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एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग में ये नई मुश्किल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Feb 2014 11:24 AM IST
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चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर कैट-2 आईएलएस लगाने के बाद भी यहां साढ़े तीन सौ मीटर की विजिबिलिटी पर विमानों की लैंडिंग मुश्किल होगी।
इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल है आरवीआर यानी रनवे विजुअल रेंज, फिलहाल चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर नहीं है। एयरफोर्स के रनवे अपग्रेडेशन प्लान में भी अब तक स्पष्ट नहीं है कि मेट्रोलाजिकल इंस्ट्रूमेंट लगेंगे कि नहीं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट की लंबाई 9000 फीट है।
एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कैट-2 के संग आरवीआर (अपग्रेडेड) इंस्ट्रूमेंट ही काम करेगा। एयरपोर्ट पर दो आरवीआर लगाए जाते हैं। एक इंस्ट्रूमेंट रनवे की शुरुआत में लगाया जाता है, जबकि दूसरा रनवे के बीच में लगाया जाता है।
एयरपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, अभी एयरपोर्ट पर मैनुअल मैट्रोलाजिकल इंस्ट्रूमेंट है। इसकी वजह से सटीक विजिबिलिटी की जानकारी नहीं मिल पाती है।
ऐसे काम करता है आरवीआर
आरवीआर की मदद से रनवे की सेंट्रल लाइन की जानकारी पायलट को मिल जाती है। लैंडिंग के समय पायलट को विजुअल अप्रोच की आवश्यकता होती है।
आरवीआर रनवे की पूरी जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को देता है, जिसके बाद पायलट को जानकारी दी जाती है। आरवीआर को आईएलएस कैट-2 के संग उपयोग किया जाता है तो यह 300 से 549 मीटर तक पर लैंडिंग करवा सकता है।
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कैट-1 के संग भी आवश्यक है इंस्ट्रूमेंट
एयरपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वार लगाए गए कैट-1 इंस्ट्रूमेंट के संग भी अपग्रेडेड मेट्रोलाजिकल आरवीआर का प्रयोग किया जाए तो कैट-1 भी छह सौ मीटर की विजिबिलिटी पर काम करेगा।
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इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल है आरवीआर यानी रनवे विजुअल रेंज, फिलहाल चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर नहीं है। एयरफोर्स के रनवे अपग्रेडेशन प्लान में भी अब तक स्पष्ट नहीं है कि मेट्रोलाजिकल इंस्ट्रूमेंट लगेंगे कि नहीं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट की लंबाई 9000 फीट है।
एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कैट-2 के संग आरवीआर (अपग्रेडेड) इंस्ट्रूमेंट ही काम करेगा। एयरपोर्ट पर दो आरवीआर लगाए जाते हैं। एक इंस्ट्रूमेंट रनवे की शुरुआत में लगाया जाता है, जबकि दूसरा रनवे के बीच में लगाया जाता है।
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एयरपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, अभी एयरपोर्ट पर मैनुअल मैट्रोलाजिकल इंस्ट्रूमेंट है। इसकी वजह से सटीक विजिबिलिटी की जानकारी नहीं मिल पाती है।
ऐसे काम करता है आरवीआर
आरवीआर की मदद से रनवे की सेंट्रल लाइन की जानकारी पायलट को मिल जाती है। लैंडिंग के समय पायलट को विजुअल अप्रोच की आवश्यकता होती है।
आरवीआर रनवे की पूरी जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को देता है, जिसके बाद पायलट को जानकारी दी जाती है। आरवीआर को आईएलएस कैट-2 के संग उपयोग किया जाता है तो यह 300 से 549 मीटर तक पर लैंडिंग करवा सकता है।
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कैट-1 के संग भी आवश्यक है इंस्ट्रूमेंट
एयरपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वार लगाए गए कैट-1 इंस्ट्रूमेंट के संग भी अपग्रेडेड मेट्रोलाजिकल आरवीआर का प्रयोग किया जाए तो कैट-1 भी छह सौ मीटर की विजिबिलिटी पर काम करेगा।