फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Kindness of department In GMSH-16, store in-charge has been sticking to chair for 10 years

स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी: जीएमएसएच-16 में 10 साल से कुर्सी पर चिपके हैं स्टोर प्रभारी, मानक भी नजरंदाज

Thu, 08 Dec 2022 08:30 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 08 Dec 2022 08:30 AM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले दिनों लोकल पर्चेज में ऐसी दवाओं की खरीद का मामला सामने आया है जो फिजिशयन सैंपल के तौर पर दी जाती हैं। दवा कंपनी ने फिजीशियन सैंपल के लेबल के ऊपर गवर्नमेंट सप्लाई का लेबल लगाकर उसकी आपूर्ति कर दी है।

विज्ञापन
Kindness of department In GMSH-16, store in-charge has been sticking to chair for 10 years
GMSH 16 Chandigarh

विस्तार

चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग में स्थानीय स्तर पर दवा की खरीद में हुए फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद सभी अस्पतालों व केंद्रों में चर्चाएं तेज हैं। दवा स्टोर में फिजीशियन सैम्पन को लोकल पर्चेज में खरीदे जाने की बात को लेकर कमीशन के खेल का मुद्दा गर्म होने लगा है। अधिकारी और कर्मचारी दबी जुबान में जीएमएसएच-16 में स्टोर प्रभारियों की तैनाती को लेकर आपत्ति जताने लगे हैं। उनका कहना है कि सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के मानक को ताक पर रखकर कुछ कर्मचारियों पर मेहरबानी की जा रही है। जिनका तीन साल के बाद स्थानांतरण होना चाहिए वे 10 से 15 साल से उसी कुर्सी पर जमे हुए हैं। चंद कर्मचारियों को लेकर विभाग इस कदर मेहरबान है कि उन्हें जनता की भी सुध नहीं है। वे ये बात भूल गए हैं कि चंद व्यक्तियों के फायदे के लिए जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले दिनों लोकल पर्चेज में ऐसी दवाओं की खरीद का मामला सामने आया है जो फिजिशयन सैंपल के तौर पर दी जाती हैं। दवा कंपनी ने फिजीशियन सैंपल के लेबल के ऊपर गवर्नमेंट सप्लाई का लेबल लगाकर उसकी आपूर्ति कर दी है। इसे लेकर विभागी अधिकारियों का कहना है कि इसमें कंपनी के साथ ही पर्चेज कमेटी के सदस्य व स्टोर प्रभारी की भी बराबर की जवाबदेही है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेने की बजाय टालने का प्रयास किया जा रहा है। संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई की बजाय निदेशक स्वास्थ्य ने जांच की जिम्मेदारी ड्रग इंस्पेक्टर को सौंप दी है।
विज्ञापन

 
वित्त विभाग में होता है बदलाव
वहीं दूसरी तरफ अस्पताल में तैनात वित्त विभाग के कर्मचारियों का पटल परिवर्तन रूटीन में होता रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की बजाय वित्त विभाग से तैनात किए गए हैं। वहां संवेदनशील पटल परिवर्तन के मानक का पालन करते हुए दो सालों पर कर्मचारियों का स्थान परिवर्तित कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए नहीं छूट रहा पद का मोह
स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में संवेदनशील पदों पर तीन साल के बाद पटल परिवर्तन का नियम इसलिए बनाया गया है ताकि उस पद पर तैनात कर्मचारी और अधिकारी उस पद का फायदा न उठा सकें। स्टोर में दवाओं से लेकर उपकरण व अन्य जरूरी चीजों की खरीद बिक्री से जुड़े सभी निर्णय वहां तैनात फार्मासिस्ट के हाथ में ही होता है। ठीक यही प्रक्रिया अन्य स्टोर में भी है। इन पदों पर कमीशन का लंबा खेल चलता है। इसके कारण एक बार तैनाती मिल जाने के बाद वहां बने रहने के लिए तमाम उपाय किए जाते हैं।
 
इन पदों पर वर्षों से नहीं हुआ पटल परिर्वतन
पद                                                   कब से तैनाती

फार्मेसी स्टोर के मुख्य प्रभारी                 10 साल से
फार्मेसी स्टोर के तीन अन्य फार्मासिस्ट    10 से 12 साल से
जनरल स्टोर प्रभारी                               13 साल से
सर्जिकल स्टोर प्रभारी                            14 साल से
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed