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Hindi News ›   Chandigarh ›   Lack of health facilities in village of Union Minister VK Singh amid covid-19 crisis

15 दिन में 25 से ज्यादा मौतें: वीके सिंह का गांव बेहाल, न एंबुलेंस न ऑक्सीजन, स्वास्थ्य सुविधाएं खस्ताहाल, पढ़ें- ग्राउंड रिपोर्ट

Tue, 18 May 2021 02:53 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Tue, 18 May 2021 02:53 AM IST
सार

आम हो या खास सब कोरोना की जद में हैं। मंत्री-विधायकों के गांव के हाल बेहाल हैं। पूर्व सेना अध्यक्ष और मौजूदा समय में केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह के गांव बापोड़ा में 15 दिन में 25 से ज्यादा मौतें हुई हैं। ऐसे में हमने वीके सिंह के गांव में लोगों को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल जाना। पढ़ें- अमर उजाला की ये ग्राउंड रिपोर्ट...

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Lack of health facilities in village of Union Minister VK Singh amid covid-19 crisis
वीके सिंह के गांव से अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह के गांव बापोड़ा में फिलहाल 30 लोग कोरोना संक्रमित हैं। बीते 15 दिनों में गांव के 25 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इनमें चार लोगों की कोरोना से मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालात को देखते हुए गांव में कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। मगर वहां पर न एंबुलेंस है और न ही ऑक्सीजन की सुविधा है। सुविधा के नाम पर केवल कुछ टेबलेट और 10 बेड हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि जिस कमरे में बेड रखे हैं उसको ताला लगाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपने घर चला जाता है। वीके सिंह का गांव हरियाणा के भिवानी जिले में पड़ता है। 

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रविवार को उपायुक्त जयबीर सिंह आर्य और एसपी अजीत सिंह ने आइसोलेशन वार्ड का निरीक्षण किया था और वहां पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के आदेश संबंधित अधिकारियों को दिए थे। उपायुक्त के दौरे के चलते रविवार को वहां पर एंबुलेंस भी तैनात की गई थी, मगर सोमवार को हालात बिल्कुल उलट मिले। 
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कर्मचारियों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (पुरुष) में यह आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है। यहां एक कमरे में छह तथा दूसरे में तीन बेड लगाए गए हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की प्रिंसिपल दुर्गेश नंदनी और दो अन्य अध्यापकों की ड्यूटी यहां पर व्यवस्था बनाने के लिए लगाई गई है। 
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                                                ताला खोलती महिला कर्मचारी।

सोमवार को स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तीन बेड वाले कमरे को छोड़कर बाकी सभी कमरों को ताला लगाकर चले गए। व्यवस्था बनाने के लिए तैनात किए गए कर्मचारी भी मरीजों के लिए लगाए गए बेड पर बैठे नजर आए। उनके लिए कुर्सी तक की व्यवस्था नहीं है। न ही पीने के पानी की कोई व्यवस्था की गई थी। फोन कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बुलाया तो उसने दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे पहुंचकर ताला खोला। 


                                  चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बुलाने के लिए फोन करतीं प्रिंसिपल दुर्गेश नंदनी।

रात को ही चली गई एंबुलेंस
रविवार शाम को उपायुक्त के दौरे से पहले आइसोलेशन सेंटर पर एंबुलेंस तैनात कर दी गई थी। मगर डीसी और एसपी के जाने के बाद रात को एंबुलेंस भी वहां से रवाना हो गई। अब मरीजों को गांव से आइसोलेंशन सेंटर या भिवानी तक लाने के लिए एंबुलेंस की कोई सुविधा नहीं है। वहीं सेंटर पर ऑक्सीजन सिलिंडर भी नहीं हैं। अगर किसी मरीज की तबीयत बिगड़ती है या ऑक्सीजन लेवल कम होता है तो उसे भिवानी ही लेकर जाना पड़ेगा।

गांव में लोगों को आइसोलेशन सेंटर की जानकारी नहीं
भले ही बापोड़ा में लोग कोरोना के कारण दहशत में हों, मगर ज्यादातर ग्रामीणों को गांव में बनाए गए आइसोलेशन सेंटर के बारे में जानकारी ही नहीं है। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं जानते हैं। प्रशासन या ग्राम पंचायत द्वारा लोगों को इस बारे में जागरूक नहीं किया गया है।

एएनएम टीकाकरण शिविर में गई

अस्पताल में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि सेंटर पर एएनएम की ड्यूटी भी लगाई गई है। वह एएनएम सोमवार को गांव में आयोजित टीकाकरण शिविर में चली गई। इसलिए आइसोलेशन सेंटर में कोई मौजूद नहीं था। हालात यह है कि अगर कोई मरीज आता है तो उसे दो शिक्षक या प्रिंसिपल ही मिलेंगे। वे उसे किस स्तर का उपचार दे सकते हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

आइसोलेशन सेंटर बने हुए थोड़ा समय हुआ है। जल्द ही यहां पर सभी सुविधाएं कोरोना मरीजों के लिए शुरू हो जाएंगी। लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। निश्चित रूप से यह आइसोलेशन सेंटर बेहतर परिणाम देगा।- दुर्गेश नंदनी, प्रिंसिपल, राजकीय कन्या विद्यालय, बापोड़ा।

 

आइसोलेशन सेंटर में ऑक्सीजन और एंबुलेंस की मांग जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से की गई है। गांव में कोरोना का संक्रमण ज्यादा है, इसलिए जल्द से जल्द ये सुविधाएं आइसोलेशन सेंटर में शुरू कर दी जानी चाहिए।- नरेश तंवर, सरपंच, बापोड़ा।

 

ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। बापोड़ा में भी जिन सुविधाओं की कमी है, उन्हें जल्द से जल्द मुहैया कराया जाएगा। हमारा प्रयास है कि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। - डॉ. सपना गहलावत, सीएमओ, भिवानी।

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