पंजाब: चन्नी कैबिनेट में नहीं चली तो सिद्धू ने दिया इस्तीफा, प्रधान पद छोड़ा, बोले- पार्टी एजेंडे से समझौता नहीं कर सकता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 28 Sep 2021 07:56 PM IST

सार

कुछ दिन पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। उसके बाद से सिद्धू पर सुपर सीएम होने के आरोप लग रहे थे। 
नवजोत सिद्धू।
नवजोत सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चरणजीत सिंह चन्नी मंत्रिमंडल के सदस्यों को विभागों के बंटवारे के साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मंगलवार दोपहर बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया। दरअसल, सिद्धू अपने करीबी मंत्रियों को मनमाफिक विभाग दिलाना चाहते थे लेकिन जब उन्होंने कैप्टन समर्थक मंत्रियों के हैवीवेट विभाग देखे तो वे बिफर पड़े। जैसे ही सिद्धू के पार्टी प्रधान पद से इस्तीफे की खबर वायरल हुई, उनके समर्थकों के इस्तीफे की भी खबर चल पड़ी। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू के इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है। 
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कुछ ही देर बाद कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष गुलजार इंदर चहल और पंजाब कांग्रेस के महासचिव योगेंद्र ढींगरा और गौतम सेठ ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सिद्धू ने अपने इस्तीफे में लिखा है, वह पंजाब की भलाई और पंजाब के भविष्य के एजेंडे के साथ किसी तरह का कोई समझौता नहीं कर सकते। 


समझौते से ही आदमी का पतन शुरू होता है। इसलिए मैं प्रदेश कांग्रेस प्रधान के तौर पर इस्तीफा दे रहा हूं। मैं कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा। बताया जा रहा है कि सिद्धू डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा को गृह मंत्रालय देने और परगट सिंह को निकाय विभाग नहीं दिए जाने से ज्यादा खफा थे। राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाए जाने से भी नाराज थे। हालांकि उनका इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष ने अभी स्वीकार नहीं किया है। इस्तीफे के बाद केंद्रीय नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं के साथ इस संबंध में विचार विमर्श कर रहा है। 



 
 

सिद्धू को प्रधान बनाने का फैसला प्रियंका का

कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धू के इस्तीफे पर देर शाम तक कोई प्रतिक्रिया तो नहीं दी लेकिन अंदर खाने घमासान शुरू हो गया है। नेतृत्व ने जिन नेताओं के कहने पर सिद्धू को अध्यक्ष बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी वे भी अब खुद को बचाते घूम रहे हैं। हालांकि सिद्धू को अध्यक्ष बनवाने में अहम भूमिका महासचिव प्रियंका गांधी की थी। दबी जुबान अब उनके फैसले पर सवाल उठाने लगे हैं। पंजाब कांग्रेस के असंतुष्ट नेता सिद्धू को लेकर लगातार अपनी आवाज नेतृत्व तक पहुंचा रहे थे, अब उन्हें फिर नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।

मैं तो पहले ही कह रहा था सिद्धू स्थिर नहीं: कैप्टन
पंजाब से दिल्ली के लिए निजी यात्रा पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिद्धू के इस्तीफे पर यात्रा के बीच से ही ट्वीट किया  ‘मैं तो पहले ही कह रहा था वो स्थिर आदमी नहीं है। पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य के लिए सिद्धू फिट नहीं।’

सिद्धू के इस्तीफे की वजह
  • सीएम न बनाए जाने की नाराजगी 
  • मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में नहीं चली
  • डीजीपी व एडवोकेट जनरल पसंद के नहीं बनवा पाए 
  • मुख्यमंत्री चन्नी ने भी बना ली थी दूरी  

जल्द मसलों को हल कर लिया जाएगा: परगट सिंह

कैबिनेट मंत्री परगट सिंह ने पटियाला में नवजोत सिंह सिद्धू के घर रखी बैठक में हिस्सा लेने बाद कहा कि एक-दो मसले हैं, जिन्हें लेकर सिद्धू को शिकायत है लेकिन उम्मीद है कि इन मसलों को जल्द हल कर लिया जाएगा। कोई बड़ी बात नहीं है। कई बार आपस में गलतफहमी हो जाती है लेकिन मिल बैठकर सभी गलतफहमियों को दूर कर लिया जाएगा।
नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। जल्द ही मामले को सुलझा लिया जाएगा। 3-4 मुद्दे हैं, पार्टी फोरम में उनकी चर्चा हो रही है, आलाकमान उनका समाधान करेगा। कांग्रेस विधायक बावा हेनरी।
कैबिनेट मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने नवजोत सिंह सिद्धू से मुलाकात की और कहा कि कुछ छोटे मुद्दे हैं, जो कुछ गलतफहमियों से उत्पन्न हुए हैं और कल हल किए जाएंगे।

विभागों के बंटवारे के तीन घंटे बाद इस्तीफा
मंगलवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों के विभागों का एलान किया। इसके तीन घंटे बाद तीन बजे सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्रियों के विभागों के निर्धारण में नवजोत सिद्धू की सलाह को ज्यादा महत्व नहीं दिया। यही बात सिद्धू को अखर गई और उनके इस्तीफे का कारण बनी। 

सिद्धू की न पहले सीएम से बनी, न दूसरे से
नवजोत सिद्धू की कार्यशैली पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। न तो पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से अच्छे संबंध बनें और न ही अब दूसरे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से। माना जा रहा है कि सिद्धू दोनों मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान सरकार को अपने ढंग से चलाने की कोशिशों में जुटे रहे। उन्होंने कैप्टन को कई फैसले लेने के लिए कहा, जिन्हें कैप्टन ने नजरअंदाज कर दिया था। वहीं, अब जब चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। अचानक चन्नी के अपने स्तर पर निर्णय लेने और सलाह को अनदेखा किया जाना सिद्धू को नागवार गुजरा है।

इसलिए दिया गया रंधावा को गृह विभाग: बिट्टू

राज्य का गृह विभाग जोकि अमूमन मुख्यमंत्री के अधीन ही रहता है, इस बार मुख्यमंत्री चन्नी द्वारा उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को सौंपे जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरु हो गई हैं लेकिन इसके पीछे का कारण सांसद रवनीत बिट्टू ने बताया। बिट्टू ने कहा कि सुखजिंदर रंधावा के पास कैप्टन सरकार के समय भी जेल विभाग था और इस तरह वे पहले से ही पुलिस विभाग का करीब आधा कामकाज देख रहे थे। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें अब पूरा गृह विभाग दे दिया गया है।

इस्तीफे पर पुनर्विचार करें नवजोत सिद्धू: खैरा
सुखपाल सिंह खैरा ने नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब के व्यापक हित में अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी अपील की है कि सिद्धू द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। मंगलवार को जारी एक बयान में खैरा ने जहां सिद्धू से अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की अपील की तो वहीं कांग्रेस हाईकमान से भी अपील की है कि वह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर न करें। 

खैरा ने कहा कि चूंकि पंजाब में अगले 4-5 महीनों में चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी आलाकमान और नवजोत के बीच गतिरोध का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना अत्यंत आवश्यक है। खैरा ने कहा कि अगर पार्टी आलाकमान सिद्धू द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों पर ध्यान देकर उन्हें वापस ले लेती है तो इससे पंजाब में कांग्रेस पार्टी ही मजबूत होगी।

10 दिनों में क्या क्या हुआ
  • 18 सितंबर को मुख्यमंत्री पद से कैप्टन ने दिया इस्तीफा
  • 19 सितंबर को चरणजीत सिंह चन्नी बने कांग्रेस का चेहरा
  • 20 सितंबर को चन्नी ने दो उपमुख्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
  • 22 सितंबर को कैप्टन ने सिद्धू की खुलकर की खिलाफत
  • 25 सितंबर को मंत्रिमंडल में गुरजीत राणा के नाम पर शुरू हुआ विवाद
  • 26 सितंबर को मंत्रियों के नाम पर फिर से शुरू हुआ घमासान
  • 26 सितंबर विवाद के बाद सिद्धू के करीबी नागरा का नाम कटा
  • 28 सितंबर को विभागों के बंटवारे के बाद दोपहर को सिद्धू का इस्तीफा
दिन का घटनाक्रम
  • 28 सितंबर को सिद्धू ने तीन बजे ट्वीट कर इस्तीफे की सूचना दी
  • 3.48 बजे कैप्टन ने सिद्धू के इस्तीफे पर दी तीखी प्रतिक्रिया
  • 3.55 बजे सिद्धू के समर्थन में पार्टी कोषाध्यक्ष गुलजार इंद्र चहल ने भी दिया इस्तीफा
  • 4.10 बजे महासचिव योगेंद्र ढींगरा ने भी सिद्धू के समर्थन में छोड़ा पद
  • 4.30 बजे रजिया सुल्ताना ने भी चन्नी कैबिनेट से इस्तीफा दिया
  • 5.00 बजे पटियाला में सिद्धू के घर जुटने लगी समर्थक विधायकों की भीड़
  • 7.30 बजे आलाकमान ने सिद्धू का इस्तीफा किया नामंजूर
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