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बीबीएमबी मुद्दा: हरियाणा के नेताओं ने केंद्र पर बोला हमला, हुड्डा बोले- ऐसे नियम बनाए गए हैं, जिसे पूरा नहीं कर सकते
Sat, 26 Feb 2022 11:59 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:59 PM IST
सार
बीबीएमबी पर केंद्र सरकार के ताजा फैसले के बाद पंजाब एवं हरियाणा में सियासत गरमा गई है। पंजाब के नेता इस मामले को लेकर पहले ही अपना विरोध जता चुके हैं। अब हरियाणा में भी विपक्ष इस मुद्दे पर मुखर हो गया है।
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भूपेंद्र हुड्डा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड नियम-1974 के मुताबिक बीबीएमबी में सदस्य (पावर) पंजाब से और सदस्य, सिंचाई हरियाणा से होते थे, लेकिन 2022 के संशोधित नियम में यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
संशोधित नियमों के तहत सदस्यों के चयन के मापदंड भी ऐसे रखे गए हैं, जिन्हें हरियाणा और पंजाब के बिजली विभाग पूरा नहीं कर सकते। यहां जारी बयान में हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार की अनदेखी के चलते पहले भी बीबीएमबी में हरियाणा कोटे से मिलने वाले पदों में कटौती होती रही है। तब भी हरियाणा सरकार ने कुछ नहीं बोला और अब केंद्र के नए फैसले पर भी सरकार मौन धारण किए हुए हैं।
बीजेपी-जेजेपी सरकार की यह चुप्पी प्रदेश विरोधी है। जबकि पंजाब के कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल प्रदेश हित में एकमत होकर इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में हरियाणा सरकार को भी सभी दलों के साथ मिलकर इस फैसले का विरोध करना चाहिए और प्रदेश के अधिकारों का संरक्षण करना चाहिए।
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केंद्र को नदी जल मुद्दों पर फैसले का हक नहीं : सुखबीर
शिअद प्रमुख सुखबीर बादल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 78 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अकाली इसके लिए डटकर खड़ा रहा है। केंद्र को नदी जल मुददों पर निर्णय लेने का कोई अधिकार नही है। उन्होंने केंद्र को चेतावनी दी कि उनकी पार्टी इस भेदभाव को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी। सुखबीर बादल ने कहा ‘गुरु साहिबान, संतों और ऋषियों की धरती पर एक भयावह संकट मंडरा रहा है। हम पंजाब को रेगिस्तान में बदलने से बचाने के लिए इस खतरे से लड़ेंगे, ताकि हमारे बच्चों को भुखमरी का सामना न करना पड़े या जिंदा रहने के लिए अपने घरों को छोड़कर कहीं और न जाना पड़े।
केंद्र का फैसला हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म करने की कड़े शब्दों में निंदा की है। कुमारी सैलजा ने केंद्र के इस फैसले को हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने इस फैसले को हरियाणा विरोधी करार दिया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि यह बेहद ही शर्मनाक है कि केंद्र सरकार के इस फैसले का हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार ने कोई विरोध नहीं किया। यह बताता है कि हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के सामने पूरी तरह से घुटने टेक दिए हैं।
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संशोधित नियमों के तहत सदस्यों के चयन के मापदंड भी ऐसे रखे गए हैं, जिन्हें हरियाणा और पंजाब के बिजली विभाग पूरा नहीं कर सकते। यहां जारी बयान में हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार की अनदेखी के चलते पहले भी बीबीएमबी में हरियाणा कोटे से मिलने वाले पदों में कटौती होती रही है। तब भी हरियाणा सरकार ने कुछ नहीं बोला और अब केंद्र के नए फैसले पर भी सरकार मौन धारण किए हुए हैं।
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बीजेपी-जेजेपी सरकार की यह चुप्पी प्रदेश विरोधी है। जबकि पंजाब के कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल प्रदेश हित में एकमत होकर इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में हरियाणा सरकार को भी सभी दलों के साथ मिलकर इस फैसले का विरोध करना चाहिए और प्रदेश के अधिकारों का संरक्षण करना चाहिए।
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केंद्र को नदी जल मुद्दों पर फैसले का हक नहीं : सुखबीर
शिअद प्रमुख सुखबीर बादल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 78 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और अकाली इसके लिए डटकर खड़ा रहा है। केंद्र को नदी जल मुददों पर निर्णय लेने का कोई अधिकार नही है। उन्होंने केंद्र को चेतावनी दी कि उनकी पार्टी इस भेदभाव को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी। सुखबीर बादल ने कहा ‘गुरु साहिबान, संतों और ऋषियों की धरती पर एक भयावह संकट मंडरा रहा है। हम पंजाब को रेगिस्तान में बदलने से बचाने के लिए इस खतरे से लड़ेंगे, ताकि हमारे बच्चों को भुखमरी का सामना न करना पड़े या जिंदा रहने के लिए अपने घरों को छोड़कर कहीं और न जाना पड़े।
केंद्र का फैसला हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म करने की कड़े शब्दों में निंदा की है। कुमारी सैलजा ने केंद्र के इस फैसले को हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने इस फैसले को हरियाणा विरोधी करार दिया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि यह बेहद ही शर्मनाक है कि केंद्र सरकार के इस फैसले का हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार ने कोई विरोध नहीं किया। यह बताता है कि हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के सामने पूरी तरह से घुटने टेक दिए हैं।