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कोहली की खुली पैरवी से सिख भावनाएं आहत: प्रो. सरचांद सिंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। सिख चिंतक और पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने 328 पावन स्वरूपों के मामले में गिरफ्तार सतिंदर सिंह कोहली की खुलेआम पैरवी को सिख भावनाओं पर गहरी चोट बताया है। उन्होंने कहा कि केवल सुखबीर सिंह बादल का करीबी होने के कारण कोहली को बचाने के प्रयास शर्मनाक हैं और यह कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
प्रो. ख्याला ने कहा कि वर्ष 2020 में ईशर सिंह कमेटी की रिपोर्ट में पावन स्वरूपों की कमी सामने आने के बावजूद एसजीपीसी पांच साल बाद भी यह नहीं बता सकी कि ये स्वरूप कहां गए। हाल ही में अकाल तख्त साहिब से प्रचार के माध्यम से स्वरूपों की तलाश का आदेश इस बात का प्रमाण है कि एसजीपीसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिरोमणि कमेटी और बादल नेतृत्व पंथक जिम्मेदारियों से भटक चुके हैं और सिख संगत का भरोसा खो चुके हैं। प्रो. ख्याला ने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 के तहत एसजीपीसी कानून से ऊपर नहीं है और यह मामला न्यायालय के प्रति पूर्ण रूप से जवाबदेह है।
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अमृतसर। सिख चिंतक और पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने 328 पावन स्वरूपों के मामले में गिरफ्तार सतिंदर सिंह कोहली की खुलेआम पैरवी को सिख भावनाओं पर गहरी चोट बताया है। उन्होंने कहा कि केवल सुखबीर सिंह बादल का करीबी होने के कारण कोहली को बचाने के प्रयास शर्मनाक हैं और यह कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।
प्रो. ख्याला ने कहा कि वर्ष 2020 में ईशर सिंह कमेटी की रिपोर्ट में पावन स्वरूपों की कमी सामने आने के बावजूद एसजीपीसी पांच साल बाद भी यह नहीं बता सकी कि ये स्वरूप कहां गए। हाल ही में अकाल तख्त साहिब से प्रचार के माध्यम से स्वरूपों की तलाश का आदेश इस बात का प्रमाण है कि एसजीपीसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिरोमणि कमेटी और बादल नेतृत्व पंथक जिम्मेदारियों से भटक चुके हैं और सिख संगत का भरोसा खो चुके हैं। प्रो. ख्याला ने स्पष्ट किया कि गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 के तहत एसजीपीसी कानून से ऊपर नहीं है और यह मामला न्यायालय के प्रति पूर्ण रूप से जवाबदेह है।
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