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पंजाब: किसान संघर्ष कमेटी ने डीसी ऑफिस घेरा, पंधेर बोले- मांगें नहीं मानी तो 30 सितंबर से जाम करेंगे रेल ट्रैक
Tue, 28 Sep 2021 10:02 PM IST
Trainee Trainee
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर/जालंधर, फिरोजपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर/जालंधर, फिरोजपुर
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 28 Sep 2021 10:02 PM IST
सार
पंजाब में कृषि कानूनों के विरोध में मंगलवार को कई जगह प्रदर्शन किए गए। किसान संघर्ष कमेटी ने अमृतसर, जालंधर और फिरोजपुर में धरना देकर डीसी ऑफिस घेराव किया। किसान नेता पंधेर बोले कि सरकार मांगें नहीं मानती तो 30 को ट्रैक जाम किए जाएंगे। किसान किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
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प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
अमृतसर में किसान संघर्ष कमेटी की ओर से मंगलवार सुबह डीसी गुरप्रीत सिंह खैहरा के दफ्तर का घेराव किया गया। घेराव का मोर्चा इस बार कमेटी की महिलाओं ने संभाला। किसान संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता सरवन सिंह पंधेर के नेतृत्व में यह धरना एक अक्तूबर तक चलेगा। डीसी दफ्तर का घेराव करने के लिए छोटे-छोटे ग्रुप में महिलाएं पहुंचीं और देखते ही देखते डीसी ऑफिस परिसर में तंबू गाड़ दिए। पंधेर ने कहा कि किसानों का यह धरना केंद्र सरकार की तरफ से पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए है।
इसके अलावा पंजाब सरकार की ओर से गन्ने की बकाया राशि जारी करने और किसान मोर्चे में शहीद किसानों के परिवारों में एक-एक को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए शुरू किया है। इसके अलावा धान की खरीद तुरंत किए जाने की भी मांग की। पंधेर ने कहा कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार किसानों की मांगों पर गंभीर नहीं है। अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तो किसान दो दिन मंगलवार और बुधवार को डीसी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 30 सितंबर को रेलवे ट्रैक पर धरना देकर जाम लगाएंगे। मौके पर किसानों ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए।
यह पढ़ें: पंजाब कांग्रेस का घमासान: सिद्धू 72 दिन के प्रदेश अध्यक्ष, लिखा- पंजाब के भविष्य से समझौता नहीं करूंगा
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जालंधर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना
जालंधर में किसानों को कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन करते हुए 10 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा कानून वापस न लिए जाने से नाराज किसानों ने संघर्ष तेज कर दिया है। इसी क्रम में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने जालंधर के डीसी दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत कर दी है। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें न मानी गई तो आगे संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस धरने के दौरान किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जिला प्रधान सलविंदर सिंह ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग है कि मोदी सरकार तीनों कृषि सुधार कानून रद्द करे। इसके अलावा किसान लंबे समय से सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं व दिल्ली संघर्ष में कईं किसान मारे भी गए हैं।
जो किसान मारे गए, उनके परिजनों को मिले नौकरी
उनकी मांग है कि मारे गए किसान और मजदूरों के परिवारों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने मारे गए किसानों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने व उसका पूरा कर्ज माफ करने की मांग की। इसके अलावा 23 फसलों की खरीद की गारंटी वाला कानून बनाने व पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने की मांग भी उठाई गई। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी न की गई तो संगठन जल्द ही अगले बड़े संघर्ष की घोषणा करेगा।
यह भी पढ़ें: अमर उजाला विश्लेषण: न सिद्धू मिले-न अमरिंदर रुके, कांग्रेस के लिए दुविधा में दोनों गए, अब आगे क्या?
फिरोजपुर में 30 से ट्रेन रोकने की चेतावनी
फिरोजपुर में तीनों कृषि कानून रद्द कराने को लेकर किसान जत्थेबंदियां पक्के तौर पर डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के समक्ष धरने पर बैठ गई हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गई तो तीस सितंबर से ट्रेन रोकेंगे। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता जसबीर सिंह व इंद्रजीत सिंह बाठ ने कहा कि मंगलवार से किसान डीसी दफ्तर के समक्ष पक्के तौर पर धरना लगाकर बैठ गए हैं। तीनों कृषि कानून रद्द किए जाएं। धान बेचने पर लगाई गई शर्तें हटाई जाए।
पांच लाख रुपये तक मिले मुआवजा
दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के अलावा उनके परिवार पर जो कर्जा है, उसे माफ किया जाए। किसानों को उक्त मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो तीस सितंबर से किसान रेल यातायात ठप कर देंगे और वहीं पर पक्के तौर पर धरना देंगे। इस मौके पर किसान नेता सुरेंद्र सिंह, बलविंदर सिंह, बलराज सिंह, अमनदीप सिंह, लखविंदर सिंह व विक्रमजीत सिंह आदि मौजूद थे।
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इसके अलावा पंजाब सरकार की ओर से गन्ने की बकाया राशि जारी करने और किसान मोर्चे में शहीद किसानों के परिवारों में एक-एक को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए शुरू किया है। इसके अलावा धान की खरीद तुरंत किए जाने की भी मांग की। पंधेर ने कहा कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार किसानों की मांगों पर गंभीर नहीं है। अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तो किसान दो दिन मंगलवार और बुधवार को डीसी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 30 सितंबर को रेलवे ट्रैक पर धरना देकर जाम लगाएंगे। मौके पर किसानों ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए।
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जालंधर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना
जालंधर में किसानों को कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन करते हुए 10 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा कानून वापस न लिए जाने से नाराज किसानों ने संघर्ष तेज कर दिया है। इसी क्रम में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने जालंधर के डीसी दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत कर दी है। किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें न मानी गई तो आगे संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस धरने के दौरान किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जिला प्रधान सलविंदर सिंह ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग है कि मोदी सरकार तीनों कृषि सुधार कानून रद्द करे। इसके अलावा किसान लंबे समय से सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं व दिल्ली संघर्ष में कईं किसान मारे भी गए हैं।
जो किसान मारे गए, उनके परिजनों को मिले नौकरी
उनकी मांग है कि मारे गए किसान और मजदूरों के परिवारों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने मारे गए किसानों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने व उसका पूरा कर्ज माफ करने की मांग की। इसके अलावा 23 फसलों की खरीद की गारंटी वाला कानून बनाने व पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस लेने की मांग भी उठाई गई। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी न की गई तो संगठन जल्द ही अगले बड़े संघर्ष की घोषणा करेगा।
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फिरोजपुर में 30 से ट्रेन रोकने की चेतावनी
फिरोजपुर में तीनों कृषि कानून रद्द कराने को लेकर किसान जत्थेबंदियां पक्के तौर पर डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के समक्ष धरने पर बैठ गई हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गई तो तीस सितंबर से ट्रेन रोकेंगे। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता जसबीर सिंह व इंद्रजीत सिंह बाठ ने कहा कि मंगलवार से किसान डीसी दफ्तर के समक्ष पक्के तौर पर धरना लगाकर बैठ गए हैं। तीनों कृषि कानून रद्द किए जाएं। धान बेचने पर लगाई गई शर्तें हटाई जाए।
पांच लाख रुपये तक मिले मुआवजा
दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के अलावा उनके परिवार पर जो कर्जा है, उसे माफ किया जाए। किसानों को उक्त मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो तीस सितंबर से किसान रेल यातायात ठप कर देंगे और वहीं पर पक्के तौर पर धरना देंगे। इस मौके पर किसान नेता सुरेंद्र सिंह, बलविंदर सिंह, बलराज सिंह, अमनदीप सिंह, लखविंदर सिंह व विक्रमजीत सिंह आदि मौजूद थे।