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Chandigarh News: जिस शहर में सफाईकर्मी थे, उसी के प्रथम नागरिक बने कुलदीप

Wed, 21 Feb 2024 03:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Feb 2024 03:22 AM IST
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Kuldeep became the first citizen of the city where there were sweepers.
चंडीगढ़। लोकतंत्र की इससे बड़ी खूबसूरती क्या हो सकती है कि एक मामूली सफाई कर्मचारी, उसी शहर का प्रथम नागरिक यानी मेयर बन गया। शहर के नए मेयर कुलदीप कुमार ने वर्ष 2018 में बतौर सफाई कर्मचारी चंडीगढ़ नगर निगम में काम किया। अब वह नगर निगम के ही भवन में मेयर की कुर्सी संभालेंगे। मंगलवार मेयर कुलदीप कुमार के लिए दोहरी खुशी का दिन रहा। आज के दिन देश की शीर्ष अदालत के आदेश पर वह जहां शहर मेयर बने, वहीं आज उनकी शादी की 17वीं सालगिरह थी। उन्होंने कहा कि वह बहुत भाग्यशाली हैं कि मेयर की कुर्सी उन्हें शादी की सालगिरह के दिन मिली।
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अनुसूचित जाति से आने वाले कुलदीप कुमार को जब 30 जनवरी को मेयर चुनाव में हारा हुआ घोषित किया गया था तो वह रो पड़े थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 21 दिन तक अदालत में लड़ाई लड़ी। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए और आखिरकार जीतकर दोबारा मेयर की कुर्सी पर बैठे। कुलदीप कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 से 2019 तक उन्होंने नगर निगम में बतौर सफाई कर्मचारी काम किया। कुलदीप अब टेंट का काम करते हैं। मंगलवार को शादी की सालगिरह के बावजूद वह पूरे दिन पार्टी के नेताओं व पार्षदों से घिरे रहे। देर रात में घर पहुंचे। कुलदीप के मेयर बनने पर उनकी पत्नी ममता बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंगलवार का दिन दोहरी खुशी लेकर आया। कुलदीप एक सामान्य परिवार से आते हैं। उनके दो बच्चे हैं, जिनके नाम आदित्य और उमंग हैं।
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12वीं पास हैं कुलदीप, दोस्त बुलाते हैं टीटा
कुलदीप कुमार ने पंजाब बोर्ड से 2005 में 12वीं की परीक्षा पास की थी। चुनावी शपथपत्र में भी इसका जिक्र है। 40 साल के कुलदीप सिंह को उनके दोस्त टीटा कहकर भी बुलाते हैं। वह राजनीति में आने वाले अपने परिवार से पहले शख्स हैं। कुलदीप सिंह के पिता का नाम रायत पाल है। चुनावी शपथपत्र के अनुसार, कुलदीप सालाना 4.80 लाख रुपये कमाते हैं।
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डंपिंग ग्राउंड के एकदम पास है कुलदीप का घर, रोजाना झेलते हैं बदबू
डड्डूमाजरा में रहने वाले कुलदीप का घर डंपिंग ग्राउंड के बिल्कुल पास है। वह और उनका पूरा परिवार पिछले कई वर्षों से डंपिंग ग्राउंड की बदबू झेल रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर बनने के बाद पहली प्राथमिकता लोगों को डंपिंग ग्राउंड से निजात दिलाना है। कहा कि सदन में पिछले दो साल से कई बार डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा उठा चुके हैं। कई बार प्रदर्शन भी किया है। अब मेयर बनने के बाद आवाज को और मजबूती मिलेगी और कोशिश रहेगी कि अपने कार्यकाल में ही डंपिंग ग्राउंड को खत्म किया जाए।


काम करने को मिलेंगे करीब छह से सात ही महीने
कुलदीप भले शहर के मेयर बन चुके हैं लेकिन उन्हें यह कुर्सी दूसरे महीने के आखिरी दिनों में मिली है। सामान्य तौर पर मेयर जनवरी के पहले या दूसरे हफ्ते में बन जाते हैं लेकिन कुलदीप को बतौर मेयर कार्य करने के लिए कम महीने मिलेंगे। इसके अलावा आने वाले दिनों में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भी आचार संहिता लग जाएगी। वह मेयर रहेंगे लेकिन बड़ी घोषणाएं नहीं कर सकेंगे। माना जा रहा है कि उसमें भी करीब दो महीने निकल जाएंगे। ऐसे में कुलदीप को काम करने के लिए छह से सात महीने ही मिलेंगे।
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