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किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट: सुख सेवा अस्पताल सील, जांच के घेरे में कई अस्पताल
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मोहाली। खरड़ के किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सुख सेवा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल को सील कर दिया है। डीसी कोमल मित्तल के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के साथ ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है और अब शहर के कई अन्य अस्पताल भी रडार पर आ गए हैं।
एसपी मनप्रीत सिंह की अगुवाई में चल रही जांच में सामने आया है कि संबंधित अस्पताल के पास मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यक अनुमति ही नहीं थी। इसके बावजूद ट्रांसप्लांट का दावा किया गया जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। एसआईटी को यह भी संदेह है कि सर्जरी किसी अन्य अस्पताल या बाहरी ऑपरेशन थिएटर में की गई हो सकती है।
नियमों के अनुसार अंग प्रत्यारोपण के लिए विशेषज्ञों की समिति, सामाजिक कार्यकर्ता और राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य होती है जो डोनर-रिसीवर के संबंध और किसी भी आर्थिक लेन-देन की जांच करते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डोनर नेपाल का नागरिक और रिसीवर दिल्ली का रहने वाला है, जिससे यह मामला गैर-रिश्तेदार डोनर की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में राज्य या जिला स्तर की प्राधिकरण समिति से विशेष अनुमति लेना जरूरी होता है।
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एसआईटी ने सिविल सर्जन कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ट्रांसप्लांट के लिए कोई मंजूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। वहीं, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ 2018 और 2023 में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के बावजूद मेडिकल लाइसेंस रद्द न होने पर भी सवाल उठे हैं।
अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के दिशा-निर्देशों के तहत विदेशी डोनर के मामलों में अतिरिक्त जांच, दस्तावेज सत्यापन और दूतावास से पुष्टि अनिवार्य है। एसआईटी ने कहा है कि इस पूरे मामले में संभावित मिलीभगत के साथ हर पहलू की जांच जारी है।
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एसपी मनप्रीत सिंह की अगुवाई में चल रही जांच में सामने आया है कि संबंधित अस्पताल के पास मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यक अनुमति ही नहीं थी। इसके बावजूद ट्रांसप्लांट का दावा किया गया जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। एसआईटी को यह भी संदेह है कि सर्जरी किसी अन्य अस्पताल या बाहरी ऑपरेशन थिएटर में की गई हो सकती है।
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नियमों के अनुसार अंग प्रत्यारोपण के लिए विशेषज्ञों की समिति, सामाजिक कार्यकर्ता और राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य होती है जो डोनर-रिसीवर के संबंध और किसी भी आर्थिक लेन-देन की जांच करते हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डोनर नेपाल का नागरिक और रिसीवर दिल्ली का रहने वाला है, जिससे यह मामला गैर-रिश्तेदार डोनर की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में राज्य या जिला स्तर की प्राधिकरण समिति से विशेष अनुमति लेना जरूरी होता है।
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एसआईटी ने सिविल सर्जन कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ट्रांसप्लांट के लिए कोई मंजूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं। वहीं, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ 2018 और 2023 में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के बावजूद मेडिकल लाइसेंस रद्द न होने पर भी सवाल उठे हैं।
अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के दिशा-निर्देशों के तहत विदेशी डोनर के मामलों में अतिरिक्त जांच, दस्तावेज सत्यापन और दूतावास से पुष्टि अनिवार्य है। एसआईटी ने कहा है कि इस पूरे मामले में संभावित मिलीभगत के साथ हर पहलू की जांच जारी है।