'सियासी लोग हैं नशे के काले कारोबार के आका'
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अमर उजाला के लिए लिखे इस विशेष आलेख में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल कहते हैं कि पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद की कमर टूटने के बाद पाकिस्तान ने ड्रग्स को अपना मुख्य हथियार बनाया।
केपीएस गिल कहते हैं कि मेरे देखे पंजाब में नशे की नाश लीला दो वजहों से जारी है। एक, राज्य में इस काले कारोबार के सियासी आका और उनके तस्कर प्यादे कानून की पकड़ से बाहर बने हुए हैं। दूसरे, बार्डर के उस पार दहशत की सरपरस्त आईएसआई है जिसने यह ठान रखा है कि पंजाब को टुकड़े-टुकड़े करने के लिए ड्रग इंडस्ट्री के शैतानों के सिर पर अपना वरदहस्त बनाए रखना है।
सच तो यह है कि पंजाब में आतंकवाद के वर्षों के दौरान ही नारको-आतंकवाद पाकिस्तानी रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा था। खालिस्तानी आतंकवाद के ध्वस्त होने के साथ ही नशा तस्करी में भी एक खामोशी सी आ गई थी।
लेकिन फिर मानो पाकिस्तान ने अपनी स्टेट पॉलिसी के तहत ड्रग्स को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला लिया। अब अफगानिस्तान में उगाई जाने वाली अफीम का उपयोग करके पाकिस्तान स्थित फैक्टिरियों में बड़ी मात्रा में हेरोइन का उत्पादन किया जा रहा है।
खालिस्तानियों को मिल रहा आईएसआई का समर्थन
खास बात यह है कि भारत में दो दशक पहले आतंकवाद की कमर तोड़े जाने के बावजूद बिखरे और खिसियाए खालिस्तानियों को आईएसआई का समर्थन जारी रहा है।
आतंकवाद को आम लोगों की सपोर्ट न मिलने के कारण मोटे तौर पर ये लोग नाकामयाब ही रहे हैं लेकिन कुछ मौकों पर दहशत के ये हरकारे मामूली तौर पर कामयाब भी हुए हैं।
16 मई, 2010 को बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के मक्खन सिंह उर्फ अमली और करणबीर सिंह ने माईदास निर्माली डेरे के धार्मिक नेता संत प्रधान सिंह पर सिख विरोधी प्रचार करने का आरोप लगाते हुए उनकी हत्या कर दी।
इस वारदात में इस्तेमाल की गई एके-47 राइफल पाकिस्तान से तस्करी कर लाई गई थी, जिसे करणबीर सिंह के कब्जे से बरामद किया गया था।
विदेशों में बैठी फोर्स खालिस्तानियों को सहयोग
28 जुलाई, 2009 को खालिस्तानी आतंकी मक्खन सिंह, बलबीर सिंह उर्फ भूतना और उनके साथियों ने मानसा जिले के आलमपुर मंदरा गांव में डेरा सच्चा सौदा के एक अनुयायी लिली कुमार की हत्या कर दी।
आतंकियों ने यह वारदात पाकिस्तान में बैठे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख रणजीत सिंह नीटा और जर्मनी में छिपे इसी संगठन के भूपिंदर सिंह भिंडा के इशारे पर की थी। 28 जुलाई, 2009 को राष्ट्रीय सिख संगत पंजाब के अध्यक्ष रुलदा सिंह की पटियाला में हत्या कर दी गई।
यह वारदात ब्रिटेन में बसे दो सिख युवकों- गुरशरणबीर सिंह और प्यारा सिंह गिल ने की थी। माना जाता है कि इस वारदात के पीछे, मलेशिया में बैठे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू, पाकिस्तान में बैठे बीकेआई के वधवा सिंह और ब्रिटेन में छिपे बीकेआई के ही परमजीत सिंह उर्फ पम्मा का हाथ था।
एक अन्य वारदात 14 अक्तूबर, 2007 को लुधियाना के शिंगार सिनेमा में हुए बम धमाके की हुई, जिसमें छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई जबकि 35 अन्य घायल हो गए थे।
सीमा पर से होती रहती है घुसपैठ
हाल के वर्षों में लगातार गिरफ्तारियों, हथियार व गोला बारूद की जब्तगी और सीमापार से घुसपैठ पर नियमित नजर बनी रहने के कारण खालिस्तानी आतंकी हिंसा में जानी नुकसान काफी कम हो गया है।
सबसे करीबी घटना 18 मार्च 2014 की है, जिसमें बीकेआई के तीन प्रमुख सदस्यों गुरदीप सिंह, अमरदीप सिंह और जसवीर सिंह सहित छह लोग, जोकि अपने पिछले मामलों में जारी केसों में जमानत पर थे, को पुलिस ने हथियार व गोला बारूद समेत गिरफ्तार कर लिया गया।
इन सभी के खिलाफ, राज्य में आतंकवाद को फिर से उभारने का षड्यंत्र रचने और उत्तर प्रदेश-नेपाल के रास्ते हथियार पंजाब में पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। बीते वर्षों में पुलिस ने ऐसी ही दर्जनों गिरफ्तारियां और हथियारों की बरामदगी की है।
पाकिस्तान देता है खालिस्तानियों को शरण
खास बात यह है कि पाकिस्तान की ओर से लगातार शीर्ष खालिस्तानी नेतृत्व और उसके बचे कैडर को अपनी भूमि पर शरण और दी जा रही है और वह इनसे दुनिया भर में सहानुभूति रखने वाले लोगों को जोड़ने में सहयोग कर रहा है ताकि जब कभी भारतीय पंजाब में आतंकवाद पनपे तो वह इन्हें फिर से यहां भेज सके।
इस आतंकवादी कमांडरों में मुख्य रूप से बीकेआई के वधवा सिंह, केजेडीएफ के रणजीत सिंह नीटा, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के लखबीर सिंह रोडे, दल खालसा इंटरनेशनल का गजिंदर सिंह हाईजैकर, खालिस्तान कंमाडो फोर्स का परमजीत सिंह पंजवड़ और खालिस्तान टाइगर फोर्स का जगतार सिंह तारा शामिल हैं।
आईएसआई दिलाता है खालिस्तानियों को मान्यताएं
इन शीर्ष आतंकवादी नेताओं को सुरक्षित शरण देने के साथ ही आईएसआई इस संगठनों की गतिविधियों को विश्व भर में संचालित करने और मान्यता दिलाने के लिए सुविधा भी दे रही है।
इस पूरे परिदृश्य में यह भी महत्वपूर्ण है कि काउंसिल ऑफ खालिस्तान लंबे अरसे से पाकिस्तान में स्थायी तौर पर कायम है, जिसका प्रतिनिधित्व संगठन का ‘महासचिव’ बलबीर सिंह संधू कर रहा है।
भारत छोड़कर जा चुके सिखों से संपर्क, समन्वय और भरती के उद्देश्य से दुनिया भर में आईएसआई द्वारा पाकिस्तानी दूतावासों और वहां के अधिकारियों के जरिए उन्हें समर्थन और सहयोग दिया जा रहा है।
इन अप्रवासी सिख धड़ों में अमेरिका स्थित काउंसिल ऑफ खालिस्तान, वाशिंगटन डीसी स्थित खालिस्तान अफेयर्स सेंटर, अमेरिका स्थित सिख यूथ, जिनकी कैलिफोर्निया में काफी अच्छी स्थिति है, के अलावा अमेरिकन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, दल खालसा इंटरनेशनल यूएसए, दि ननकाना साहिब फाउंडेशन ट्रस्ट, वर्ल्ड सिख आर्गेनाइजेशन, कामागाटा मारू दल आफ खालिस्थान और सिख यूथ आफ बेल्जियम शामिल हैं। इनके साथ ही यूरोप, अमेरिका और कनाडा में भी इस प्रकार केकई संगठन सक्रिय हैं।