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Chandigarh News: किरण का 20 साल पहले टूटा सपना हो सकता है पूरा
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2004 में राज्यसभा सदस्य की उम्मीदवार थीं, मगर चुनाव नहीं जीत पाई थीं
भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा शुरू
चंडीगढ़। भाजपा में शामिल कांग्रेस की दिग्गज नेता किरण चौधरी का 20 साल पुराना सपना पूरा हो सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा उन्हें दो वर्षों के लिए रिक्त हुई एक राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बना सकती है। 20 साल पहले 2004 में जब हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो की सरकार थी। उस दौरान एक सीट के लिए कांग्रेस ने किरण चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। मगर वह निर्वाचित होने से चूक गई थीं। दरअसल मतदान से तीन दिन हरियाणा विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर सतबीर सिंह कादियान ने किरण चौधरी का समर्थन कर थे। छह विधायक जगजीत सांगवान, करण सिंह दलाल, भीम सेन मेहता, जय प्रकाश गुप्ता, राजिंदर बिसला और देव राज दीवान को दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत हरियाणा विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था। किरण ने
इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, मगर अयोग्य घोषित छह विधायकों को राज्यसभा चुनाव के मतदान में वोटिंग का अधिकार नहीं मिला, जिसका परिणाम यह हुआ कि इनेलो के समर्थन से निर्दलीय तौर चुनाव लड़ रहे सरदार त्रिलोचन सिंह चुनाव जीत गए। किरण चुनाव हार गईं। वहीं, राज्यसभा की दूसरी सीट से ओपी चौटाला के बड़े पुत्र और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पिता डॉ. अजय चौटाला निर्वाचित हुए। यदि भाजपा उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारती है और वह जीत जाती हैं तो उनका 20 साल पुराना सपना पूरा हो सकता है।
चुनावी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि किरण चौधरी ने एनसीटी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) दिल्ली विधानसभा का पहला चुनाव 1993 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली कैंट से लड़ा और भाजपा के करण सिंह तंवर से हार गईं। पांच साल बाद किरण तंवर को हराकर पहली बार विधायक बनीं और विधानसभा में डिप्टी स्पीकर भी चुनी गईं। हालांकि 2003 में किरण फिर भाजपा के तंवर से हार गईं। उसके बाद उनके पति सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद वह तोशाम से चुनाव लड़ती रहीं और तोशाम से चुनाव जीतती रहीं। वह भूपेंद्र हुड्डा की दोनों सरकारों के दौरान पहले राज्यमंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री रहीं। हेमंत का यह भी कहना है कि किरण ने कांग्रेस से तो इस्तीफा दे दिया है, मगर अब तक विधायक पद से नहीं दिया है। हालांकि कांग्रेस ने उनकी सदस्यता को रद्द करने के लिए स्पीकर को पत्र लिख दिया है।
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भाजपा ने इस साल कांग्रेस का पांचवें दिग्गज को पार्टी में शामिल किया
भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गजों पर नजरें गड़ा रखी हैं। पिछले कुछ महीनों से पार्टी ने कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को भगवा रंग में रंगने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पार्टी ने बुधवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी को शामिल कर विपक्षी दल को बड़ा झटका दिया है। किरण चौधरी राज्य के पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। बंसीलाल को मानने वाले राज्य में काफी संख्या में हैं। किरण के आने से भाजपा को न सिर्फ मजबूती मिलेगी बल्कि महिला नेतृत्व के तौर पर एक मजबूत नेता मिला है। किरण के आने से भिवानी की चारों विधानसभा सीटों पर पार्टी को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही पार्टी किरण चौधरी के जरिये जाट वोटों को भी साधने का काम करेंगी।
किरण से पहले भाजपा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में शामिल कर चुकी हैं। इनमें लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने मुक्केबाज विजेंद्र सिंह को पार्टी में शामिल कराया था। विजेंद्र भी कांग्रेस से खफा हो गए थे। वह लोकसभा का टिकट मांग रहे थे, मगर पार्टी उन्हें मनचाही जगह के बजाय दूसरे प्रदेश से चुनाव लड़ने के लिए कह रही थी। इससे नाराज होकर उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गए थे। विजेंद्र सिंह से पहले भाजपा ने जिंदल परिवार में सेंध लगाई। पार्टी ने नवीन जिंदल के साथ उनकी मां सावित्री जिंदल को भी पार्टी में शामिल किया। नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी जीते। जिंदल परिवार का भी अच्छा रसूख रहा है। इससे पहले भाजपा ने पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा को शामिल कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था।
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भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजने की चर्चा शुरू
चंडीगढ़। भाजपा में शामिल कांग्रेस की दिग्गज नेता किरण चौधरी का 20 साल पुराना सपना पूरा हो सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा उन्हें दो वर्षों के लिए रिक्त हुई एक राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार बना सकती है। 20 साल पहले 2004 में जब हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो की सरकार थी। उस दौरान एक सीट के लिए कांग्रेस ने किरण चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। मगर वह निर्वाचित होने से चूक गई थीं। दरअसल मतदान से तीन दिन हरियाणा विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर सतबीर सिंह कादियान ने किरण चौधरी का समर्थन कर थे। छह विधायक जगजीत सांगवान, करण सिंह दलाल, भीम सेन मेहता, जय प्रकाश गुप्ता, राजिंदर बिसला और देव राज दीवान को दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत हरियाणा विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था। किरण ने
इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, मगर अयोग्य घोषित छह विधायकों को राज्यसभा चुनाव के मतदान में वोटिंग का अधिकार नहीं मिला, जिसका परिणाम यह हुआ कि इनेलो के समर्थन से निर्दलीय तौर चुनाव लड़ रहे सरदार त्रिलोचन सिंह चुनाव जीत गए। किरण चुनाव हार गईं। वहीं, राज्यसभा की दूसरी सीट से ओपी चौटाला के बड़े पुत्र और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पिता डॉ. अजय चौटाला निर्वाचित हुए। यदि भाजपा उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारती है और वह जीत जाती हैं तो उनका 20 साल पुराना सपना पूरा हो सकता है।
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चुनावी विश्लेषक हेमंत कुमार ने बताया कि किरण चौधरी ने एनसीटी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) दिल्ली विधानसभा का पहला चुनाव 1993 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली कैंट से लड़ा और भाजपा के करण सिंह तंवर से हार गईं। पांच साल बाद किरण तंवर को हराकर पहली बार विधायक बनीं और विधानसभा में डिप्टी स्पीकर भी चुनी गईं। हालांकि 2003 में किरण फिर भाजपा के तंवर से हार गईं। उसके बाद उनके पति सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद वह तोशाम से चुनाव लड़ती रहीं और तोशाम से चुनाव जीतती रहीं। वह भूपेंद्र हुड्डा की दोनों सरकारों के दौरान पहले राज्यमंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री रहीं। हेमंत का यह भी कहना है कि किरण ने कांग्रेस से तो इस्तीफा दे दिया है, मगर अब तक विधायक पद से नहीं दिया है। हालांकि कांग्रेस ने उनकी सदस्यता को रद्द करने के लिए स्पीकर को पत्र लिख दिया है।
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भाजपा ने इस साल कांग्रेस का पांचवें दिग्गज को पार्टी में शामिल किया
भाजपा ने कांग्रेस के दिग्गजों पर नजरें गड़ा रखी हैं। पिछले कुछ महीनों से पार्टी ने कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को भगवा रंग में रंगने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पार्टी ने बुधवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी को शामिल कर विपक्षी दल को बड़ा झटका दिया है। किरण चौधरी राज्य के पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। बंसीलाल को मानने वाले राज्य में काफी संख्या में हैं। किरण के आने से भाजपा को न सिर्फ मजबूती मिलेगी बल्कि महिला नेतृत्व के तौर पर एक मजबूत नेता मिला है। किरण के आने से भिवानी की चारों विधानसभा सीटों पर पार्टी को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही पार्टी किरण चौधरी के जरिये जाट वोटों को भी साधने का काम करेंगी।
किरण से पहले भाजपा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में शामिल कर चुकी हैं। इनमें लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने मुक्केबाज विजेंद्र सिंह को पार्टी में शामिल कराया था। विजेंद्र भी कांग्रेस से खफा हो गए थे। वह लोकसभा का टिकट मांग रहे थे, मगर पार्टी उन्हें मनचाही जगह के बजाय दूसरे प्रदेश से चुनाव लड़ने के लिए कह रही थी। इससे नाराज होकर उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गए थे। विजेंद्र सिंह से पहले भाजपा ने जिंदल परिवार में सेंध लगाई। पार्टी ने नवीन जिंदल के साथ उनकी मां सावित्री जिंदल को भी पार्टी में शामिल किया। नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी जीते। जिंदल परिवार का भी अच्छा रसूख रहा है। इससे पहले भाजपा ने पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा को शामिल कर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था।