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अमर उजाला अभियान: दड़वा के सरकारी स्कूल के गेट पर गोबर का ढेर, न खेलने के लिए मैदान और न लाइब्रेरी, मेडिकल सुविधाओं की भी कमी  

कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 04 Jul 2022 10:56 AM IST
सार

सरकारी हाई स्कूल दड़वा में नर्सरी से दसवीं कक्षा तक लगभग 1300 बच्चे पढ़ते हैं लेकिन स्कूल में कमरे सिर्फ 14 ही हैं। स्कूल में एक भी लैब नहीं है। 

दड़वा के सरकारी स्कूल में गेट के बाहर लगा गोबर का ढेर।
दड़वा के सरकारी स्कूल में गेट के बाहर लगा गोबर का ढेर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ के दड़वा स्थित गर्वनमेंट हाई स्कूल में गेट नंबर-2 से बच्चे प्रवेश नहीं कर सकते हैं। ऐसा कोई प्रशासनिक आदेश नहीं है बल्कि स्कूल के आसपास पशु रखने वाले लोगों ने इसे गोबर डालने का स्थान बना रखा है। आलम यह है कि गेट नंबर के बाहर रेहड़ी में गोबर का ढेर और साथ में कचरा फेंककर अवैध रूप से इसे बंद कर रखा है। इस गेट से मिड-डे मिल के लिए खाना अंदर लाया जाता है। गेट के बाहर की जगह को भी अवैध रूप से कब्जाया हुआ है। इसे लेकर क्षेत्र के लोगों और स्कूल ने प्रशासन को शिकायतें की है, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। 



जीएचएस दड़वा में नर्सरी से दसवीं कक्षा तक लगभग 1300 बच्चे पढ़ते हैं लेकिन स्कूल में कमरे सिर्फ 14 ही हैं। पिछले सत्र में स्कूल के पास कक्षाएं लगाने के लिए 15 कमरे थे लेकिन शिक्षा विभाग ने स्मार्ट पैनल लगाने के नाम पर एक कमरे को एक्वायर कर लिया है। अब इस कमरे का इस्तेमाल स्मार्ट कक्षा के लिए किया जाता है। यहां नियमित कक्षा नहीं ली जा सकती है।


स्कूल हेड सुरेश ने बताया कि क्षेत्र में काफी बच्चे दाखिले के लिए आते हैं, लेकिन कमरों की कमी के कारण उन्हें नजदीकी सेक्टरों के स्कूल में दाखिले के लिए भेज देते हैं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि स्कूल के अंदर न लाइब्रेरी है, न खेल का मैदान। यहां मेडिकल रूम की व्यवस्था भी नहीं है। शुरुआत में स्कूल प्राइमरी था, इसके बाद इसे मिडल बनाया गया। लगभग 9 साल पहले स्कूल के फर्स्ट फ्लोर पर नया ब्लॉक तैयार किया गया और स्कूल को हाई स्कूल तो बनाया गया लेकिन व्यवस्थाएं मुहैया नहीं करवाई गईं। स्कूल में एक भी लैब नहीं है। 

झूले बने बच्चों के लिए खतरा  

जीएचएस दड़वा में लगे फिसलपट्टी के झूले बच्चों के लिए खतरा बने हैं। फिसलपट्टी शुरू होने वाली जगह जंग लगने के कारण पूरी तरह टूटी हुई है। स्कूल में दो फिसलपट्टी हैं, दोनों के हाल एक जैसे हैं। 

बिल्डिंग जर्जर होने के कारण टूट रहे छज्जे

स्कूल की बिल्डिंग जर्जर होने के कारण छज्जे टूट रहे हैं। पुरानी बिल्डिंग के छज्जों में दरारें आ रखी हैं। कई जगह छज्जों का कुछ हिस्सा टूट कर गिर भी रखा है, लेकिन इसकी कोई मरम्मत करने वाला कोई नहीं है। कभी भी अगर थोड़ा हिस्सा भी गिरता है तो इससे बच्चे को चोट लग सकती है। 

शामलात जमीन पर नया स्कूल बनाए प्रशासन 

प्रशासन से स्कूल की समस्याओं को लेकर कई बार चर्चा की गई है और लिखित में भी हालात को लेकर शिकायत दी गई है। स्कूल के हाल बहुत खराब हैं। प्रशासन को गांव की शामलात जमीन पर स्कूल के लिए नई बिल्डिंग को प्रपोज करना चाहिए और इसे प्राइमरी के बच्चों के लिए स्कूल बनाना चाहिए। - बिमला दुबे, क्षेत्रीय पार्षद 

बारिश में स्कूल के बाहर हो जाता है पानी जमा  

बारिश के दौरान स्कूल के बाहर पानी जमा हो जाता है। स्कूल की बिल्डिंग नीची होने के कारण स्कूल में भी पानी रुक जाता है। वहीं स्कूल बहुत छोटा है। स्कूल में बच्चों के लिए किसी तरह की कोई सुविधा नहीं है। अधिकतर बच्चे सेक्टर-27 और 28 के स्कूलों में तीन से चार किमी दूर जाकर पढ़ाई कर रहे हैं। -गुरप्रीत सिंह, पूर्व सरपंच, दड़वा

स्कूल में सीवरेज की समस्या 

स्कूल में सीवरेज की समस्या है। पुरानी बिल्डिंग है इसलिए सीवरेज सिस्टम भी उसी दौरान का है। बहुत बार बाथरूम भी चोक हो जाते हैं। स्कूल में बहुत सारी व्यवस्थाओं में कमी है, लेकिन स्कूल के पास जगह की बहुत कमी है। - सुरेश कुमार, प्रमुख, जीएचएस दड़वा

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