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Punjab: कनाडा में फ्लाप हुआ खालिस्तान जनमत संग्रह, पंजाब में बैठे अभिभावकों की बच्चों को सलाह-दूर रहें

Tue, 18 Jul 2023 02:33 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 18 Jul 2023 02:33 PM IST
सार

कनाडा से प्रसिद्ध लेखक जोगिंदर बासी का कहना है कि प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस की ओर से अवैध जनमत संग्रह उन लोगों का एक निरर्थक प्रयास है, जो कनाडा-भारत संबंधों को पटरी से उतारना चाहते हैं। खालिस्तानी लोगों की संख्या काफी कम है, लेकिन ये लोग पंजाबी विद्यार्थियों को उकसाते हैं और उनको कट्टरपंथ की राह पर चलाते हैं।

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Khalistan referendum held in Canada flop as people not show interest and participate in it
कनाडा में खालिस्तान समर्थक और भारत प्रेमी आमने-सामने। - फोटो : फाइल

विस्तार

तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह का अगला चरण कनाडा में हुआ, लेकिन लोगों ने इसके प्रति उत्सुकता व भागीदारी नहीं दिखाई। लिहाजा रेफरेंडम की वोटिंग पिछली बार के मुकाबले में आधी से भी कम रह गई है। इस बार भारतीय कूटनीति की बदौलत शोर शराबा व हो हल्ला भी नहीं मचा और शांतिपूर्वक तरीके से कट्टरपंथियों ने गुरुद्वारा में रेफरेंडम की वोटिंग करवाई। 

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भारत ने कनाडा से रेफरेंडम की वोटिंग के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल किए जाने पर कनाडा के प्रति नाराजगी दोहराई, वहीं पंजाब में रहने वाले अभिभावक चिंता में थे, क्योंकि ऐसी बातें सामने आ रही थीं कि एक आतंकी संगठन की ओर से करवाई जा रही रेफरेंडम वोटिंग में अगर विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं तो उनको पंजाब पुलिस से पीसीसी नहीं मिलेगी और उनकी पीआर में दिक्कत आ सकती है।
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जनमत संग्रह, अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की ओर से आयोजित किया गया। जो ग्रेटर टोरंटो एरिया या जीटीए में मिसिसॉगा शहर के माल्टन क्षेत्र में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सुबह 8:30 से शाम पांच बजे तक हुआ। पिछला जनमत संग्रह, पिछले साल सितंबर में ब्रैम्पटन में एक सार्वजनिक सामुदायिक केंद्र में आयोजित किया गया था, इस बार एक समान स्थान का उपयोग करने की अनुमति से इनकार कर दिया गया। क्योंकि भारत सरकार ने कनाडा पर काफी प्रेशर बना रखा था।


एसएफजे का दावा है कि तथाकथित जनमत संग्रह उन लोगों की मांग के कारण जीटीए में दूसरी बार आयोजित किया जा रहा है, जो पिछले दौर में भाग लेने में असमर्थ थे। मतदान केंद्र का नाम कनाडा के निवासी मोहिंदर सिंह कूनर के नाम पर रखा गया था, जिनकी 15 जुलाई 1989 को भारत में घुसने की कोशिश के दौरान पाकिस्तान की सीमा के पास राजस्थान में सीमा सुरक्षा बल ने मार गिराया था। कूनर खालिस्तान से जुड़ा था। 

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ये निरर्थक प्रयास: बासी 

कनाडा से प्रसिद्ध लेखक जोगिंदर बासी का कहना है कि प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस की ओर से अवैध जनमत संग्रह उन लोगों का एक निरर्थक प्रयास है, जो कनाडा-भारत संबंधों को पटरी से उतारना चाहते हैं। खालिस्तानी लोगों की संख्या काफी कम है, लेकिन ये लोग पंजाबी विद्यार्थियों को उकसाते हैं और उनको कट्टरपंथ की राह पर चलाते हैं। भारत सरकार ऐसे लोगों को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जल्दी नहीं देगी। यही वजह है कि पिछले साल जहां एक लाख 10 हजार लोगों ने रेफरेंडम में हिस्सा लिया था वहीं अबकी बार संख्या काफी कम है। यह जनमत संग्रह जो अक्सर गलत सूचना और प्रचार से प्रेरित होते हैं, हमारे समाज में विभाजन पैदा करने और उन मूल्यों को कमजोर करने की क्षमता रखते हैं, जिनके लिए कनाडा खड़ा है। 


सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक फीसदी लोग ही वहां खालिस्तानी लहर से जुड़े हैं, लेकिन पंजाब से हर साल 1.5 लाख से अधिक विद्यार्थी कनाडा स्टडी के लिए जा रहे हैं, जिनको खालिस्तानी उकसाकर अपने साथ जोड़कर राजनीति चमकाते हैं।

8 जुलाई को किल इंडिया रैली फ्लाप हुई
कनाडा से गुरभेज सिद्धू का कहना है कि 8 जुलाई को किल इंडिया रैली फ्लाप हुई और खालिस्तानी समर्थकों को मुंह की खानी पड़ी थी। इस बार भी कनाडा में भारी संख्या में कट्टरपंथी लोगों का विरोध शुरू हो गया था। पंजाब के काफी लोग डटकर खालिस्तान के विरोध में खड़े भी हुए हैं।

भारत का दबाव काम आया, रहा दहशत का माहौल
कनाडा के ब्रैंप्टन में रहने वाले एक युवक के पिता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भारत का दबाव काम आया और काफी दहशत भरा माहौल था। ऐसी खबरें वायरल हो रही थी कि कनाडा में रेफरेंडम 2020 में जो हिस्सा लेंगे उनको भारतीय वीजा भी आसानी से नहीं मिलेगा और उनको कनाडा की नागरिकता लेते समय जो पीसीसी की जरूरत होगी, वह आसानी से पंजाब पुलिस नहीं देगी। लिहाजा इसका काफी असर हुआ और 40 हजार से भी कम लोग रेफरेंडम में हिस्सा लेने के लिए आए, जबकि पिछले साल यह संख्या एक लाख से अधिक थी।

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