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किड्स, वायु और कोरोना कॉमिक बच्चों को करेगा जागरूक
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस को लेकर बच्चों को जागरूक करने और संक्रमण को रोकने के लिए एक खास कॉमिक्स जारी की है। इसे पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय की फैकल्टी ने तैयार किया है। हेल्थ मिनिस्ट्री के ट्वीट में कहा गया है कि कॉमिक किड्स, वायु और कोरोना : कौन लड़ाई जीतता है? इस कॉमिक्स से कोविड-19 की जानकारी बच्चों को आसान तरीके से मिलेगी। इसे वेबसाइट (mohfw.gov.in-corona_comic_PGI) से डाउनलोड किया जा सकता है।
बड़ों से लेकर बच्चों तक में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा कोरोना वायरस की हो रही है। वे स्वयं को जागरूक करने के लिए समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और टेलीविजन जैसे उपलब्ध मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए कोरोना वायरस चिंता का कारण बन गया है क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे हैं। इसे देखते हुए पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय ने कॉमिक तैयार किया है।
पीजीआई में पर्यावरण स्वास्थ्य के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खाईवाल ने बताया कि आम नागरिकों में कोरोना वायरस को लेकर काफी चिंता है। अभिभावक को बच्चों से बात करनी चाहिए और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना चाहिए, ताकि वे घबराएं नहीं। डॉ. रविंद्र खाईवाल ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे की जिज्ञासाओं से प्रेरित होकर कॉमिक लिखी। बच्चों के सुझाव ने ही इसे पढ़ने और सीखने के लिए और अधिक आकर्षक बनाने में मदद की।
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पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमन मोर के मुताबिक वे वायु प्रदूषण जागरूकता के लिए कॉमिक्स पर काम कर रहे थे। कोरोना वायरस के अचानक प्रकोप ने उन्हें कोरोना वायरस के खतरे से लड़ने के पात्रों (कैरेक्टर) विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इसके जरिए हास्य का उपयोग मनोरंजन के साथ-साथ सीखने के लिए किया गया है। कॉमिक्स बच्चों को कोरोना और अन्य संक्रामक कीटाणुओं को हराकर रोकथाम का नायक बनने के लिए प्रेरित करता है।
पीजीआई के निदेशक प्रो. जगत राम ने प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह हास्य बच्चों को कोरोना वायरस के खतरे के बारे में जागरूक करेगा। सरल और एहतियाती कदमों के माध्यम से कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है, इसके बारे में बताएगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी इस कॉमिक्स का अनुवाद करने की योजना बना रहा है। जल्द ही यह कॉमिक्स अन्य भाषाओं जैसे हिंदी और पंजाबी में भी उपलब्ध होगी।
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बड़ों से लेकर बच्चों तक में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा कोरोना वायरस की हो रही है। वे स्वयं को जागरूक करने के लिए समाचार पत्रों, सोशल मीडिया और टेलीविजन जैसे उपलब्ध मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए कोरोना वायरस चिंता का कारण बन गया है क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे हैं। इसे देखते हुए पीजीआई और पंजाब विश्वविद्यालय ने कॉमिक तैयार किया है।
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पीजीआई में पर्यावरण स्वास्थ्य के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खाईवाल ने बताया कि आम नागरिकों में कोरोना वायरस को लेकर काफी चिंता है। अभिभावक को बच्चों से बात करनी चाहिए और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करना चाहिए, ताकि वे घबराएं नहीं। डॉ. रविंद्र खाईवाल ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे की जिज्ञासाओं से प्रेरित होकर कॉमिक लिखी। बच्चों के सुझाव ने ही इसे पढ़ने और सीखने के लिए और अधिक आकर्षक बनाने में मदद की।
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पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमन मोर के मुताबिक वे वायु प्रदूषण जागरूकता के लिए कॉमिक्स पर काम कर रहे थे। कोरोना वायरस के अचानक प्रकोप ने उन्हें कोरोना वायरस के खतरे से लड़ने के पात्रों (कैरेक्टर) विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इसके जरिए हास्य का उपयोग मनोरंजन के साथ-साथ सीखने के लिए किया गया है। कॉमिक्स बच्चों को कोरोना और अन्य संक्रामक कीटाणुओं को हराकर रोकथाम का नायक बनने के लिए प्रेरित करता है।
पीजीआई के निदेशक प्रो. जगत राम ने प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह हास्य बच्चों को कोरोना वायरस के खतरे के बारे में जागरूक करेगा। सरल और एहतियाती कदमों के माध्यम से कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है, इसके बारे में बताएगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी इस कॉमिक्स का अनुवाद करने की योजना बना रहा है। जल्द ही यह कॉमिक्स अन्य भाषाओं जैसे हिंदी और पंजाबी में भी उपलब्ध होगी।