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आज भी पुराने गाने ही सुनते हैं अमित कुमार
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 08 Dec 2013 11:02 AM IST
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‘मैं अभी भी पिता जी के ही पुराने गीतों को सुनता हूं। मुझे नया और आजकल का संगीत कुछ खास पसंद नहीं है। मैं आज भी कीपैड की जगह हारमोनियम को ही सुनता हूं।’ ये कहना है महान गायक किशोर कुमार के बेटे और गायक अमित कुमार का।
सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू में बातचीत के दौरान उन्होंने संगीत के बदलते दौर पर चर्चा की। रविवार को पीजीआई के भार्गव ऑडिटोरियम में आयोजित संगीत कार्यक्रम में वह बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट शिरकत करेंगे।
इस दौरान वे लोगों को अपने गीत भी सुनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्तुति के दौरान वह अपने पसंदीदा गीत ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ और ‘नदिया से गहरा’ जरूर गाएंगे। इन गीतों को वे अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं।
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अमित कुमार ने कहा कि आज का संगीत काफी बदल चुका है। आजकल सब एक ही तरफ चल रहे हैं और दर्शकों को कुछ नया नहीं मिल रहा। पहले हर गायक और संगीतकार का एक अलग स्टाइल होता था।
आजकल तो इतना बुरा दौर आ चुका है कि म्यूजिक इंडस्ट्री को रिंगटोन से कमाई पर निर्भर रहना पड़ रहा है जो शर्म की बात है।
हमने खुद संगीत खराब किया है
अमित कुमार का मानना है कि संगीत गलत रास्ते की तरफ चल रहा है। अब गीत के लफ्जों की कोई अहमियत नहीं रही है और लचर शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है।
सुनने वालों ने नहीं बल्कि संगीत खराब हमने ही किया है। जैसा भी संगीत हम तैयार करेंगे, लोग वह सुनेंगे। बाद में लोगों को इसकी आदत पड़ जाती है। आजकल गीतों में मेलॉडी और हार्मनी को भुलाया जा रहा है।
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सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू में बातचीत के दौरान उन्होंने संगीत के बदलते दौर पर चर्चा की। रविवार को पीजीआई के भार्गव ऑडिटोरियम में आयोजित संगीत कार्यक्रम में वह बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट शिरकत करेंगे।
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इस दौरान वे लोगों को अपने गीत भी सुनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्तुति के दौरान वह अपने पसंदीदा गीत ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ और ‘नदिया से गहरा’ जरूर गाएंगे। इन गीतों को वे अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं।
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अमित कुमार ने कहा कि आज का संगीत काफी बदल चुका है। आजकल सब एक ही तरफ चल रहे हैं और दर्शकों को कुछ नया नहीं मिल रहा। पहले हर गायक और संगीतकार का एक अलग स्टाइल होता था।
आजकल तो इतना बुरा दौर आ चुका है कि म्यूजिक इंडस्ट्री को रिंगटोन से कमाई पर निर्भर रहना पड़ रहा है जो शर्म की बात है।
हमने खुद संगीत खराब किया है
अमित कुमार का मानना है कि संगीत गलत रास्ते की तरफ चल रहा है। अब गीत के लफ्जों की कोई अहमियत नहीं रही है और लचर शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है।
सुनने वालों ने नहीं बल्कि संगीत खराब हमने ही किया है। जैसा भी संगीत हम तैयार करेंगे, लोग वह सुनेंगे। बाद में लोगों को इसकी आदत पड़ जाती है। आजकल गीतों में मेलॉडी और हार्मनी को भुलाया जा रहा है।