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गमाडा में ‘खेल’ का खुलासा: मास्टर प्लान बदला, निजी डेवलपरों को राहत; अब बड़े अफसरों पर कसेगा ईडी का शिकंजा

Sat, 26 Sep 2026 09:53 AM IST
Nivedita मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 26 Sep 2026 09:53 AM IST
सार

ईडी ने गमाडा घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 परिसरों पर 50 घंटे दबिश दी थी। इस मामले में एजेंसी वरिष्ठ अफसरों, बिचौलियों और निजी एजेंसियों की कथित मिलीभगत के सुराग तलाश रही है। 

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ED investigation financial irregularities linked to GMADA reached senior administrative officials in Punjab
गमाडा में ईडी की रेड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच अब पंजाब के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। 

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22 सितंबर से शुरू हुई करीब 50 घंटे की कार्रवाई में ईडी की ओर से दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 परिसरों पर तलाशी और सर्वे पूरा किया गया। इस दौरान ईडी ने मिलीभगत से बड़े गड़बड़झाले और इससे करीब 10 हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अंदेशा जताया है।
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इस रेड के दौरान गमाडा और पंजाब के हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के कार्यालय भी खंगाले गए थे।

ईडी की जांच में जमीन के अधिग्रहण, मुआवजों में करोड़ों की कथित राहत, मास्टर प्लान में बदलाव, रिजर्व प्राइस कम कर साइटों की नीलामी और निजी डेवलपरों को दी गई वित्तीय राहत से जुड़े फैसले जांच के घेरे में हैं।
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ईडी ने गमाडा के कई मौजूदा और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के परिसरों को कार्रवाई के दायरे में लिया। इनमें हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग (आईएएस), गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप ऋषि (आईएएस), एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमरिंदर मल्ही (पीसीएस), लैंड एक्विजिशन कलेक्टर रोहित जिंदल (पीसीएस) और पूर्व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राजीव गुप्ता (आईएएस) शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच में एस्टेट अधिकारी अमन गुप्ता, एडिशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर राकेश पोपली और चीफ इंजीनियर अजय गर्ग से भी पूछताछ की बात सामने आई है।

ऐसा खेला खेल, रडार पर अफसर
सूत्रों ने बताया कि पंजाब के अफसरों, बिचौलियों और निजी एजेंसियों ने मिलीभगत कर सरकार को बड़ी चपत लगाई है। ईडी की जांच में पंजाब के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों की संदिग्ध भूमिका भी उजागर हुई है। सूत्र बताते हैं कि एक वरिष्ठ अफसर के मोबाइल से एक निजी कंपनी को हवाला भुगतान से जुड़ी कथित चैट मिली हैं। इस कंपनी का संचालन पंजाब सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के करीबी रिश्तेदार द्वारा किए जाने का दावा किया जा रहा है।

इसी तरह, गमाडा के प्रशासनिक निर्णयों और मास्टर प्लान में बदलावों के संदर्भ में एक अन्य वरिष्ठ अफसर की भूमिका शक के घेरे में है। एक अफसर के गैर-आधिकारिक बैठकों और प्रक्रियाओं से जुड़े वित्तीय फैसलों में शामिल होने की बात सामने आ रही है। इसके अतिरिक्त, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और मुआवजा वितरण में अनियमितताएं बरतने, बिना अनुमति ट्रांसफर डीड निष्पादित करने और चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाने के मामले में एक अन्य अफसर की संलिप्तता बताई जा रही है।

उधर, निजी कंसल्टेंसी कंपनी के माध्यम से सरकारी दफ्तरों से समानांतर संचालन करने और मुआवजा फाइलों व ड्राफ्ट अधिसूचनाओं की निगरानी करने की बात सामने आई है। इसमें भी एक अफसर की भूमिका जांच के दायरे में है।

जांच का एक बड़ी कड़ी गमाडा की बिना बिकी जमीन के रिजर्व प्राइस से जुड़ी है। इस बात की जांच की जा रही है कि नीलामी से पहले कुछ जमीनों के रिजर्व प्राइस को कथित तौर पर कम कर दिया गया। इससे गमाडा और पंजाब सरकार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी।

आप नेता का पूर्व ओएसडी था सक्रिय
ईडी की इस दबिश में राजनीतिक सांठगांठ और अनौपचारिक बैठकों का खुलासा भी किया जा रहा है, मगर अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। ये बैठकें गमाडा अधिकारियों के साथ साइट नीलामी और मास्टर प्लान संशोधन के संदर्भ में हुआ करती थीं। इसी के तहत कई फाइलें पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पूडा) भवन से बाहर भी जाती थीं। दिल्ली के एक वरिष्ठ आप नेता का पूर्व ओएसडी बिना किसी आधिकारिक पद के पूडा भवन में एक कमरे का इस्तेमाल करते थे और अफसरों को निर्देश भी देते थे।

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