल-1-ए को बताया किफायती, शराब कारोबार पर पांच कंपनियों के एकाधिकार का है आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब सरकार ने एल-1-ए को बताया किफायती, शराब कारोबार पर पांच कंपनियों के एकाधिकार का है आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Apr 2016 09:50 PM IST
विज्ञापन
शराब
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब की एक्साइज पॉलिसी में एल-1-ए व्यवस्था को सही ठहराते हुए पंजाब सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया है कि इससे गड़बड़ी कम होगी और सरकार को राजस्व अधिक मिलेगा।
पहले शराब कारोबारी कंपनियां 15 एल-1 को स्टाक जारी करती थीं, लेकिन अब शराब निर्माता कंपनियां पांच एल-1-ए लाइसेंस देगी।
उधर, याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह सिद्धू के वकील ने बेंच के समक्ष पैरवी की कि सरकार खुद मान रही है कि शराब कारोबार पर चंद कंपनियों का एकाधिकार हो रहा है। फिलहाल बेंच ने सुनवाई स्थगित कर दी है।
सरकार ने कहा है कि पिछले साल राज्य में चार कंपनियों के पास शराब का 90 प्रतिशत कारोबार था। इस तरह कई स्तर पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी, लेकिन अब एल-1-ए लाइसेंस कारोबारी पांच कंपनियों को दिए जाएंगे।
विज्ञापन
इससे पहले की तुलना में अधिक राजस्व भी हासिल होगा और हरेक स्तर पर पूरी नजर रखी जा सकेगी।
उधर, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा है कि जिन कंपनियों का शराब के 90 प्रतिशत कारोबार पर कब्जा था, उन्हें ही एल-1-ए लायसेंस जारी किए जा रहे हैं, लिहाजा कारोबार पर एकाधिकार स्थापित किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के छोटे भाई शराब कारोबारी अमरजीत सिंह सिद्धू हैं।
अमरजीत सिंह सिद्धू ने याचिका में राज्य में शराब के कारोबार पर पांच बड़ी कंपनियों की मोनोपली बनने की आशंका जताते हुए यह लाइसेंस ड्रा ऑफ लाट के माध्यम से या फिर हाईकोर्ट की ओर से जारी किए जाने की मांग की थी।
कहा था कि सरकार शराब का पहले से बड़ा कारोबार कर रहे डोडा ग्रुप, चड्ढा ग्रुप, मल्होत्रा ग्रुप और एडी ग्रुप जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है।
वैसे एक्साइज विभाग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह लाइसेंस का कोई प्रावधान हटा सके या कोई नया लायसेंस बना सके।
इस दलील के साथ मांग की थी कि एल-1-ए के प्रावधान को क्रियान्वित करने पर रोक लगाई जानी चाहिए। यह प्रावधान खत्म किया जाना चाहिए और यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस लाइसेंस का ड्रा निकाला जाए या फिर यह लाइसेंस हाईकोर्ट खुद जारी करे।
सरकार ने इस लाइसेंस का नया प्रावधान बनाया है। इसके तहत शराब के लिए तीन और बीयर के लिए दो लाइसेंस दिए जाने हैं। लाइसेंस धारक कंपनियां या तो सरकार से सीधे शराब खरीद सकेंगी और या फिर राज्य के बाहर शराब उत्पादक कंपनियों सेे शराब खरीद सकेंगी।
इसके बाद यह लाइसेंस धारक शराब ठेकेदारों को शराब बेंचेंगे। इससे शराब के एल-1 कारोबारियों का शराब कंपनियों से सीधा संपर्क नहीं रहेगा और एल-वन-ए लाइसेंस धारकों को बड़ा मुनाफा होगा। इसे ही पांच कंपनियों की शराब कारोबार पर मनोपली होने की आशंका बताते हुए यह नई प्रणाली खत्म करने की मांग की गई है।
विज्ञापन
पहले शराब कारोबारी कंपनियां 15 एल-1 को स्टाक जारी करती थीं, लेकिन अब शराब निर्माता कंपनियां पांच एल-1-ए लाइसेंस देगी।
उधर, याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह सिद्धू के वकील ने बेंच के समक्ष पैरवी की कि सरकार खुद मान रही है कि शराब कारोबार पर चंद कंपनियों का एकाधिकार हो रहा है। फिलहाल बेंच ने सुनवाई स्थगित कर दी है।
विज्ञापन
सरकार ने कहा है कि पिछले साल राज्य में चार कंपनियों के पास शराब का 90 प्रतिशत कारोबार था। इस तरह कई स्तर पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती थी, लेकिन अब एल-1-ए लाइसेंस कारोबारी पांच कंपनियों को दिए जाएंगे।
विज्ञापन
इससे पहले की तुलना में अधिक राजस्व भी हासिल होगा और हरेक स्तर पर पूरी नजर रखी जा सकेगी।
उधर, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा है कि जिन कंपनियों का शराब के 90 प्रतिशत कारोबार पर कब्जा था, उन्हें ही एल-1-ए लायसेंस जारी किए जा रहे हैं, लिहाजा कारोबार पर एकाधिकार स्थापित किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता विधायक बलबीर सिंह सिद्धू के छोटे भाई शराब कारोबारी अमरजीत सिंह सिद्धू हैं।
अमरजीत सिंह सिद्धू ने याचिका में राज्य में शराब के कारोबार पर पांच बड़ी कंपनियों की मोनोपली बनने की आशंका जताते हुए यह लाइसेंस ड्रा ऑफ लाट के माध्यम से या फिर हाईकोर्ट की ओर से जारी किए जाने की मांग की थी।
कहा था कि सरकार शराब का पहले से बड़ा कारोबार कर रहे डोडा ग्रुप, चड्ढा ग्रुप, मल्होत्रा ग्रुप और एडी ग्रुप जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है।
वैसे एक्साइज विभाग के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह लाइसेंस का कोई प्रावधान हटा सके या कोई नया लायसेंस बना सके।
इस दलील के साथ मांग की थी कि एल-1-ए के प्रावधान को क्रियान्वित करने पर रोक लगाई जानी चाहिए। यह प्रावधान खत्म किया जाना चाहिए और यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस लाइसेंस का ड्रा निकाला जाए या फिर यह लाइसेंस हाईकोर्ट खुद जारी करे।
सरकार ने इस लाइसेंस का नया प्रावधान बनाया है। इसके तहत शराब के लिए तीन और बीयर के लिए दो लाइसेंस दिए जाने हैं। लाइसेंस धारक कंपनियां या तो सरकार से सीधे शराब खरीद सकेंगी और या फिर राज्य के बाहर शराब उत्पादक कंपनियों सेे शराब खरीद सकेंगी।
इसके बाद यह लाइसेंस धारक शराब ठेकेदारों को शराब बेंचेंगे। इससे शराब के एल-1 कारोबारियों का शराब कंपनियों से सीधा संपर्क नहीं रहेगा और एल-वन-ए लाइसेंस धारकों को बड़ा मुनाफा होगा। इसे ही पांच कंपनियों की शराब कारोबार पर मनोपली होने की आशंका बताते हुए यह नई प्रणाली खत्म करने की मांग की गई है।