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वायरल मैसेज से परेशान लीची पैदा कर रहे किसान, कारोबार लड़खड़ाया, मुंबई-दुबई से कम डिमांड

Wed, 26 Jun 2019 05:28 AM IST
ajay kumar नवदीप शर्मा, अमर उजाला, पठानकोट (पंजाब)
नवदीप शर्मा, अमर उजाला, पठानकोट (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 26 Jun 2019 05:28 AM IST
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Leechi business badly affected due to viral Message about chamki fever in Pathankot
लीची कारोबार प्रभावित - फोटो : अमर उजाला

लीची खाने से चमकी बुखार होने के वायरल मैसेज से पठानकोट के लीची काश्तकारों का भारी नुकसान हो रहा है। हालांकि सेहत विभाग, बागबानी विभाग और जिला प्रशासन ने ऐसे मैसेज को भ्रामक बताकर पठानकोट एरिया में पैदा हो रही लीची को सेफ बताया है। सीजन में 6 लाख क्विंटल लीची की काश्त करने वाले पठानकोट के काश्तकारों को पहले के मुकाबले ग्राहक कम मिल रहे हैं। 

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मामला सेहत विभाग और बागबानी उच्चाधिकारियों के सामने पहुंचा तो उन्होंने बाकायदा प्रेस नोट जारी कर लीची को सेहत के लिए फायदेमंद बताया है।

सेहत विभाग ने दावा किया कि पठानकोट में लीची से होने वाली कोई भी बीमारी सामने नहीं आई है। यहां तक कि पंजाब में भी ऐसा कोई मामला रिपोर्ट नहीं किया गया है जिसमें किसी बीमारी की वजह लीची को बताया गया हो। 
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देश भर में सबसे ज्यादा लीची की काश्त पठानकोट में होती है। 7500 एकड़ रकबे में हर वर्ष 6 लाख क्विंटल लीची की पैदावार होती है जिससे 6 करोड़ का कारोबार होता है। पठानकोट को केंद्र सरकार से लीची जोन का दर्जा प्राप्त है और पंजाब सरकार ने पठानकोट में लीची एस्टेट का निर्माण भी करवाया है ताकि लीची को लंबे समय तक फ्रेश रखा जा सके। 

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Leechi business badly affected due to viral Message about chamki fever in Pathankot

पंजाब के अलावा यूपी, बिहार से लीची व्यापारी हर साल पठानकोट आते हैं और लीची का कारोबार करते हैं। पठानकोट से लीची को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बाकी राज्यों में निर्यात किया जाता है। इस बार सीजन अभी शुरू ही हुआ ही था कि सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल होने लगा जिसमें लीची से चमकी बुखार होने की बात कही जा रही है। इससे लीची की मांग में कमी आई है।

मुंबई, दिल्ली से लेकर दुबई में भी पठानकोट की लीची की धूम
पठानकोट की लीची की दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता ही नहीं बल्कि दुबई में भी भारी मांग है लेकिन इस साल एक वायरल मैसेज ने सारा समीकरण बिगाड़ दिया है। गांव मुरादपुर के किसान ओंकार सिंह के नौ एकड़ बाग की लीची दुबई में 600 रुपये प्रति किलो के हिसाब से निर्यात की जाती है। वहीं, यूपी से लीची का व्यापार करने आए सलीम अहमद ने बताया कि उनकी लीची मुंबई भेजी जाती है।

 इस बार मुंबई से डिमांड कम हो गई है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में उनके लीची से भरे ट्रक खड़े हैं, खरीदार नहीं है। उनके पास 200 से ज्यादा लीची को तोड़ने वाले मजदूर काम करते हैं।

उनका एक दिन का खर्च 40 हजार से ज्यादा का है। उनके द्वारा पठानकोट में 52 लाख के लीची के बाग लिए गए हैं जिनमें लीची तोड़ने का काम चल रहा है। ऐसे में इस साल अगर उनको घाटा उठाना पड़ता है तो वो बर्बाद हो जाएंगे। 

अफवाहों पर ध्यान न दें। राष्ट्रीय लीची खोज केंद्र मुजफ्फरपुर के डायरेक्टर डॉ. विशाल नाथ ने पुष्टि की है कि रिपोर्ट्स में पाया गया है कि लीची में ऐसा कोई तत्व नहीं मिला जो चमकी बुखार की ओर इशारा करता हो। लीची विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर है। इसका जीवन पर कोई गलत प्रभाव नहीं है।  - डॉ. नरेश कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, बागबानी विभाग 

वायरल मैसेज ने काश्तकारों और व्यापारियों का नुकसान किया है। लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, लीची पौष्टिक फल है।  - राजीव महाजन, अध्यक्ष, पठानकोट फ्रूट एंड वेजिटेबल को-ऑपरेटिव सोसाइटी 

पठानकोट में ऐसा कोई मरीज नहीं मिला जिसे लीची खाने के बाद बुखार या कोई अन्य दिक्कत आई हो। -डॉ. भूपिन्द्र सिंह, एसएमओ 

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