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कविता से बयान कर रहे किसानों का दर्द, चंडीगढ़ के कलाकारों ने यूं किया अन्नदाताओं को नमन

Mon, 25 Jan 2021 04:45 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 25 Jan 2021 04:45 PM IST
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Kisan Andolan  : Artists of Chandigarh bow to the farmers
चंडीगढ़ के कलाकार किसान आंदोलन को दे रहे हैं समर्थन। - फोटो : अमर उजाला

जमाना और पीढ़ी कोई भी हो कला हर उम्र व समुदाय के व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। ट्राइसिटी के गीतकार, फिल्म कलाकार और दृश्य कलाकार पिछले छह महीने से किसानों की समस्याओं को कला के विभिन्न माध्यमों से आम जनता के समक्ष पेश कर रहे हैं।

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जब पंजाब में किसान संघर्ष की शुरुआत हुई, तभी से उनके साथ कलाकार भी मैदान में उतर गए। इसमें पंजाब और चंडीगढ़ के गायकों और अभिनेताओं के साथ दृश्य कलाकारों ने भी किसानों की समस्याओं को लेकर आर्ट वर्क बनाए।   
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प्रदर्शन में बैठे होने के कारण किसानों की फसल हो रही प्रभावित 
मोहाली के गायक और गीतकार हुसतिंदर सिंह बताते हैं कि वे बरनाला के भदौड़ से हैं। सितंबर में वहां शुरू हुए किसान प्रदर्शन में उन्होंने भागीदारी की थी। इसके बाद से सोशल मीडिया और बीच बीच में दिल्ली जाकर हम भाषण और गीतों के माध्यम से किसान परिवारों से होने के नाते अपनी समस्याओं से लोगों को वाकिफ करवा रहे हैं।
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प्रदर्शन के दौरान ही मैंने एक कविता लिखी थी- कोई भीख नी मंगी, हक मंगे सी, कुर्सी तक नी वट्टां तक मंगे सी.. भज्ज दिल्लीये कित्थे भजेंगी, तेरे हिक ते डेरे ला लेया नी। सरकार को जल्दी इस मसले पर हल निकालना चाहिए, किसानों के  प्रदर्शन में बैठे होने के कारण पीछे उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं।  

खेती पर तैयार की आर्ट सीरीज 
सेक्टर -24 के दृश्य कलाकार सुभाष शोरी ने बताया कि उन्होंने स्क्रैच, पेंटिंग, वुडकट, परफॉर्मेंस रेमेडी आर्ट फॉर्म के जरिए किसानी को दिखाने की कोशिश की है। कला में वर्तमान में किसानों की परेशानियों को मुख्य धारा में रखा गया है। यह सीरीज प्रदर्शनकारी किसानों को समर्पित की है। मैं मूल रूप से सानेवाला, लुधियाना का रहने वाला हूं। मेरे पिताजी के खुद के खेत नहीं थे, लेकिन हमारे रिश्तेदार खेतों में रहते थे।

हम छुट्टियों में जब उनके पास जाते थे तब मैं खेत में काम करवाता था। किसानी को करीबी से महसूस करने के बाद अब उनकी परेशानियां मुझे हर समय खलती रहती है और यही कला के रूप में उभर रही है। दिसंबर में मैंने खेती सीरीज बनानी शुरू की थी। 

दिल्ली में महिला किसानों के लिए बनाया ‘माई भागो निवास’

चंडीगढ़ की फिल्म अभिनेत्री सोनिया मान ने बताया कि दिल्ली में प्रदर्शन के शुरुआत में किसान महिलाओं को रहने के साथ सैनीटेशन आदि की समस्याएं आ रही थीं। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए लोगों से सहायता प्राप्त की और टिकरी बॉर्डर पर ‘माई भागो निवास’ बनाया। माई भागो मुगलों के खिलाफ लड़ाई में गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रमुख लड़ाका थी। वहां पर मौजूद युवा खुद आगे आए और हमारी मदद कर रहे हैं।

हम वहां टॉयलेट, रसोई का सामान, गर्म कपड़े और सैनिटाइजेशन आदि की सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। माई भागो निवास में 200 से 300 महिलाएं रह रही हैं। प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। सरकार को किसानों की समस्यायों का जल्द निपटारा करना चाहिए। उनकी मर्जी के बिना उन पर कानून थोपना सही नहीं है। 

पीयू शोधकर्ता और गीतकार रविंदर धालीवाल ने बताया कि पंजाब के कई नौजवान मिलकर लगातार किसानों के परिवार की समस्याओं पर गीत, कविताओं और गानों के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मैंने भी छह महीने पहले एक गीत लिखा। इसमें किसान परिवारों के घर के हालात, कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना, बढ़ती बेरोजगारी और उसके कारण बढ़ते नशे को चित्रित किया है।

मेरा मानना है ओ कलमा बांझ ने जो लोकां दी गल्ल नी कर सकदी। पिछले छह महीने से हम पहले पंजाब और अब दिल्ली में किसानों के साथ संघर्षरत है। मेरे प्रदर्शन में होने के कारण मेरी पत्नी ही घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारियां संभाले हुए हैं।  

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