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पीयू : 37 सीनेटरों ने उप राष्ट्रपति को भेजा पत्र, कहा- चुनाव होने तक सीनेट का कार्यकाल बढ़ाएं

Fri, 30 Oct 2020 02:06 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 30 Oct 2020 02:06 AM IST
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37 senators of Panjab university sent a letter to the Vice President
पंजाब विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब विश्वविद्यालय के 37 सीनेटरों ने चांसलर एवं उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि सीनेट के चुनाव नहीं होने तक कार्यकाल बढ़ाया जाए ताकि पीयू के कार्य प्रभावित न हों। उन्होंने कहा है कि पीयू कैलेंडर के मुताबिक पीयू वीसी आपात स्थिति में ही उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं, हमेशा प्रयोग नहीं की जा सकती, क्योंकि सीनेट ही पीयू के सभी मामलों में निर्णय लेती है।

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यह विषय पीयू के भविष्य के लिए बड़ा है, इसलिए जल्द से जल्द सीनेट का कार्यकाल बढ़ाया जाए। वहीं दूसरी ओर जानकार कहते हैं कि सीनेट का कार्यकाल चांसलर चाहें तो बढ़ा सकते हैं लेकिन यदि पत्र वीसी के जरिए वहां भेजा जाता। यही नहीं पत्र में यह भी जिक्र किया जा सकता था कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू होने में अभी समय है।
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बोर्ड ऑफ गवर्नेंस अभी बन नहीं पाएगा। ऐसे में कार्यकाल सीनेट का बढ़ाया जाए। जानकार कहते हैं कि इस तरह तो बात बन सकती थी। हालांकि चांसलर इस पत्र के बाद क्या निर्णय लेते हैं। इसका सभी को इंतजार है।

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31 को पूरा हो जाएगा सीनेट का कार्यकाल

चांसलर को भेजे पत्र में कहा है कि पीयू सीनेट का कार्यकाल 31 अक्तूबर को पूरा हो रहा है। सीनेट का पीयू के संचालन में बड़ा महत्व है। हर मामलों में सीनेट निर्णय लेती है। साथ ही समस्याओं का निदान करती है। सीनेट का चुनाव इस तिथि से पहले होना चाहिए था लेकिन नहीं हो सका। ऐसे में चुनाव होने तक कार्यकाल बढ़ाया जाए ताकि पीयू के सर्वोच्च सदन की गरिमा बची रहे।

कहा कि कानून की पवित्रता बचाए रखने के लिए जल्द से जल्द निर्णय लेने की जरूरत है। पत्र भेजने वाले सीनेटरों में हरप्रीत सिंह दुआ, जरनैल सिंह, अशोक गोयल, नवदीप गोयल, अनु चतरथ, रोंकी राम, चमन लाल, एसके शर्मा, केशव मल्होत्रा, इमैनुअल नाहर, इकबाल सिंह संधू, नरेंद्र सिंह, राजेश गिल, परवीन गोयल, डीपी रंधावास, नव्रेश गौड़ आदि शामिल हैं।

पीयू वीसी की ओर से भेजा जाता पत्र तो और अधिक प्रभाव पड़ता
पीयू के जानकारों का कहना है कि पीयू वीसी की ओर से सीनेटरों का पत्र चांसलर को भेजा जाता तो इसका अलग असर पड़ता, क्योंकि सीनेट की आवश्यकता पीयू को है ताकि कार्य प्रभावित न हो सकें। सीनेट के अध्यक्ष के रूप में वीसी के पास अधिकार हैं। उन्हीं की तरफ से यह पत्र भेजा जाना चाहिए था। हालांकि वीसी को पहले सीनेट चुनाव करवाने के लिए सीनेटरों ने पत्र दिया था।

पीयू की रुचि न होने के कारण ही सीनेटरों ने यह निर्णय लिया। जानकार कहते हैं कि चांसलर चाहें तो यह कार्यकाल आसानी से बढ़ा सकते हैं। यदि बोर्ड ऑफ गवर्नेंस भी बनाना चाहते हैं तो जब तक बोर्ड नहीं बन जाता तब तक सीनेट का कार्यकाल बढ़ सकता है ताकि पीयू के कार्य न रुकें। कुछ सीनेटरों का कहना है कि सीनेट को जो निर्णय लेती है वह अब अकेले वीसी लेंगे। ऐसे में मनमाने फैसले हो सकते हैं। इससे पीयू को भी खतरा हो सकता है।

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