{"_id":"64be0126ca45c77cbc02f0c4","slug":"know-history-of-mata-mansa-devi-temple-of-panchkula-2023-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचकूला का मनसा देवी मंदिर: 208 साल पुराने मंदिर में मांगी हर कामना होती है पूरी, बेहद खास है इसका इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचकूला का मनसा देवी मंदिर: 208 साल पुराने मंदिर में मांगी हर कामना होती है पूरी, बेहद खास है इसका इतिहास
Mon, 24 Jul 2023 10:12 AM IST
निवेदिता वर्मा
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 24 Jul 2023 10:12 AM IST
सार
माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर 1815 में पूर्ण करवाया था। इसके निर्माण में चार साल लगे थे। मनसा देवी के मुख्य मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का रूप ही माना जाता है।
विज्ञापन
मनसा देवी मंदिर पंचकूला
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंचकूला का माता मनसा देवी मंदिर बेहद खास है। इस मंदिर का इतिहास बड़ा ही प्रभावशाली है। माता मनसा देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में मेला लगता है। जिसके चलते यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। यहां लोग माता से अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए आशीर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि माता मनसा देवी से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती है।
विज्ञापन
मंदिर तक आती थी 3 किमी लम्बी गुफा
कहा जाता है कि जिस जगह पर आज मां मनसा देवी का मंदिर है, यहां पर सती माता के मस्तक का आगे का हिस्सा गिरा था। मनसा देवी का मंदिर पहले मां सती के मंदिर के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि मनीमाजरा के राजा गोपालदास ने अपने किले से मंदिर तक एक गुफा बनाई हुई थी, जो लगभग 3 किलोमीटर लंबी है। वे रोज इसी गुफा से मां सती के दर्शन के लिए अपनी रानी के साथ जाते थे। जब तक राजा दर्शन नहीं करते थे, तब तक मंदिर के कपाट नहीं खोले जाते थे।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: सिसवां डैम: चंडीगढ़ के पास है ये बेहतरीन पर्यटन स्थल, ले सकते हैं नेचुरल हट में रहने और ट्रैकिंग का मजा
विज्ञापन
208 साल पहले बना था मंदिर
माता मनसा देवी का इतिहास उतना ही प्राचीन है, जितना कि अन्य सिद्ध शक्तिपीठों का। माता मनसा देवी के सिद्ध शक्तिपीठ पर बने मंदिर का निर्माण मनीमाजरा के राजा गोपाल सिंह ने अपनी मनोकामना पूरी होने पर 1815 में पूर्ण करवाया था। इसके निर्माण में चार साल लगे थे।
मनसा देवी के मुख्य मंदिर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का रूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी और सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णों देवी, भैरव की मूर्तियां एवं शिवलिंग स्थापित है। 9 सितम्बर 1991 को हरियाणा सरकार ने माता मनसा देवी पूजा स्थल बोर्ड का गठन करके मनसा देवी परिसर को अपने हाथ में ले लिया था।