किसान आंदोलन का बदला स्वरूप, घर की चिंता नहीं, अब 1000 से ज्यादा किसान परिवार संग पहुंचे
- कृषि कानूनों के विरोध में नेशनल हाईवे 44 के कुंडली बॉर्डर पर चल रहे धरने में किसान अपने परिवार संग पहुंच रहे
- पंजाब से लेकर यूपी व दिल्ली तक के परिवार पहुंचे, कृषि कानून रद्द होने के बाद ही वापस घर जाने की बात कह रहे
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कृषि कानूनों के आंदोलन के खिलाफ कुंडली बॉर्डर पर किसान संगठन आंदोलन की नई-नई रणनीति बना रहे हैं। वहीं किसान भी इसमें सहयोग देने की रणनीति बना रहे हैं। किसान यहां शुरुआत में अकेले पहुंचे। ऐसे में उन्हें घर की चिंता रहती थी और परिवार को उनकी चिंता रहती थी। ऐसे में अब किसान अपने परिवारों को भी कुंडली बॉर्डर पर बुला रहे है।
वहीं धरनास्थल पर आने वाले अन्य किसान अपने परिवार के साथ पहुंच रहे हैं। अब उनको लगने लगा है कि आंदोलन ज्यादा लंबा चल सकता है और इसलिए यहां परिवार के साथ डेरा डाले हुए है। इनमें ऐसे केवल पंजाब के किसान नहीं है, बल्कि यूपी व दिल्ली के किसान भी प्रतिदिन आने जाने से बचने को परिवार समेत पहुंच गए हैं।
कृषि कानूनों के विरोध में कुंडली बॉर्डर पर 27 नवंबर से आंदोलन चल रहा है। उस समय जहां किसान कम थे तो उनके परिवार भी साथ नहीं थे। उसके बाद से प्रतिदिन किसान बढ़ते जा रहे हैं और अब पंजाब के अलावा हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली समेत अन्य राज्यों के किसान लगातार वहां पहुंच रहे हैं।
कुंडली बॉर्डर पर ऐसे पंजाब, दिल्ली, यूपी के काफी किसान परिवार पहुंचे हुए है। किसानों का इसका एक बड़ा फायदा यह भी मिल रहा है कि उनको अकेले कोई काम नहीं करना पड़ रहा है। बल्कि अब खाना बनाने से लेकर कपड़े धोने व अन्य कामों को पूरा परिवार एक साथ मिलकर करता है। बताया जा रहा है कि अब तक धरनास्थल पर एक हजार किसान परिवार पहुंच चुके हैं।
मैं परिवार के साथ यहां आया हूं, जिसमें पत्नी, भाई व अन्य लोग शामिल हैं। जिस तरह से किसान काफी समय से यहां आए हुए हैं तो सरकार को इनके बारे में सोचना चाहिए। वह भी इंसान है और हम भी इंसान है, इसलिए किसानों के बारे में सोचना जरूरी है। हम केवल कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे है और उससे ज्यादा कुछ नहीं कर रहे। हम सरकार से कुछ मांग नहीं रहे हैं, बल्कि सरकार हमें कुछ देना चाहती है तो उसके लिए मना कर रहे हैं। उसके बाद भी सरकार अपनी जिद पर अड़ी है। सरकार को कृषि कानून रद्द जरूर करने पड़ेंगे। जितेंद्र, दिल्ली।
मैं पत्नी, तीन महीने की बेटी, बहन, मां के साथ आया हूं। हम यहां किसानों को समर्थन देने आए हैं। जिस तरह के हालात हैं और एक महीना होने जा रहा है, उसको देखकर रहा नहीं जा रहा है और अब हमारा पूरा परिवार यहां आ गया है। सरकार को देखना चाहिए कि किस तरह से किसान ठंड में सड़क पर बैठा हुए हैं। हम आराम से कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सरकार हमारी मांग को आसानी से पूरा कर देती है तो यहां से सभी वापस चले जाएंगे। गुरप्रीत सिंह, गाजियाबाद, यूपी।
हमारा पूरा परिवार यहां आया हुआ है, जिनमें मेरे पति, बेटी व अन्य कई लोग है। हम लोग सरकार से कृषि कानून रद्द करने की मांग कर रहे है, जबकि सरकार उसमें संशोधन करना चाहती है। जब सरकार खुद ही मान चुकी है कि कानून में कमियां है तो संशोधन की जगह उनको रद्द करके दूसरे कानून भी बना सकती है। जब तक कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते है, तब तक हम भी सड़क से उठने वाले नहीं हैं। अब पूरे परिवार के साथ यहां आ गए और तभी वापस जाएंगे, जब कृषि कानून वापस हो जाएंगे। गुरप्रीत, जालंधर, पंजाब।