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कितनी असरदार सिद्धू की नई पार्टी, 5 प्वाइंट में समझिए क्या चल रहा है अंदरखाते

Wed, 07 Sep 2016 10:46 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 07 Sep 2016 10:46 AM IST
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नवजोत सिद्धू और नवजोत कौर जा सकते हैं आम आदमी पार्टी में।
क्रिकेटर, कमेंट्रेटर और टीवी कलाकार से नेता बने नवजोत सिद्धू न तो भाजपा में रहे, न आप में गए और न थामा हाथ, लेकिन अब किसके साथ? ये सवाल सबके जेहन में है, लेकिन 8 सितंबर को सब स्पष्ट हो जाएगा। नवजोत सिद्धू खुद मीडिया के सामने इसका ऐलान करेंगे। माना जा रहा है कि नवजोत सिद्धू ओलंपियन परगट सिंह के साथ मिलकर चौथा फ्रंट बनाने जा रहे हैं।
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पिछले दो साल से बादल सरकार को सीधी चुनौती देने वाले लुधियाना से एमएलए बैंस बंधु भी उनके साथ हैं। खुद सिद्धू अभी तक खामोश हैं, लेकिन उनकी विधायक पत्नी डॉ. नवजोत कौर ने इसकी पुष्टि कर दी है। परगट सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट में भी इस मोर्चे का पोस्टर पोस्ट किया है। इसमें सिद्धू को परगट सिंह, सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर सिंह के साथ दिखाया गया है। अगर यह फ्रंट चुनाव लड़ता है तो राज्य की 41 सीटों के नतीजों पर असर डाल सकता है।
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फ्रंट के 4 मुख्य सदस्य कौन, कौन-कौन सी हैं 41 सीटें

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बैंस बंधु और परगट सिंह के साथ मिलकर सिद्धू ने बनाई पार्टी - फोटो : अमर उजाला
नवजोत सिद्धू मूलरूप से पटियाला निवासी हैं, अमृतसर लोकसभा सीट से 10 साल सांसद रहे हैं। परगट सिंह जालंधर ईस्ट से विधायक हैं। सीपीएस का पद ठुकरा चुके हैं। अकाली दल से सस्पेंड हो चुके हैं।

सिमरजीत सिंह बैंस लुधियाना की आत्म नगर सीट और बलविंदर सिंह बैंस लुधियाना साउथ से निर्दलीय विधायक हैं। इन चारों जिलों में 41 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर 'आवाज-ए-पंजाब' फ्रंट असर डाल सकता है।

इनमें अमृतसर से 10 विधानसभा सीटे हैं। पटियाला में 8, जालंधर में 9 और लुधियाना में 14 सीटें हैं। यही वो सीटें हैं, जो प्रभावित हो सकती हैं।
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स्वराज पार्टी से हाथ मिलाने की चर्चाएं

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योगेंद्र यादव - फोटो : amar ujala
परगट सिंह भी जानते हैं कि बेशक उनके फ्रंट में नवजोत सिंह सिद्धू, विधायक बैंस बंधु हैं, लेकिन किसी का भी पूरे पंजाब भर में आधार नहीं है। सुच्चा सिंह छोटेपुर का पूरे पंजाब में थोड़ा बहुत हर जगह पर आधार है।

सूत्रों का कहना है कि छोटेपुर ने ही यह प्रस्ताव दिया था कि तीनों पार्टियों को अलग-अलग लड़ने की बजाय एक पार्टी, एक झंडे के तले आना होगा। रविवार को छोटेपुर के साथ मीटिंग करने के बाद परगट सिंह ने स्वराज पार्टी के प्रधान प्रो. मनजीत सिंह से भी मुलाकात की और नई पार्टी के प्रारूप के बारे में चर्चा की। इस मुद्दे पर चंडीगढ़ में आज शाम को बैठक भी होगी।

उधर, स्वराज पार्टी ने सभी जिलों में इकाईयां स्थापित कर ली हैं। यदि ये सभी इकट्ठे हो जाते हैं तो नवजोत सिंह सिद्धू, बैंस ब्रदर्स और परगट सिंह के रूप में इनके पास बादल परिवार के खिलाफ बोलने वाले लीडर मिल जाएंगे और प्रो मनजीत सिंह थिंक टैंक के रूप में काम करेंगे, जिसे सुच्चा सिंह छोटेपुर बूथ लेवल तक ले कर जाएंगे।
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सुच्चा सिंह छोटेपुर को बड़ा ऑफर

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सुच्चा सिंह छोटेपुर - फोटो : फाइल फोटो
आम आदमी पार्टी के प्रदेश कन्वीनर पद से हटाए गए सुच्चा सिंह छोटेपुर भी सिद्धू की नई टीम का हिस्सा बन सकते हैं। बता दें, परगट सिंह ने सुच्चा सिंह छोटेपुर को इस नई पार्टी का कन्वीनर बनने का प्रस्ताव दिया था और कहा था कि यदि सरकार सत्ता मे आती है तो सीएम नवजोत सिंह सिद्धू को बनाया जाएगा।

डॉ. धर्मवीर गांधी का साथ आना मुश्किल
आम आदमी पार्टी के निलंबित सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी का नवजोत सिद्धू के साथ आना मुश्किल है, क्योंकि यदि वह ऐसा करते हैं तो एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत उनकी सांसद की कुर्सी खतरे में पड़ जाएगी, इसलिए उन्होंने पिछले दिनों राजनीतिक पार्टी बनाने की बजाए फ्रंट खड़ा किया जिसमें कई संगठन शामिल हुए।

कहीं नई पार्टी सिद्धू-केजरीवाल की माइंड गेम तो नहीं

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केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
सिद्धू और केजरीवाल दोनों ही सियासत के चतुर खिलाड़ी हैं, ऐसे में हो सकता है कि दोनों आपस में माइंडगेम तो नहीं खेल रहे। बीते दिनों केजरीवाल और सिद्धू की मुलाकात भी होती रही है। हो सकता है कि ये फैसला हुआ हो, जिसके तहत आप अपने बल पर लड़ेगी और सिद्धू अपने बल पर लड़ सकते हैं।

चूंकि सिद्धू की खुद की अपनी पहचान है ही और जैसे ही कुछ लोगों के नाम सामने आएंगे तो वो काफी सारी सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव नतीजों में जो कुछ भी आए सिद्धू और केजरीवाल उस समय साथ आ सकते हैं। इस तरह दोनों को फायदा है। हालांकि अभी ऐसा केवल अनुमान ही है।
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