विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज, गर्माई पीयू कैंपस की सियासत
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पीयू कैंपस में धारा 144 की अनदेखी करते हुए बुधवार को 400 से अधिक स्टूडेंट ने सुबह से दोपहर बाद तक वीसी दफ्तर को घेरे रखा और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मंगलवार को 9 साथियों के खिलाफ एफआईआर का मामला वापस नहीं लेने पर पीयू कैंपस में स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया(एसएफआई) ने जमकर हंगामा किया।
बुधवार सुबह करीब 11 बजे एसएफएस और एसएफआई छात्र नेताओं की अगुवाई में पीयू के आर्ट्स ब्लॉक वन से कक्षाओं का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। नारेबाजी करते हुए छात्र नेताओं ने कक्षाओं में पढ़ रहे विद्यार्थियों को कक्षाओं से निकालना शुरू कर दिया।
कार्रवाई करने से बचती रही पुलिस
400 से अधिक विद्यार्थियों का काफिला पीयू के अधिकतर विभागों में जाकर कक्षाओं को बंद कराने के लिए नारेबाजी करता रहा। दोपहर करीब 1 बजे सभी एकजुट होकर वीसी दफ्तर के सामने आ गए और पीयू अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
वीसी दफ्तर के सामने रोड को पूरी तरह जाम कर दिया गया। विद्यार्थियों के विरोध को देखते हुए पुलिस भी कोई कार्रवाई करने से बचती रही। छात्र नेता बातचीत के लिए कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर के बाहर आने पर अड़ गए। लेकिन डीएसडब्ल्यू प्रो. नवदीप गोयल, वार्डन अशोक कुमार और वार्डन जितेंद्र ग्रोवर ही विद्यार्थियों के पीयू प्रशासन का पक्ष रखने पहुंचे।
गुल पनाग भी पहुंची, फोटो खिंचवाई और चलती बनी
गुल पनाग बुधवार दोपहर करीब 2.45 बजे एक गाड़ी से पीयू कैंपस पहुंचीं और वीसी दफ्तर के सामने धरने पर बैठी लड़कियों के साथ बैठ गई। कुछ देर बाद विरोध करने वालों को भी इसकी जानकारी मिली। गुल पनाग ने एक मिनट माइक पकड़ा और खुद को पीयू की स्टूडेंट बताते हुए विद्यार्थियों का समर्थन किया। चंद मिनट सड़क पर बैठ गुल पनाग ने फोटो खिंचवाए और तुरंत गाड़ी में बैठ कैंपस से विदा हो गई।
लॉ सेमिनार हॉल में तोड़फोड़ और जमकर नारेबाजी
पीयू के लॉ विभाग की ओर से बुधवार को मूट कोर्ट रुम में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पर नेशनल सेमिनार चल रहा था। एसएफएस के कुछ छात्र नेता अपने समर्थकों ने पहले मूट कोर्ट की खिड़की का शीशा तोड़ा और फिर सेमिनार हाल में ही जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
सेमिनार में राजीव गांधी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.पीएस जसवाल, हरियाणा के एडीजीपी केपी सिंह और टीएनडीएएलयू चेन्नई के पूर्व कुलपति प्रो.वी विजय कुमार भी मौजूद थे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस और पीयू सिक्योरिटी की मदद से विरोध करने वालों को बाहर निकाला।
पीटने वाले पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों के तेवर ढीले
नौ साथियों को हवालात में डालने पर पीयू के छात्र नेता और समर्थक बुरी तरह भड़के हुए थे। कैंपस में छात्रों के उग्र माहौल को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
मंगलवार को पीयू कैंपस में दौड़ा दौड़ा कर पीटने वाले पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों के तेवर बुधवार को पूरी तरह बदले हुए थे। सभी पूरी तरह शांत थे और विद्यार्थियों को बार बार समझा रहे थे। पुलिस के कई सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी दिनभर वीसी दफ्तर के सामने हालात पर निगरानी रखे हुए थे।
...प्रोफेसर ने तो कैरियर बनने से पहले ही बिगाड़ दिया
मंगलवार दोपहर बाद से थाने में बंद कई पीयू विद्यार्थियों के अभिभावक दोपहर तक पीयू कैंपस में पहुंच गए। अभिभावकों ने वीसी से मिलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस और पीयू सिक्योरिटी ने उन्हें कुलपति दफ्तर में जाने की अनुमति नहीं दी।
एक अभिभावक ने कहा कि बच्चों को कैंपस में कैरियर बनाने के लिए भेजा था, लेकिन यहां के प्रोफेसर ने तो कैरियर बनने से पहले ही बिगाड़ दिया। पटियाला से आए अवतार सिंह ने बताया कि उनके भतीजे को पुलिस ने अरेस्ट किया है। संगरुर से पहुंचीं हरपाल कौर ने कहा कि उनके बेटे द्वारा फीस बढ़ोतरी का विरोध बिल्कुल जायज है।
विद्यार्थियों की रिहाई के लिए पीयू प्रशासन की कोशिश
प्रो.नवदीप गोयल (डीएसडब्ल्यू पीयू ) ने कहा कि पीयू प्रशासन की ओर से 9 विद्यार्थियों पर कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया है। कुलपति ने एफआईआर रद्द करने के लिए खुद एसएसपी से बातचीत की है। पीयू प्रशासन ने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया है कि मामले में पीयू अपनी तरफ से विद्यार्थियों के खिलाफ कोई बयान दर्ज नहीं कराएगी। विद्यार्थियों की रिहाई के लिए पीयू प्रशासन भी पूरी कोशिश कर रहा है।