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Sarbat Khalsa: क्या होता है सरबत खालसा, जिसे बैसाखी पर बुलाने की मांग कर रहा है अमृतपाल

Fri, 31 Mar 2023 02:43 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 31 Mar 2023 02:43 PM IST
सार

सरबत खालसा की शुरुआत मुगलों के खिलाफ सिखों के संघर्ष के बीच हुई। पहले सरबत खालसा का आयोजन साल में दो बार बैैसाखी और दीवाली पर किया जाता था। महाराजा रणजीत सिंह ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया था।

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Know what is Sarbat Khalsa which is demanded by Amritpal Singh
क्या होता है सरबत खालसा। - फोटो : फाइल

विस्तार

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को ढूंढने में पूरे पंजाब की पुलिस दिन रात एक किए हुए है। वहीं 18 मार्च से फरार हुआ अमृतपाल कभी वीडियो तो कभी ऑडियो जारी कर पुलिस और प्रशासन को चुनौती दे रहा है। दो दिन में सामने आए दो वीडियो में अमृतपाल ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार से उसके मुद्दे पर सरबत खालसा बुलाने की मांग की है। वीडियो में उसने जत्थेदार से कहा है कि बैसाखी पर सरबत खालसा बुलाकर अपने जत्थेदार होने का सबूत दें। क्या होता है सरबत खालसा और सिख धर्म में उसका क्या महत्व है। 

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क्या होता है सरबत खालसा

सरबत खालसा असल में एक ऐसी सभा या बैठक होती है, जिसमें पूरे विश्व के सिख संगठनों को आमंत्रित किया जाता है। इसमें कौम के सामने खड़े हुए कुछ ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होती है और फिर एक फैसला लिया जाता है। ये फैसला आम राय के विरुद्ध भी हो सकता है लेकिन वह सभी के लिए स्वीकार्य होता है। सरबत का मतलब सभी और खालसा का मतलब सिख होता है। ऐसे में सरबत खालसा का मतलब है सभी सिखों की सभा। 

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1708 में पहली बार बुलाया गया था सरबत खालसा 

जानकारी के अनुसार, सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की सिख मिसल ने 1708 में पहली बार सरबत खालसा बुलाया था। इसके बाद कई बार अलग-अलग मुद्दों पर सरबत खालसा बुलाया गया। 1805 में सिख साम्राज्य के महाराजा रणजीत सिंह ने सरबत खालसा बुलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 1986 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद दोबारा सरबत खालसा बुलाया गया था। इसके बाद नवंबर 2015 में सरबत खालसा बुलाया गया था। इसे शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने बुलाया था।  

किसे है अधिकार
सरबत खालसा बुलाने का अधिकार सिर्फ श्री अकाल तख्त साहिब को ही है। श्री अकाल तख्त साहिब को सिखों की सर्वोच्च संस्था माना जाता है। इसके जत्थेदार को ही अधिकार होता है कि वह सरबत खालसा बुला सकता है।

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