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एक ही परिवार के 7 लोगों ने किया था वो कांड, अब जेल में कटेगी पूरी जिंदगी

Thu, 23 Feb 2017 09:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा) Updated Thu, 23 Feb 2017 09:28 AM IST
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life prison to seven people of a family in double murder case of two brothers at jhajjar of haryana
जेल में रहेगा सात लोगों का परिवार, उम्रकैद की सजा
एक ही परिवार के सात लोगों ने वो खौफनाक कांड अंजाम दिया था कि अब उनकी सारी जिंदगी जेल में कटेगी। एक मामले में सभी को उम्रकैद की सुजा सुनाई गई है। घटना हरियाणा के झज्जर की है। सजा पाने वालों में चार पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं।
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मामले में अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश लाल चंद की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया है। मामला चार साल पहले का है, दो सगे भाइयों का कत्ल किया गया था। डाबौदा खुर्द के सोनू उर्फ सुरेश ने बहादुरगढ़ पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके भाईयों की किसी बात को लेकर पड़ोसी जयवीर उर्फ शास्त्री और जसपाल उर्फ टंकमा के साथ कुछ कहासुनी हुई थी।
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21 सितंबर 2013 की रात करीब 9 बजे ये उनके घर पहुंचे और उसके भाई अनिल और सुनील सहित परिवार के लोगों से झगड़ा करने लगे। झगड़े के समय जब उसके भाई गली में गए तो जितेंद्र डोगा गन, जसपाल उर्फ टंमका व जयवीर शास्त्री हाथों में पिस्टल लेकर आए और उन्होंने गली में फायर करने शुरू कर दिए।
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एक भाई दिल्ली पुलिस में था, दूसरा भाई फौज में

life prison to seven people of a family in double murder case of two brothers at jhajjar of haryana
जेल में रहेगा सात लोगों का परिवार, उम्रकैद की सजा
जसपाल की मां, जयपाल की पत्नी किरण, जयवीर की मां सरोज, जयवीर के पिता रणसिंह भी उनके सा​थ थे। इनके हाथों में जेली और लाठी थी। इस बीच जितेंद्र ने अपने डोगे से अनिल के पेट में गोली मारी, जबकि जसपाल व जयवीर ने पिस्टल के साथ सुनील के पेट में फायर किया। अनिल और सुनील के गिरने के पर आरोपी भाग गए।

दोनों जख्मी भाइयों को पहले तो बहादुरगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली के निजी अस्पताल ले जाया गया। इस बीच अनिल की दो दिन के बाद 23 सितंबर को मौत हो गई। सुनील ने 24 को दम तोड़ दिया। अनिल दिल्ली पुलिस में तैनात था, जबकि सुनील फौज में नौकरी कर रहा था।

मंगलवार को अतिरिक्त सेशन जज लाल चंद की अदालत में आईपीसी की धारा 302,148,149, 307 सहित अन्य धाराओं के तहत सभी सात आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। पीड़ित पक्ष की ओर से सरकारी वकील के साथ साथ एडवोकेट नारायण सिंह चाहर भी थे। अदालत की ओर से सुनाए गए इस फैसले में करीब चार साल का वक्त लगा।
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