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Chandigarh News: कृष्ण पक्ष अमावस्या आज, नांदी मुख श्राद्ध का विशेष महत्व
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चंडीगढ़। श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। अमावस्या के देवता पितृ होते हैं इसलिए इसमें पितरों की पूजन का विशेष महत्व होता है। इसे हरियाली अमावस्या इसलिए कहते हैं क्योंकि सावन में हर ओर हरियाली होती है। खेत हरे-भरे होते हैं।
श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को नांदी मुख श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस श्राद्ध में केवल गोत्र का उच्चारण होता है। नाम का उच्चारण नहीं होता है। यह जानकारी सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने दी।
उन्होंने कहा कि अमावस्या तिथि का प्रारंभ बुधवार की रात को 2 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा। यह वीरवार की रात्रि 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। इसमें विश्वेदेव का पूजन होता है। उन्होंने कहा कि कोई भी शुभ कार्य जिसमें शादी विवाह, यज्ञ आदि में नांदी मुख श्राद्ध अवश्य किया जाता है। यदि काेई पितृ दोष से ग्रसित है या किसी को अकाल मृत्यु से घर में अशांति है तो उसे नांदी मुख श्राद्ध करना चाहिए।
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पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि सावन मास भगवान शिव का महीना है। श्रावण मास में त्रिपिंडी श्राद्ध विशेष रूप से किया जाता है। यदि सावन में यह संभव नहीं है तो किसी अन्य महीने में कर सकते हैं। इस श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं। इस श्राद्ध को दोपहर में किया जाता है।
नांदीमुख श्राद्ध करने का यह है लाभ ...
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस श्राद्ध को करने से सभी तरह के मांगलिक कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। जातक को सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। सभी तरह के पितृदोष, देव दोष, सर्प दोष आदि दूर हो जाते हैं। जीवन की समस्याओं का निदान होता है। पितरों को शांति मिलती हैं। वे सद्गति को प्राप्त होते हैं।
श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को नांदी मुख श्राद्ध का विशेष महत्व है। इस श्राद्ध में केवल गोत्र का उच्चारण होता है। नाम का उच्चारण नहीं होता है। यह जानकारी सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने दी।
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उन्होंने कहा कि अमावस्या तिथि का प्रारंभ बुधवार की रात को 2 बजकर 29 मिनट से शुरू होगा। यह वीरवार की रात्रि 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। इसमें विश्वेदेव का पूजन होता है। उन्होंने कहा कि कोई भी शुभ कार्य जिसमें शादी विवाह, यज्ञ आदि में नांदी मुख श्राद्ध अवश्य किया जाता है। यदि काेई पितृ दोष से ग्रसित है या किसी को अकाल मृत्यु से घर में अशांति है तो उसे नांदी मुख श्राद्ध करना चाहिए।
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पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि सावन मास भगवान शिव का महीना है। श्रावण मास में त्रिपिंडी श्राद्ध विशेष रूप से किया जाता है। यदि सावन में यह संभव नहीं है तो किसी अन्य महीने में कर सकते हैं। इस श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं। इस श्राद्ध को दोपहर में किया जाता है।
नांदीमुख श्राद्ध करने का यह है लाभ ...
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस श्राद्ध को करने से सभी तरह के मांगलिक कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं। जातक को सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। सभी तरह के पितृदोष, देव दोष, सर्प दोष आदि दूर हो जाते हैं। जीवन की समस्याओं का निदान होता है। पितरों को शांति मिलती हैं। वे सद्गति को प्राप्त होते हैं।