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एक एसडीओ के भरोसे हैं शहर की स्ट्रीट लाइटें
रवि अटवाल/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 25 Jan 2014 01:12 PM IST
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नगर निगम के अफसर शहर की सड़कों पर छाए अंधेरे को दूर करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। स्ट्रीट लाइटों की समस्या अब और विकाल रूप लेने वाली हैं, क्योंकि निगम के पास अब टेक्निकल स्टाफ ही नहीं बचा है।
पूरे शहर की स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने की जिम्मेवारी केवल एक ही एसडीओ के भरोसे है। निगम में अभी दो एसडीओ थे, जिनमें से एक एसडीओ रविंदर सिंह ने चार दिन पहले ही निगम को अलविदा कह दिया।
एसडीओ रविंदर सिंह 20 जनवरी को वापस अपने मूल राज्य हरियाणा लौट गए। सूत्रों से पता चला है कि प्रबंधन की गड़बड़ियों से तंग आकर ही उन्होंने वापस लौटने की मांग की थी। अब इलेक्ट्रिसिटी विंग में केवल एक एसडीओ कुलदीप सिंह ही बचे हैं।
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एसडीओ रविंदर सिंह के पास सेक्टर-31 से लेकर शहर के बाकी हिस्सों की स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेवारी थी जबकि एसडीओ कुलदीप सिंह के पास 1 से 30 सेक्टर थे। अब पूरा शहर एक ही एसडीओ देख रहे हैं।
हालत ये है कि शहर में की अधिकतर सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। दक्षिणी सेक्टरों का तो और बुरा हाल है। कई तो चौराहों पर लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं।
पहले थे तीन, अब रह गए एक एसडीओ
निगम की इलेक्ट्रिसिटी विंग में पहले तीन एसडीओ काम कर रहे थे। इनमें से एक एसडीओ अजय डडवाल को कमिश्नर का ओएसडी बना दिया गया। ऐसे में दो ही एसडीओ इलेक्ट्रिसिटी का काम देख रहे थे।
अब उनमें से भी एक ही रह गए हैं। इलेक्ट्रिसिटी कमेटी के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने डडवाल को वापस इलेक्ट्रिसिटी विंग में शामिल करने के लिए कमिश्नर से मांग की है।
कोट
अफसर कोई भी काम करने को तैयार नहीं है। मैंने 10 दिन पहले एसडीओ अजय डडवाल को ओएसडी से हटाकर वापस इलेक्ट्रिसिटी विंग में लाने केलिए कमिश्नर को पत्र लिखा था। उस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया।
राजेश गुप्ता, चेयरमैन, इलेक्ट्रिसिटी कमेटी
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पूरे शहर की स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने की जिम्मेवारी केवल एक ही एसडीओ के भरोसे है। निगम में अभी दो एसडीओ थे, जिनमें से एक एसडीओ रविंदर सिंह ने चार दिन पहले ही निगम को अलविदा कह दिया।
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एसडीओ रविंदर सिंह 20 जनवरी को वापस अपने मूल राज्य हरियाणा लौट गए। सूत्रों से पता चला है कि प्रबंधन की गड़बड़ियों से तंग आकर ही उन्होंने वापस लौटने की मांग की थी। अब इलेक्ट्रिसिटी विंग में केवल एक एसडीओ कुलदीप सिंह ही बचे हैं।
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एसडीओ रविंदर सिंह के पास सेक्टर-31 से लेकर शहर के बाकी हिस्सों की स्ट्रीट लाइटों की जिम्मेवारी थी जबकि एसडीओ कुलदीप सिंह के पास 1 से 30 सेक्टर थे। अब पूरा शहर एक ही एसडीओ देख रहे हैं।
हालत ये है कि शहर में की अधिकतर सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। दक्षिणी सेक्टरों का तो और बुरा हाल है। कई तो चौराहों पर लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो रही हैं।
पहले थे तीन, अब रह गए एक एसडीओ
निगम की इलेक्ट्रिसिटी विंग में पहले तीन एसडीओ काम कर रहे थे। इनमें से एक एसडीओ अजय डडवाल को कमिश्नर का ओएसडी बना दिया गया। ऐसे में दो ही एसडीओ इलेक्ट्रिसिटी का काम देख रहे थे।
अब उनमें से भी एक ही रह गए हैं। इलेक्ट्रिसिटी कमेटी के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने डडवाल को वापस इलेक्ट्रिसिटी विंग में शामिल करने के लिए कमिश्नर से मांग की है।
कोट
अफसर कोई भी काम करने को तैयार नहीं है। मैंने 10 दिन पहले एसडीओ अजय डडवाल को ओएसडी से हटाकर वापस इलेक्ट्रिसिटी विंग में लाने केलिए कमिश्नर को पत्र लिखा था। उस पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया।
राजेश गुप्ता, चेयरमैन, इलेक्ट्रिसिटी कमेटी