Amritpal Singh: क्या इस वजह से अमृतपाल ने किया आत्मसमर्पण? पंजाब पुलिस जोड़ने लगी कड़ियां
पुलिस का कहना है कि अमृतपाल ने पीलीभीत, सपरोड, साहनेवाल और नदलोल स्थित गुरुद्वारों में भी शरण ली। उसकी तलाश में पंजाब पुलिस ने पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल से सटे इलाकों में अभियान चलाया लेकिन सफलता नहीं मिली। मगर रविवार को उसे मोगा के गांव रोडे से पकड़ लिया गया।
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पंजाब पुलिस को 36 दिन तक चकमा देता रहा खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह रविवार को पकड़ा गया। पंजाब में 18 मार्च को शुरू हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान फरार होने के बाद से अमृतपाल एक से दूसरे शहर में भागता रहा लेकिन पुलिस के हाथ नहीं आया। 10 अप्रैल को अमृतसर के कत्थूनंगल से पपलप्रीत सिंह के पकड़े जाने के बाद अमृतपाल अकेला पड़ गया। उसके लिए छिपने के ठिकाने और पैसों के लाले पड़ गए थे। पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल का कहना है कि इन हालात में 10 अप्रैल से रविवार को पकड़े जाने तक (13 दिन) अमृतपाल कहां छिपा रहा, इसके बारे में पुलिस जल्द ही खुलासा करेगी।
फिलहाल पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस से बचते हुए अमृतपाल को अपने सबसे करीबी साथी पपलप्रीत सिंह का सहयोग मिला, जो भागमभाग के पूरे रास्ते में न सिर्फ अमृतपाल के लिए छिपने के ठिकाने मुहैया कराता रहा बल्कि अमृतपाल को पैसों की मदद भी करता रहा। 10 अप्रैल को पुलिस ने पपलप्रीत को पकड़ लिया। इसके बाद अमृतपाल न तो कहीं दिखाई दिया और न ही पुलिस के हाथ उसके बारे में कोई सुराग लगा। इससे पहले एक महीने तक अमृतपाल को कई जगहों पर देखा गया।
18 मार्च की रात वह लुधियाना पहुंचा और शेखपुरा गुरुद्वारे में कुछ देर रुकने के बाद वहां से एक स्कूटी पर रात करीब 9:30 बजे निकल गया। उस समय पपलप्रीत उसके साथ था। 20 मार्च को अमृतपाल कुरुक्षेत्र में एक महिला के घर पहुंचा, जो पपलप्रीत की जानकार थी और उसके कहने पर ही महिला ने अमृतपाल को शरण दी। बाद में इस महिला को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
वह बार-बार अपनी लोकेशन बदलता रहा। उसे पटियाला और कई अन्य स्थानों पर भी देखा गया। कई बार पुलिस उसके करीब पहुंची लेकिन वह बच निकलने में कामयाब रहा। उसे तलाश कर रही पुलिस ने एक बार अमृतपाल को मर्सिडीज कार में भागते देखा। एक बार उसे अपने चार समर्थकों के साथ मोटरसाइकिलों पर भागते देखा गया। अमृतपाल के काफिले को एक पुलिस चेक प्वाइंट पर भी रोका गया लेकिन वह भाग निकलने में सफल रहा।
पुलिस का कहना है कि अमृतपाल ने पीलीभीत, सपरोड, साहनेवाल और नदलोल स्थित गुरुद्वारों में भी शरण ली। उसकी तलाश में पंजाब पुलिस ने पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल से सटे इलाकों में अभियान चलाया लेकिन सफलता नहीं मिली।
पपलप्रीत की गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल के पास छिपने का कोई ठिकाना नहीं रहा और उस तक आर्थिक मदद पहुंचनी भी बंद हो गई। 29 मार्च को उसने एक वीडियो जारी कर आत्मसमर्पण का इरादा जाहिर किया लेकिन यह काम भी वह किसी हीरो की तरह करना चाहता था। अमृतपाल ने इसके लिए श्री अकाल तख्त के जत्थेदार से सरबत खालसा बुलाने की मांग की लेकिन सफलता नहीं मिली। तब पुलिस ने मान लिया कि अमृतपाल बैसाखी पर 14 अप्रैल को किसी बड़े गुरुद्वारे में संगत के सामने आत्मसमर्पण करने की तैयारी कर रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बठिंडा में तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब समेत राज्य के सभी प्रमुख गुरुद्वारों पर निगरानी शुरू की तो अमृतपाल 22 अप्रैल की रात गांव रोडे पहुंचा, जहां रविवार सुबह पुलिस ने उसे पकड़ लिया।