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अस्पतालों में खून की कमी, मरीजों की जान सांसत में

Mon, 07 Feb 2022 02:09 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 02:09 AM IST
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Lack of blood in hospitals, lives of patients in breath
चंडीगढ़। कोरोना महामारी व ठंड के कारण रक्तदाताओं की संख्या आधे से भी कम हो गई है। स्थिति यह है कि पीजीआई समेत शहर के अन्य ब्लड बैंकों में खून की कमी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए पीजीआई युवाओं से रक्तदान की अपील भी कर रहा है। मौजूदा समय में सबसे ज्यादा परेशानी नेगेटिव ब्लड ग्रुप के मरीजों को हो रही है। एक एक यूनिट खून के लिए उनके परिजनों को इस अस्पताल से उस अस्पताल के ब्लड बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख प्रोफेसर रतिराम शर्मा ने बताया कि थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया व ट्रामा के मरीजों के लिए खून की बहुत जरूरत पड़ती है। ऐसे में सामान्य दिनों में पीजीआई से 500 से 800 यूनिट खून मरीजों के लिए दिया जाता है उसकी संख्या घटकर 200 से 300 यूनिट पर आ गई है। ऐसे में जरूरी है कि लोग मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान शिविर और पीजीआई में आकर रक्तदान करें।
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इनसेट
ब्लड ग्रुप और उसकी उपलब्धता
ओ पॉजिटिव- 32.53 प्रतिशत
ओ निगेटिव- 2.03 प्रतिशत
ए पॉजिटिव- 21.8 प्रतिशत
ए निगेटिव- 1.36 प्रतिशत
बी पॉजिटिव- 32.09 प्रतिशत
बी निगेटिव- 2.01 प्रतिशत
एबी पॉजिटिव- 7.7 प्रतिशत
एबी निगेटिव- 0.48 प्रतिशत
इनसेट
कीजिए रक्तदान नहीं होगा नुकसान
- रक्तदान करने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है। क्योंकि रक्तदान से खून का थक्का नहीं जमता, इससे खून कुछ मात्रा में पतला हो जाता है।
- रक्तदान से वजन कम करने में मदद मिलती है। इसीलिए हर साल कम से कम 2 बार रक्तदान करना चाहिए।
- रक्तदान से शरीर में ऊर्जा आती है। क्योंकि उसके बाद नए ब्लड सेल्स बनते हैं, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है।
- रक्तदान से लिवर से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। शरीर में ज्यादा आइरन की मात्रा लिवर पर दवाब डालती है और रक्तदान से आइरन की मात्रा संतुल6 हो जाती है।
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- आयरन की मात्रा संतुलित होने से लिवर स्वस्थ बनता है और कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।
कोट-
रक्तदान से किसी तरह की शारीरिक व मानसिक कमजोरी नहीं आती है। मौजूदा समय में महामारी और ठंड के कारण रक्त दाताओं की संख्या बेहद कम हो गई है। ऐसे में जरूरी है कि युवा वर्ग आगे आए और ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्त दान करें, ताकि मरीजों का इलाज प्रभावित न हो सके।
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-प्रो. रतिराम शर्मा, पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के प्रमुख
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