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ट्रेन से टपक रहा था खून, लेकिन जान पर खेलकर लाखों हिंदू-सिखों को बचाकर लाया था ये जांबाज

Wed, 15 Aug 2018 08:44 AM IST
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर (पंजाब)
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर (पंजाब) Updated Wed, 15 Aug 2018 08:44 AM IST
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Lakhs of Hindus and sikh bring save from Pakistan by Balkrishna of Ferozepur
बालकृष्ण
भारत-पाक बंटवारे के दौरान ट्रेन के माध्यम से पाकिस्तान से हिंदुओं-सिखों को गदरियों से बचाकर फिरोजपुर लाने वाले रेलवे के गार्ड 94 वर्षीय बाल कृष्ण गुप्ता आज गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। गुप्ता को स्वतंत्रता दिवस पर न तो जिला प्रशासन और न ही रेलवे ने कभी सम्मानित किया है। गुप्ता कहते हैं कि सतलुज दरिया पर बने केसरी-ए-हिंद (डबल पुल) पर ट्रेन दौड़ाकर उन्होंने कई लोगों की जान बचाई थी। 
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बाल कृष्ण गुप्ता 25 अप्रैल 1945 में रेलवे में ट्रेन गार्ड नियुक्त हुए था और लाहौर-फिरोजपुर-बठिंडा के बीच ट्रेन चलाया करता था। 22-23 सिंतबर 1947 में उन्हें रेल अफसरों का आदेश मिला कि कपूरथला से दस हजार मुसलमान सेना की निगरानी में पैदल आ रहे हैं, उन्हें मक्खू रेलवे स्टेशन से ट्रेन पर बैठाकर पाकिस्तान सुरक्षित छोड़ कर आना है। उनके साथ ट्रेन पायलट पंडित रतन लाल थे। 24 डिब्बों वाली ट्रेन लेकर मक्खू रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो वहां पर कोई नहीं था। बाद में पता चला कि गिद्ड़पिंडी पुल के पास कुछ शरारती तत्वों ने जत्थे पर कातिलाना हमला कर दिया है। 
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कुछ लोग मक्खू स्टेशन पहुंचे जिन्हें ट्रेन में बैठाकर वे पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए। ट्रेन में उनकी सुरक्षा के लिए डोगरा रेजीमेंट के जवान थे। ट्रेन फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन से लगभग दो किलोमीटर पीछे थी। निजामद्दीन बस्ती के पास शरारती तत्वों ने ट्रेन पर हमला बोल दिया कई लोग मारे गए और खून से लथपथ ट्रेन छावनी स्टेशन पहुंची। उस समय रेलवे के डीआरएम (तब डिवीजन सुपरिंटेंडेंट को डीआरएम कहते थे) दया चंद थे। ट्रेन से खून साफ किया गया और फिर ट्रेन पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन (जिसे मौजूदा समय में पाकिस्तान का गंडा सिंह बार्डर कहते हैं) रवाना हुई। 
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Lakhs of Hindus and sikh bring save from Pakistan by Balkrishna of Ferozepur
यहीं पर पहले केसरी-ए-हिंद पुल हुआ करता था
साथ ही आदेश मिले कि पाकिस्तान के मिंट गुबरी से आए हिंदू-सिखों को गंडा सिंह रेलवे स्टेशन से भारत लाना है। ट्रेन में सवार मुसलमानों ने पाकिस्तान पहुंचते ही अधिकारियों को कहा कि ट्रेन के पायलट और गार्ड ने ट्रेन रुकवाकर मुसलमानों को मरवा दिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों को वहीं रोक लिया। एक अंग्रेज मेजर गंडा सिंह पहुंचा तो उसे सारी घटना से अवगत करवाया गया। लाहौर से भारतीय लोगों से भरी ट्रेन गंडा सिंह पहुंचनी थी। 

गुप्ता ने कहा कि उसी समय आदेश मिला कि अपनी ट्रेन फिरोजपुर लाइन पर ले जाओ। हमें अपनी जान खतरे में दिख रही थी। फिरोजपुर लाइन पर लेकर हम खाली ट्रेन ही भगाकर फिरोजपुर ले आए। फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचने पर फिर कहा गया कि पाकिस्तान से हिंदू-सिखों को लेकर आना है, दोबारा जाना पड़ेगा। गुप्ता ने अधिकारियों से कहा कि हमें कोई भी सजा दे दो, दोबारा पाक ट्रेन लेकर नहीं जाएंगे। फिरोजपुर में मेजर पुरी तैनात थे जो कसूर के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि हजारों हिंदू-सिख भूखे-प्यासे कसूर रेलवे स्टेशन पर बैठे हैं, उन्हें सुरक्षित लेकर आना है। 

मैं तुम्हारी सुरक्षा के लिए साथ चलूंगा। 27 सितंबर को फिरोजपुर से ट्रेन लेकर कसूर पहुंचे। ट्रेन के 24 डिब्बे थे, लोगों की संख्या ज्यादा थी। ट्रेन के अंदर, बाहर और ऊपर तक लोग चढ़ गए। गंडा सिंह रेलवे स्टेशन पार करना था वहां पर बहुत से मुसलमान तलवारें, कापे जैसे हथियार लेकर खड़े थे। कसूर से ट्रेन चलकर जैसे गंडा सिंह पहुंची, मुसलमानों ने हमला बोल दिया। बहुत से लोग मारे गए, खून ट्रेन से टपक रहा था। गुप्ता ने बताया कि गंडा सिंह रेलवे स्टेशन क्रॉस करते ही उन्होंने ट्रेन केसरी-ए-हिंद पुल पर पूरी रफ्तार से दौड़ाई और फिरोजपुर पहुंचे। गुप्ता ने कहा कि गार्ड की नौकरी 1965 तक की। उसके बाद तरक्की मिलने पर कंट्रोल आफिस में चीफ कंट्रोल लगे। 31 मई 1984 को चीफ कंट्रोल के पद से सेवानिवृत्त हुए।
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