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कानपुर हादसा: लेफ्टिनेंट संदीप को अंतिम विदाई, फरवरी में शादी थी

Thu, 24 Nov 2016 09:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर(हरियाणा) Updated Thu, 24 Nov 2016 09:30 AM IST
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lieutenant sandeep chahar killed in kanpur train accident, funeral in jhajjar village silani
झज्जर के गांव में संदीप चाहर का अंतिम संस्कार
कानपुर रेल हादसे का शिकार हुए लेफ्टिनेंट संदीप चाहर उनके पैतृक गांव सिलानी में सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना के युवा लेफ्टिनेंट संदीप को गांव सिलानी में नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। कानपुर में हुए ट्रेन हादसे में संदीप की जान चली गई थी।
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पूरे देश को झकझोर देने वाले कानपुर के भीषण ट्रेन हादसे में झज्जर के रहने वाले भारतीय सेना के युवा लेफ्टिनेंट संदीप की भी जान चली गई। मंगलवार को उनके पैतृक गांव सिलानी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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संदीप करीब दो साल पहले भारतीय सेना में चयनित हुए थे और 12 मद्रास रेजीमेंट में तैनात थे। वे मध्यप्रदेश के मऊ में कमांडो की अपनी ट्रेनिंग पूरी कर लखनऊ में मेडिकल के लिए जा रहे थे कि रास्ते में इस हादसे का शिकार हो गए।
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अगले साल 18 फरवरी को संदीप की शादी होनी थी। इसके लिए पूरा परिवार तैयारियों में जुटा था। इंतजार था तो बस संदीप की ट्रेनिंग पूरी होने का, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। लेफ्टिनेंट संदीप घर लौटा, लेकिन तिरंगे में लिपटा हुआ। इसका पता चलते ही पूरे गांव में गम का माहौल बना हुआ है।

साफ मन के थे संदीप : कैप्टन धामा

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झज्जर के गांव में संदीप चाहर का अंतिम संस्कार
संदीप को अंतिम विदाई पूरे सैनिक सम्मान के साथ दी गई। अंतिम सलामी के साथ कैप्टन राहुल धामा ने उन्हें सम्मान के साथ विदा किया। कैप्टन राहुल धामा ने बताया कि संदीप साफ मन के अफसर थे।

उन्होंने बताया कि कोर्स पूरा होने के बाद वे अपने घर एक दिन के अवकाश पर आ रहे थे तो रास्ते में हुए कानपुर रेल हादसे का शिकार हो गए। लेफ्टिनेंट संदीप खेल में भी रुचि रखते हैं।

उन्होंने बताया कि संदीप बास्केटबाल खेलते थे, इसके अलावा वे कभी-कभी बॉक्सिंग भी खेलते थे। उन्होंने कहा कि मैं भगवान से दुआ करता हूं कि उनके परिवार को इस दुख को सहने का हौसला दे।

तीन पीढ़ियां हैं फौज में
संदीप के दादा कैप्टन जगदीश सिंह ने बताया कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से वे सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते आए हैं। संदीप के पिता भी सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं।

उन्होंने बताया कि संदीप के बाद अब उसका भाई प्रदीप भी सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी में जुटा हुआ है। उन्होंने मांग की है कि संदीप को सरकार तरफ से शहीद का दर्जा दिया जाए और साथ ही उसके छोटे भाई को उसी पद पर देश सेवा के लिए अवसर दिया जाए।
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