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विस चुनाव में किंगमेकर बनेंगी खाप पंचायतें

Mon, 11 Aug 2014 10:24 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 11 Aug 2014 10:24 AM IST
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khap panchayat role in haryana election

हरियाणा में विधानसभा चुनाव के पहले खाप पंचायतों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पानीपत में सर्वखाप पंचायत ने 20 अगस्त को बैठक बुलाई है। इसमें विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तय की जाएगी।

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हरियाणा सर्वखाप पंचायत के प्रधान विजेंद्र योगी ने कहा कि इस बैठक में तय होगा कि पंचायत को खुद चुनाव मैदान में उतरना है या नहीं। किसी पार्टी या उम्मीदवार के समर्थन के बारे में भी बैठक में मशविरा होगा।
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खाप पंचायतों के प्रभाव को देखते हुए चुनाव के पहले कोई भी राजनीतिक दल उन्हें नाराज नहीं कर सकता। यानी सियासी जंग के दौरान नेताजी अब खाप पंचायतों को नमन करते दिखेंगे।
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विजेंद्र योगी ने माना कि लगभग सभी दलों के नेता खाप पंचायतों के पास समर्थन मांगने आने लगे हैं। हरियाणा में लगभग दो दर्जन खाप पंचायतें हैं। इनमें से कुछ जाति व गोत्र की हैं, कुछ गांवों या क्षेत्रों की।

विधानसभा चुनाव के लिए बनाई जाएगी रणनीति

khap panchayat role in haryana election

हरियाणा में राजनीतिक दल और नेता आमतौर पर खाप पंचायतों से भिड़ने से परहेज करते रहें हैं। महम और कंडेला कांड इसके उदाहरण हैं। वर्ष 2005 में तत्कालीन इनेलो सरकार के शासन में किसानों पर गोलियां बरसाई गई थीं जिसमें कुछ किसान मारे गए थे। तब इनेलो ने किसानों से बिजली बिलों की माफी का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

इसके विरोध में कंडेला के 36 बिरादरियों की खापों से जुड़े लोग सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। बाद में नतीजा यह हुआ कि इनेलो को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। इससे पहले इनेलो शासन में ही महम 24 खापों के लोग भी इनेलो के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। इनेलो शासन में हुए इन दोनों कांडों में खापों ने अपनी प्रतिष्ठा का मामला बना लिया था।

खाप पंचायतें अपनी मांगों को लेकर बीच-बीच में आंदोलन तेज करती रही हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि सगोत्र शादियों को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। एक ही गांव के भीतर भी शादियां नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो खाप की मांगों का पहले ही समर्थन कर चुके हैं।

खाप पंचायतों की नाराजगी पड़ सकती है भारी

khap panchayat role in haryana election

हरियाणा में राजनीतिक दल और नेता आमतौर पर खाप पंचायतों से भिंड़ने से परहेज करते रहें हैं। महम और कंडेला कांड इसके उदाहरण हैं। वर्ष 2005 में तत्कालीन इनेलो सरकार के शासन में किसानों पर गोलीकांड हुआ था। और कुछ किसान मारे भी गए थे। सर्व खाप पंचायत हरियाणा के अध्यक्ष विजेंद्र योगी के अनुसार चुनाव से पहले इनेलो ने किसानों से बिजली बिलों की माफी का वादा किया था। लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

 इसके विरोध में कंडेला के 36 बिरादरियों की खापों से जुड़े लोग सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। बाद में नतीजा यह हुआ कि इनेलो को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। इससे पहले इनेलो शासन में ही महम 24 खापों के लोग भी इनेलो के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे और यह कांड भी आज तक चर्चित है। इनेलो शासन में हुए इन दोनो कांडों में खापों ने अपनी प्रतिष्ठा का मामला बना लिया था।

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