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हरियाणाः खाप पंचायत ने जताई आपत्ति, कहा- समलैंगिकता, लिव इन जैसे फैसले समाज हित में नहीं

Mon, 12 Nov 2018 09:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चरखी दादरी(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चरखी दादरी(हरियाणा) Updated Mon, 12 Nov 2018 09:15 AM IST
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Khap Panchayat in Charkhi Dadri on Homosexuality and live in issue
सर्वखापीय महापंचायत

समलैंगिकता, लिव इन और शादी के बाद अन्य से शारीरिक संबंधों पर सर्वखापीय महापंचायत ने आपत्ति जताई है। गांव चरखी में रविवार को हुई महापंचायत में उत्तर भारत की 140 खापों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के यह फैसले समाज हित में नहीं हैं, केंद्र सरकार से इसमें हस्तक्षेप करते हुए पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।

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चरखी दादरी की सांगवान खाप-40 के आह्वान पर गांव चरखी के एससीआर स्कूल में रविवार दोपहर सर्वजातीय सर्वखापीय महापंचायत का आयोजन हुआ।

महापंचायत में हरियाणा, यूपी, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली के खाप प्रतिनिधियों ने नौ एजेंडों पर चर्चा की। महापंचायत में खाप से बाहर अंतर्जातीय विवाह की स्वीकृति देने, भ्रूण हत्या करने वाले परिवारों और चिकित्सकों का सामाजिक बहिष्कार, बच्चों को संस्कारित करने और खाप पंचायतों के बिगड़ते स्वरूप को सुधारने के लिए रणनीति बनाने के एजेंडे पर खाप प्रतिनिधियों ने सहमति जताई।
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 महापंचायत में खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि देश में अपराध बढ़ने का कारण खाप पंचायतों की परंपरा का कमजोर होना है। समलैंगिकता, लिव इन रिलेशनशिप और विवाहेत्तर संबंध की आजादी समाज हित में नहीं है। महापंचायत ने केंद्र सरकार से इन फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की। महापंचायत की समाप्ति पर सांगवान खाप प्रधान सोमबीर ने कहा कि इन एजेंडों पर उत्तरी भारत की खापों ने अपनी सहमति जता दी है। इसकी प्रति सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, हरियाणा के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को प्रेषित की जाएगी।
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महापंचायत के नौ एजेंडे
- बच्चियों और महिलाओं के साथ देश में हो बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के कारण एवं समाधान।
- लिव इन रिलेशनशिप में बच्चा पैदा करने का सरकार ने जो अधिकार दिया है वो निरस्त करवाना।
- शादी के बाद पति-पत्नी का किसी अन्य से संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी से बाहर न रखना।
- समलैंगिकता (स्त्री का स्त्री से और पुरुष का पुरुष से) शादी करने के फैसले को वापस करवाना।
- सम गोत्र, गांव-गुहांड और खाप में शादी न करने का कानून हिंदू मैरिज एक्ट में लागू करवाना।
- भ्रूण हत्या करने वाले परिवारों और चिकित्सक का सामाजिक बहिष्कार करना।
- बच्चों में संस्कार पैदा करने के लिए माता-पता और समाज द्वारा उन्हें प्रेरित करना।
- खाप पंचायतों का बिगड़ा स्वरूप जैसे एक खाप में दो या इससे अधिक प्रधान होना, ठीक करना।
खाप से बाहर अंतर्जातीय विवाह को मंजूरी देना और ऐसे लड़का-लड़की को समाज में सम्मान देना।

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